
पंजाब लंबे समय से गिरते भूजल स्तर की चुनौती से जूझ रहा था। मान सरकार ने इस समस्या का समाधान नहरी पानी, संरक्षण और पुनर्चक्रण के माध्यम से किया है। आज राज्य के अधिकांश खेत सतही जल से सिंचित हो रहे हैं, जिससे भूमिगत जल पर दबाव कम हुआ है। 84 प्रतिशत खेतों तक नहरी पानी पहुंचना केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि नीति की सफलता का प्रमाण है। 14-सूत्री कार्यक्रम के तहत जल प्रबंधन को कृषि नीति के केंद्र में रखा गया।

इससे खेती अधिक वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल बनी है। सबसे अहम पहल है ट्रीटेड वॉटर का कृषि उपयोग। प्रतिदिन 300 मिलियन लीटर पानी खेतों तक पहुंचाकर सरकार ने शहरी-ग्रामीण जल संतुलन का नया मॉडल पेश किया है।
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सोलर लिफ्ट सिंचाई और जल संचयन संरचनाएं ऊर्जा और पानी दोनों की बचत कर रही हैं। यह मॉडल आने वाले वर्षों में जल संकट से निपटने में सहायक होगा। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के शब्दों में, “हर खेत तक पानी पहुंचाना हमारा संकल्प है।” पंजाब आज केवल अनाज का कटोरा नहीं, बल्कि टिकाऊ और जिम्मेदार कृषि का उदाहरण बन चुका है।
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