
Republic Day 77 Years Journey: हर साल देशभर में गणतंत्र दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन विभिन्न जगहों पर झंडा फहराया जाता है। इस दौरान दिल्ली में तो एक अलग ही रौनक देखने को मिलती है। साथ ही स्कूलों और कॉलेजों में विभिन्न तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। वहीं परेड भी इस दिन की रौनक मानी जाती है। कहते हैं कि इसी दिन भारत गणराज्य बना था।
इस साल भारत 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। ये सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि उस लंबे सफर की कहानी है जिसमें देश संविधान के सहारे आगे बढ़ता रहा है। हर साल गणतंत्र दिवस की यात्रा खास रही है। आज हम आपको अपने इस लेख में बताएंगे कि इन 77 सालों में गणतंत्र यात्रा कितनी बार बदली है? आइए जानते हैं-

1950 की बात है जब 26 जनवरी को दिल्ली में एक अलग ही रौनक देखने को मिल रही थी। आजादी के बाद देश एक नए दौर में कदम रखने जा रहा था। इसी दिन डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारी ने शपथ दिलाई थी।
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इसके बाद प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और उनके मंत्रिमंडल ने भी जिम्मेदारी संभाली थी। ये ऐतिहासिक आयोजन उसी जगह हुआ, जिसे पहले राजपथ कहा जाता था और 2022 में इसका नाम बदलकर कर्तव्य पथ कर दिया गया था।
भारत ने पहले ही गणतंत्र दिवस से विदेशी मेहमानों को बुलाने की परंपरा शुरू कर दी थी। 1950 में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो पहले चीफ गेस्ट बने थे। इसके बाद हर साल दुनिया के अलग-अलग देशों के बड़े नेता इस समारोह में शामिल होते रहे। 2026 में ये परंपरा एक नए मोड़ पर पहुंची है, क्योंकि पहली बार यूरोपीय संघ की शीर्ष नेतृत्व जोड़ी को एक साथ आमंत्रित किया गया है।
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इस बार यूरोपियन कमीशन की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा परेड का हिस्सा होने जा रहे हैं।
आपको बता दें कि पहले Republic Day के मौके पर परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रम नेशनल स्टेडियम में हुआ काते थे। शाम के समय राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद घोड़ों की बग्घी में बैठकर कार्यक्रम स्थल पहुंचते थे, जो लोगों के लिए एक खास आकर्षण हुआ करता था। इसी दिन पहली बार वायुसेना का फ्लाई पास्ट भी देखने को मिला था, जिसने आसमान में देश की ताकत दिखाई थी।
1955 से गणतंत्र दिवस परेड को नियमित रूप से आयोजित किया जाने लगा। शुरुआत के कुछ सालों में परेड कभी नेशनल स्टेडियम तो कभी लाल किला और कभी रामलीला मैदान में हुआ करता था, लेकिन समय के साथ इसमें सेना, अर्धसैनिक बल, झांकियां और वीरता पुरस्कार पाने वाले बच्चों को भी शामिल किया जाने लगा।
1959 से पहले ये बच्चे हाथियों पर नजर आते थे, लेकिन अब खुली जीप में राष्ट्रपति को सलामी देते हैं। वहीं झांकियां देश की संस्कृति, विकास, परंपरा और उपलब्धियों को दिखाने लगीं। 2001 में संसद पर हमले के बाद सुरक्षा कारणों से 2002 से परेड के रास्ते में बदलाव कर दिया गया। अब परेड इंडिया गेट से शुरू होकर आईटीओ और दरियागंज होते हुए लाल किले तक जाता है।
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संविधान लागू होने के बाद भारत में कई तरह के बदलाव देखने को मिले। हर एक नागरिक को वोट देने का अधिकार मिला, समाज में उन्हें बराबरी का हक मिला, राज्यों का पुनर्गठन हुआ और पंचायती राज व्यवस्था से लोकतंत्र गांव-गांव तक पहुंच गया।
77 साल बाद भी गणतंत्र दिवस हमें यही याद दिलाता है कि भारत की असली ताकत उसका संविधान और उसके लोग हैं। कुछ इस तरह 77 सालों में गणतंत्र यात्रा रही है। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
Image Credit- Freepik/AI Generated
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