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पंजाब में आरटीओ को फेसलेस करने का फैसला केवल ट्रांसपोर्ट विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक सुधारों की एक बड़ी शुरुआत मानी जा रही है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने साफ संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में अन्य विभागों में भी फेसलेस व्यवस्था लागू की जाएगी और वहां भी ‘ताले’ लगाए जाएंगे।
इस योजना से सरकारी दफ्तरों में वर्षों से चली आ रही लालफीताशाही और भ्रष्टाचार पर सीधा प्रहार हुआ है। व्यक्ति और अधिकारी के बीच संपर्क कम होने से निर्णय प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी होगी। तय समयसीमा में काम पूरा करना अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी, अन्यथा कार्रवाई तय है।
दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार ने इसे लागू किया था। वहां फेसलेस मॉडल की सफलता के बाद अब पंजाब में इसे लागू किया गया है। यह दर्शाता है कि सरकार तकनीक को सुशासन का माध्यम बना रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, कॉल सेंटर और सेवा केंद्रों के जरिए सेवाओं का विकेंद्रीकरण किया गया है।

आरटीओ में ताला लगाना केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि यह संदेश है कि अब सिस्टम जनता के लिए खुलेगा, दफ्तरों के बंद कमरों में नहीं चलेगा। यह बदलाव भविष्य में राजस्व विभाग, नगर निकाय और अन्य नागरिक सेवा विभागों तक पहुंच सकता है।
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अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो पंजाब देश के उन राज्यों में शामिल होगा जहां सरकारी सेवाएं सबसे ज्यादा पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-अनुकूल होंगी। यह सुधार आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत प्रशासनिक नींव रखेगा।
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