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24 घंटे में रिफंड और मिनटों में ITR, जानें पिछले 5 सालों में तकनीक ने कैसे आसान बनाई टैक्स पेयर्स की जिंदगी?

टेक्नीलॉजी ने पिछले 5 सालों में भारत में आयकर रिटर्न (ITR) भरने की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया है। अब टैक्सपेयर्स मिनटों में ITR फाइल कर सकते हैं और रिफंड भी 24-48 घंटों में मिल जाता है। प्री-फिल्ड फॉर्म, AI-आधारित प्रोसेसिंग, AIS/TIS, फेसलेस असेसमेंट और ई-वेरिफिकेशन जैसी सुविधाओं ने टैक्सपेयर्स का जीवन आसान बना दिया है, जिससे प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी हुई है।
Editorial
Updated:- 2026-01-30, 20:04 IST

भारत में आयकर रिटर्न (ITR) भरना कभी एक कठिन और थकाऊ प्रक्रिया मानी जाती थी, लेकिन पिछले 5 वर्षों में डिजिटल के दौर ने इसे पूरी तरह बदल दिया है। आज तकनीक की मदद से टैक्स पेयर्स न केवल मिनटों में अपना रिटर्न फाइल कर पा रहे हैं, बल्कि रिफंड भी रिकॉर्ड समय में उनके बैंक खातों में पहुंच रहा है। ऐसे में ये जानना तो बनता है कि टेक्नीलॉजी ने टैक्स पेयर्स की जिंदगी को कैसे आसान बनाया है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि टैक्स पेयर्स की जिंदगी कैसे आसान हो गई है। पढ़ते हैं आगे...

कैसे बनी टैक्स पेयर्स की जिंदगी आसान?

  • भारत सरकार द्वारा लॉन्च किया गया नया ई-फाइलिंग पोर्टल आधुनिक तकनीक और यूजर-फ्रेंडली इंटरफेस का मेल है। पहले जहां फॉर्म भरने में घंटों लगते थे, अब प्री-फिल्ड फॉर्म की सुविधा के कारण यह काम मिनटों में हो जाता है। आपकी सैलरी, बैंक ब्याज और टैक्स कटौती की जानकारी पहले से ही फॉर्म में दर्ज होती है, जिससे गलती की गुंजाइश कम हो गई है।

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  • वह दौर बीत गया जब रिफंड के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था। अब आयकर विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग कर रहा है। डेटा की प्रोसेसिंग इतनी तेज हो गई है कि कई मामलों में रिटर्न फाइल करने के 24 से 48 घंटों के भीतर रिफंड प्रोसेस हो जाता है। 
  • तकनीक के इस दौर में AIS और TIS सबसे बड़े गेम-चेंजर साबित हुए हैं। AIS में आपके साल भर के वित्तीय लेन-देन का पूरा ब्योरा होता है। इससे टैक्स पेयर को अपनी आय छिपाने या भूलने की चिंता नहीं रहती, जिससे नोटिस आने का खतरा कम हो जाता है।

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  • तकनीक ने टैक्स अधिकारियों और टैक्स पेयर्स के बीच के फिजिकल कनेक्शन काफी खत्म कर दिया है। फेसलेस असेसमेंट के जरिए अब जांच पूरी तरह ऑनलाइन और रैंडम तरीके से होती है। इससे भ्रष्टाचार में कमी आई है और प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष व पारदर्शी बनी है।

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  • अब आपको रिटर्न वेरीफाई करने के लिए कागजात पोस्ट से भेजने की जरूरत नहीं है। आधार ओटीपी और डिजिटल सिग्नेचर के जरिए आप स्मार्टफोन से ही ई-वेरिफिकेशन कर सकते हैं। इनकम टैक्स विभाग का मोबाइल ऐप टैक्स से जुड़ी हर जानकारी आपकी उंगलियों पर रखता है।

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