
पंजाब में जल संकट एक गंभीर चुनौती बन चुका है, खासकर मालवा क्षेत्र में जहां भूजल स्तर खतरनाक हद तक गिर चुका है। इस पृष्ठभूमि में 2300 करोड़ की लागत से बनने वाली 149 किलोमीटर मालवा नहर परियोजना को दीर्घकालिक जल-सुरक्षा समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
यह परियोजना सतलुज नदी के सतही जल का बेहतर उपयोग कर भूजल पर दबाव कम करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि नहरी सिंचाई बढ़ेगी तो ट्यूबवेल आधारित खेती में कमी आएगी, जिससे जल-संतुलन सुधरेगा।

हालांकि परियोजना के मार्ग में बड़ी संख्या में पेड़-पौधों के हटाए जाने को लेकर पर्यावरणीय सवाल उठे हैं। सरकार का दावा है कि पर्यावरणीय नियमों के तहत काम होगा और हर कटे पेड़ के बदले नए पौधे लगाए जाएंगे।
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हेडवर्क्स निर्माण, नहर खुदाई और वितरण नेटवर्क से क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। निर्माण चरण के बाद सिंचाई आधारित कृषि से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
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मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे 'मालवा के भविष्य में निवेश' बताया है। यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो यह अन्य जल-संकटग्रस्त राज्यों के लिए भी मॉडल प्रोजेक्ट बन सकती है।
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मालवा नहर केवल एक ढांचा नहीं, बल्कि पंजाब के लिए जल-संरक्षण, टिकाऊ खेती और संतुलित विकास की दिशा में निर्णायक कदम है।
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Image Credit- X/Freepik
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