
पंजाब सरकार की ईजी रजिस्ट्री और ईजी जमाबंदी पहलें केवल डिजिटल सेवाएं नहीं, बल्कि प्रशासनिक संस्कृति में बदलाव का संकेत हैं। इन सुधारों ने राजस्व विभाग को जवाबदेह, पारदर्शी और तेज़ बना दिया है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हर प्रक्रिया ट्रैक होने से रिश्वत, देरी और मनमानी की गुंजाइश लगभग खत्म हो गई है। QR कोड, डिजिटल सिग्नेचर और ऑटो-टाइमलाइन ने रिकॉर्ड में छेड़छाड़ को असंभव बना दिया है।

सरकार का अनुमान है कि इन सेवाओं से जनता को हर साल करीब 100 करोड़ रुपये की सीधी बचत हो रही है—जो पहले अतिरिक्त खर्च, दलाली और देरी में चली जाती थी। इससे न केवल नागरिकों का भरोसा बढ़ा है, बल्कि राज्य की आर्थिक दक्षता भी सुधरी है।
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भविष्य में इन डिजिटल रिकॉर्ड्स को बैंकिंग, न्यायिक और योजना-आधारित प्रणालियों से जोड़ने की तैयारी है, जिससे एक एकीकृत डिजिटल इकोसिस्टम बनेगा।

मुख्यमंत्री भगवंत मान का विज़न साफ है—“सरकार कागजों में नहीं, मोबाइल स्क्रीन पर दिखे।”
ईजी रजिस्ट्री और ईजी जमाबंदी ने पंजाब को उस दिशा में पहुंचा दिया है, जहां शासन पारदर्शी है, सेवाएं तेज़ हैं और नागरिक सशक्त हैं।
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