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संसद में रखा गया बड़ा प्रस्ताव, शादीशुदा जोड़ों के लिए 'Joint Tax Filing'; जानें कैसे बचेगा आपका पैसा?

आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने संसद में विवाहित जोड़ों के लिए 'जॉइंट टैक्स फाइलिंग' का प्रस्ताव रखा है। इसका मुख्य उद्देश्य मध्यमवर्गीय परिवारों पर टैक्स का बोझ कम करना है। 
Editorial
Updated:- 2026-03-19, 15:48 IST

Tax System में सुधार को लेकर आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने संसद में एक प्रस्ताव पेश किया है। उन्होंने मैरेड लोगों के लिए 'जॉइंट टैक्स फाइलिंग' (Joint Tax Filing) की बात रखी है। बता दें कि इस प्रस्ताव का मेन उद्देश्य मीडियम वर्गीय परिवारों पर पड़ने वाले टैक्स के बोझ को कम करना है। ऐसे में इस नई व्यवस्था के बारे में जानना तो बनता है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि 'जॉइंट टैक्स फाइलिंग' क्या है और इससे आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा। जानते हैं इस लेख के माध्यम से...

क्या है 'जॉइंट टैक्स फाइलिंग' का गणित?

राघव चड्ढा ने उदाहरण के जरिए मौजूदा सिस्टम की खामी को उजागर किया। मानों कि दो परिवार हैं, जिनकी कुल सालाना आय 20 लाख रुपये है। परिवार A: यहां पति और पत्नी दोनों 10-10 लाख रुपये कमाते हैं। अलग-अलग टैक्स छूट का फायदा मिलने के कारण इस परिवार पर टैक्स का बोझ बहुत कम या शून्य हो जाता है।

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परिवार B: यहां केवल एक सदस्य 20 लाख रुपये कमाता है, जबकि दूसरा पार्टनर घर संभालता है। मौजूदा नियमों के अनुसार, इस परिवार को लगभग 1.92 लाख रुपये का टैक्स देना पड़ता है, भले ही पूरे घर की कुल कमाई परिवार A के बराबर ही हो।

आगे ये समझाते हैं कि टैक्स सिस्टम को व्यक्ति के बजाय परिवार को एक इकाई मानना चाहिए। जब रसोई एक है और बजट एक है, तो टैक्स भरते समय परिवार का अस्तित्व अलग क्यों कर दिया जाता है?

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2. जॉइंट टैक्स रिटर्न कैसे करेगा काम?

बता दें कि यदि सरकार इस प्रस्ताव को मानती है, तो टैक्स फाइल करने के तरीके में बड़े बदलाव आ सकते हैं:

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  • जॉइंट फाइलिंग करने वाले कपल के लिए टैक्स स्लैब की लिमिट बढ़ाई जा सकती है। जैसे 6 लाख तक शून्य टैक्स और उसके बाद ऊंचे स्लैब।
  • स्टैंडर्ड डिडक्शन और इंवेस्ट पर मिलने वाली राहत लिमिट को पति-पत्नी की शेयर इनकम के अनुसार एडजस्ट किया जा सकता है।
  • कपल खुद तय कर सकेगा कि उन्हें अलग-अलग फाइल करने में फायदा है या एक साथ।

नोट -  बता दें कि राघव चड्ढा ने मांग की कि घायल सैनिकों को मिलने वाली डिसेबिलिटी पेंशन पर पुरानी व्यवस्था की तरह पूरी इनकम टैक्स छूट बहाल की जाए। वहीं, बैंक खातों में 'मिनिमम बैलेंस' न रख पाने पर लगने वाले भारी जुर्माने को हटाने का प्रस्ताव दिया, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग को सीधी राहत मिलेगी।

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Images: Freepik/shutterstock

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