Fri Apr 17, 2026 | Updated 11:11 PM IST
image

स्कूलों में मोबाइल बैन का दिखने लगा असर, बढ़ गई बच्चों की एकाग्रता; जानें क्यों स्मार्टवॉच पर रोक भी है बेहद जरूरी?

स्कूलों में मोबाइल फोन पर प्रतिबंध से छात्रों की एकाग्रता और शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार देखा गया है। अब विशेषज्ञ स्मार्टवॉच पर भी रोक लगाने की वकालत कर रहे हैं, क्योंकि वे भी ध्यान भटकाती हैं और परीक्षा में दुरुपयोग हो सकता है।
Editorial
Updated:- 2026-04-13, 19:51 IST

आज के डिजिटल युग में स्कूलों के अंदर मोबाइल फोन और स्मार्ट गैजेट्स पर बढ़ती पाबंदी एक नई बहस का विषय है। बता दें कि जिन स्कूलों ने कैंपस में स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगाई है, वहां बच्चों के व्यवहार और एजुकेशन में सकारात्मक सुधार देखे जा रहे हैं। अब वहीं स्मार्टफोन के साथ-साथ स्मार्टवॉच को भी बैन करने की बात भी चल रही है। ऐसे में ये जानना तो बनता है कि स्कूलों में फोन और स्मार्टवॉच का बैन होना क्यों जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि यह बदलाव बच्चों के भविष्य के लिए क्यों जरूरी है? इसके लिए हमने कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं इस लेख के माध्यम से...

एकाग्रता में सुधार और पढ़ाई पर ध्यान

जैसे ही स्कूलों से मोबाइल फोन हटे, शिक्षकों ने देखा कि छात्रों की एकाग्रता का लेवल काफी बढ़ गया है। स्मार्टफोन के नोटिफिकेशंस बच्चों के दिमाग को लगातार भटकाते रहते हैं। जब फोन पास नहीं होता, तो बच्चों का ध्यान डिजिटल दुनिया से हटकर सीधे ब्लैकबोर्ड और टीचर्स की बातों पर केंद्रित होता है। इससे न केवल उनकी समझने की क्षमता बढ़ी है, बल्कि वे क्लास में सक्रिय रूप से सवाल-जवाब भी करने लगे हैं।

2 - 2026-04-13T190214.058

स्मार्टवॉच पर रोक क्यों है सही?

  • स्मार्टवॉच हाथों में बंधी होती है, जिससे बच्चा बिना किसी की नजर में आए गेम खेल सकता है या चैटिंग कर सकता है।
  • स्मार्टवॉच में इंटरनेट और मैसेजिंग की सुविधा होती है, जिसका यूज परीक्षाओं में गलत तरीके से किया जा सकता है।

इसे भी पढ़ें -क्या आपका बच्चा भी डिमांड पूरी कराने के लिए करता है ब्लैकमेल? एक्सपर्ट से जानें पेरेंटिंग के ये खास टिप्स

बार-बार वाइब्रेशन और अलर्ट्स बच्चों के डीप वर्क के प्रोसेस को रोकता है इसलिए, एजुकेशन माहौल को शुद्ध रखने के लिए स्मार्टवॉच पर भी पाबंदी लगाना समझदारी भरा कदम है।

1 - 2026-04-13T190218.413

स्किल्स और फिजिकल हेल्थ को बढ़ावा

  • ब्रेक के दौरान अब बच्चे स्क्रीन देखने के बजाय एक-दूसरे से बातें करते हैं और दोस्त बनाते हैं, जो उनके मानसिक विकास के लिए बहुत जरूरी है।
  • डिजिटल मनोरंजन के अभाव में बच्चे मैदान की ओर लौट रहे हैं। वे दौड़ने-भागने वाले खेलों में हिस्सा ले रहे हैं, जिससे उनकी शारीरिक फिटनेस बेहतर हो रही है।
  • सोशल मीडिया की तुलना और साइबर बुलिंग जैसी समस्याओं से दूर रहकर बच्चे अब अधिक खुश और तनावमुक्त महसूस कर रहे हैं।

इसे भी पढ़ें - बच्चा वक्त न मिलने पर हो रहा है बागी? आजमाएं ये 'क्वालिटी टाइम' फॉर्मूला, जिद की जगह बढ़ेगा प्यार

अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

Images: Freepik/shutterstock

यह विडियो भी देखें

Herzindagi video

Disclaimer

हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, [email protected] पर हमसे संपर्क करें।