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Credit Card Rules: 1 अप्रैल से होने वाले ये 5 बड़े बदलाव, हर कार्ड होल्डर को जानना है जरूरी

1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड नियमों में कई बड़े बदलाव होने वाले हैं। आयकर विभाग द्वारा जारी ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स 2026 के तहत ये नियम लागू होंगे। इनमें क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन टैक्स भुगतान, स्टेटमेंट को पते के प्रमाण के रूप में उपयोग करना, पैन नंबर अनिवार्य होना और कंपनी द्वारा भुगतान की गई फीस पर टैक्स लगना शामिल है। 
Editorial
Updated:- 2026-02-17, 16:19 IST

1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड से जुड़े कई नियमों में बदलाव हो सकता है। यह बदलाव ट्रांजैक्शन से जुड़ा है, साथ ही टैक्स भुगतान भी इसमें शामिल है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि इन बदलावों के कारण उनकी जेब पर क्या असर पड़ेगा। यदि आप भी इसके बारे में जानना चाहते हैं तो आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि क्रेडिट कार्ड से जुड़े बदलाव क्या होने वाले हैं। पढ़ते हैं आगे...

हाल ही में ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स 2026 इनकम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा जारी हुए है। ऐसे में अंतिम मंजूरी और सुझावों पर विचार के बाद यह नियम 1 अप्रैल से लागू हो सकते हैं। अभी तक साल 1962 से चले आ रहे नियम ही लागू है। अगर यह नियम स्वीकार हो जाते हैं तो नए नियमों का पालन करना होगा।

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क्या हो सकते हैं बदलाव?

  • जो व्यक्ति एक से ज्यादा क्रेडिट कार्ड यूज करेगा और लिमिट 10 लाख या उससे ज्यादा है तो बैंक या कार्ड जारी करने वाली कंपनी यह जानकारी आयकर विभाग को देगी। वहीं अगर एक लाख से ज्यादा का बिल नगद में चुकाया जाता है तो यह जानकारी भी विभाग को दी जाएगी। हालांकि इस तरीके का नियम पहले भी थे। पुराने नियम के अनुसार कुछ जानकारियां पहले भी दी जाती थी।
  • करदाता ऑनलाइन टैक्स भरते समय क्रेडिट कार्ड का उपयोग भी कर सकेंगे। पहले यह सुविधा केवल नेट बैंकिंग और डेबिट कार्ड तक सीमित थी, लेकिन अब क्रेडिट कार्ड को भी आधिकारिक इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड में शामिल कर सकते हैं। 

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  • नए ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, अब आप क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट को भी एड्रेस प्रूफ के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। शर्त बस इतनी है कि यह बिल तीन महीने से ज्यादा पुराना नहीं होना चाहिए। यह बदलाव उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जिनके पास अन्य पारंपरिक पते के प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

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  • कंपनी द्वारा दिए गए क्रेडिट कार्ड के साल का शुल्क या मेंबरशिप फीस का भुगतान यदि कंपनी करती है, तो इसे कर्मचारी की सुविधा मानकर टैक्स लगाया जाएगा। टैक्स की गणना कार्ड पर हुए कुल खर्च के आधार पर होगी, जिसमें से कर्मचारी द्वारा स्वयं चुकाई गई राशि घटा दी जाएगी। यह नियम कॉर्पोरेट कार्ड के पर्सनल यूज पर लागू होता है।
  • अब क्रेडिट कार्ड आवेदन के लिए PAN नंबर अनिवार्य कर दिया गया है। इसके बिना कोई भी बैंक आपका आवेदन स्वीकार नहीं करेगा। इस नियम का मुख्य उद्देश्य बड़े लेन-देन को आयकर विभाग से जोड़कर टैक्स चोरी और फर्जी वित्तीय गतिविधियों पर लगाम लगाना है, जिससे आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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Images: Freepik/shutterstock

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