
जैसे ही यूपी बोर्ड की परीक्षा शुरू हो जाती है वैसे ही घर का माहौल किसी युद्ध के स्तर से काम नहीं होता। छात्र महीनों की मेहनत को 10 घंटे में कागज पर उतारकर लौट आते हैं। अक्सर माता-पिता की यह उत्सुकता रहती है और चिंता भी रहती है कि कहीं बच्चे अनजाने में कुछ गलतियां ना कर बैठें, जिससे बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। माता-पिता यह नहीं जानते कि जब बच्चे पेपर देकर घर लौटते हैं तो उन्हें थोड़ा पल सुकून का देना चाहिए, ना कि सवालों की छड़ी लगा देनी चाहिए। ऐसे में माता-पिता को पता होना चाहिए कि जब बच्चे पेपर देकर लौटे तो उनसे किस प्रकार के क्वेश्चन ना पूछे जाएं। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि पेपर देकर लौटने पर बच्चों से किस प्रकार के सवाल न पूछें। इसके लिए हमने कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। पढ़ते हैं आगे...
जब आपका बच्चा परीक्षा केंद्र से बाहर निकले तो आप कभी भी अपने बच्चों से यह न पूछें कि कितने नंबर आ जाएंगे या कठिन वाला सवाल हल हुआ या नहीं। एक्सपर्ट के मुताबिक, ऐसे सवाल बच्चों के अंदर तनाव पैदा करते हैं। यदि पेपर थोड़ा सा भी खराब हुआ है तो इस सवाल के कारण उसके मन में एक गिल्ट पैदा हो जाता है।
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माता-पिता को अक्सर अपने बच्चों से यह भी नहीं पूछना चाहिए कि तुम्हारे दोस्त का पेपर कैसा हुआ है। याद रखिए हर बच्चा अलग होता है और बच्चे का दिमाग भी बहुत अलग है। ऐसे में अपने बच्चों को कमतर आंकना और दूसरे के बच्चे को अच्छा समझना आपके बच्चे के आत्मविश्वास को कमजोर कर सकता है।
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घर आते ही बच्चों के साथ आंसर की को लेकर नहीं बैठना चाहिए। कुछ माता-पिता की आदत होती है कि वह क्वेश्चन पेपर हल करना शुरू कर देते हैं, जबकि इसके कारण बच्चों का मानसिक दिबाव बढ़ता है। उदाहरण यदि कोई एक प्रश्न जो कि उसे लग रहा है कि वह सही है और आपने कहा कि गलत है तो बच्चों को और तनाव में डाल सकता है।
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परीक्षा से आने के बाद अगले पेपर की तैयारी करने के लिए बच्चों को नहीं बैठाना चाहिए। पहले उसे थोड़ा सा आराम देना चाहिए और उसको पोषण तत्व भी देने चाहिए, जिससे कि बच्चे का दिमाग रिफ्रेश हो सके और वह नए पेपर की तैयारी के लिए खुद को तैयार कर सके।
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