
गणतंत्र दिवस 2026 इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रहा है। इस बार परंपरा से हटकर केंद्र सरकार ने कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाली परेड की गैलरी को भारत की प्रमुख और पवित्र नदियों के नाम पर रखने का निर्णय लिया है। हमारे देश की पवित्र नदियां जिन्हें देश की विरासत के रूप में पूजा जाता है और इन नदियों से सदियों से अपने जल से देश के न जाने कितने स्थानों को सींचा है। भारत की ऐसी ही पवित्र नदियों गंगा, घाघरा, गोदावरी, कावेरी से लेकर ब्रह्मपुत्र तक को सम्मान देने के लिए केंद्र सरकार ने यह निर्णय लिया है। इस परेड गैलरी के नाम नदियों के नाम पर रखे जाने के बाद से ही ये सभी नदियां अब केवल भौगोलिक पहचान नहीं रहेंगी, बल्कि गणतंत्र दिवस के राष्ट्रीय मंच पर भारत की सभ्यता, संस्कृति और अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा के रूप में सम्मानित की जाएंगी। आइए आपको बताते हैं इस साल का गणतंत्र दिवस ऐतिहासिक क्यों है और नदियों के नाम पर क्यों रखा जा रहा है परेड गैलरी का नाम।
अब तक गणतंत्र दिवस परेड में गैलरी को सेक्टर या ब्लॉक के आधार पर पहचाना जाता रहा है, लेकिन इस साल 2026 में यह परंपरा बदली जा रही है। गणतंत्र दिवस 2026 में परंपरा को तोड़ते हुए कर्तव्य पथ पर परेड गैलरी का नाम भारत की प्रतिष्ठित नदियों के नाम पर रखा गया है। गंगा और घाघरा से लेकर गोदावरी, कावेरी और ब्रह्मपुत्र तक सभी नदियों के नाम पर दर्शक गैलरी का नाम रखना वास्तव में भारत की सभ्यता, संस्कृति और अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा के रूप में सम्मानित करता है। इस दौरान लगभग 2,000 कलाकार प्रस्तुति देंगे, जिससे यह राष्ट्रीय उत्सव भारत की जल विरासत को सम्मान देगा। यह कदम न केवल सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि भारत अपनी प्राकृतिक धरोहर को कितना महत्व देता है।
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भारत की हर प्राचीन सभ्यता नदियों के किनारे विकसित हुई है। जहां एक तरफ गंगा को मोक्षदायिनी माना जाता है, वहीं कावेरी को दक्षिण भारत की जीवन रेखा के रूप में देखा जाता है। गोदावरी को ‘दक्षिण की गंगा’ कहा जाता है और ब्रह्मपुत्र पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति और अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। इन नदियों ने सदियों से न सिर्फ खेती और व्यापार को बढ़ावा दिया है बल्कि साहित्य, कला और आध्यात्मिक परंपराओं को भी समृद्ध किया है। गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर इन्हीं नदियों को सम्मान देना, भारत की जड़ों से जुड़ने की एक अलग पहल है।
गणतंत्र दिवस 2026 के समारोह में इस साल संस्कृति मंत्रालय द्वारा चयनित 2500 कलाकारों के समूह द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। ये कलाकार नृत्य, संगीत और लोक कलाओं के माध्यम से नदियों से जुड़ी भारत की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करेंगे। इस परेड में अलग-अलग राज्यों की झलक, उनकी लोक धुनें और पारंपरिक नृत्य शामिल होंगे। इस साल 77वीं गणतंत्र दिवस परेड के लिए लगभग 10,000 विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया है। इनमें आय और रोजगार सृजन में अनुकरणीय कार्य करने वाले, सर्वश्रेष्ठ नवप्रवर्तन, स्टार्टअप, स्वयं सहायता समूह और विभिन्न सरकारी पहलों के तहत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले लोग शामिल होंगे।

पिछले साल तक परेड में दर्शकों के बैठने के लिए जो गैलरी थी उसकी पहचान सिर्फ नंबरों से की जाती थी। इस साल इन गैलरियों का नाम गंगा, यमुना, ब्यास, ब्रह्मपुत्र, गंगा, गोदावरी, कोसी और कावेरी जैसी नदियों के नाम पर रखा गया है। जो वास्तव में एक अलग पहल है।
भारत सरकार की नदियों को सम्मान देने की ऐसी पहल वास्तव में खास है और गणतंत्र दिवस की परेड गैलरी को भी हर बार से एक अलग पहचान दिला रही है। आपको यह स्टोरी अच्छी लगी तो इसे शेयर जरूर करें और ऐसे अन्य आर्टिकल पढ़ने के लिए जुड़ी रहें अपनी साइट हरजिंदगी के साथ।
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