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Budget 2026: सस्ता कर्ज और कम टैक्स का सपना टूटा, बजट 2026 के बाद आम आदमी बोला- 'फिर हाथ लगी निराशा'

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट 2026 ने मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों को निराश किया। टैक्स स्लैब में राहत और होम लोन पर ब्याज दरों में कमी की उम्मीदें पूरी नहीं हुईं। लोगों ने बढ़ती कमाई के बावजूद पुराने टैक्स बोझ और ईएमआई के बढ़ते दबाव पर चिंता जताई। आम आदमी को लगा कि बजट में बड़े उद्योगों पर अधिक ध्यान दिया गया, जिससे उन्हें 'निराशा' ही हाथ लगी।
Editorial
Updated:- 2026-02-02, 16:19 IST

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 पेश किया, जो मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के लिए किसी ठंडे झटके से कम नहीं रहा। बता दें कि हर साल की तरह इस बार भी बजट से पहले आम लोगों की उम्मीदें बेहद ज्यादा थीं। ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि सरकार बढ़ती महंगाई को देखते हुए टैक्स स्लैब में बड़ी राहत देगी और होम लोन पर ब्याज दरों को कम करने के लिए ठोस कदम उठाएगी। लेकिन, बजट भाषण खत्म होते ही आम आदमी के चेहरे पर मायूसी साफ नजर आई। ऐसे में लोगों के मन की बात पता होनी जरूरी हैं। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि लोगों की कौन-सी उम्मीदें टूटी हैं। पढ़ते हैं आगे....

टैक्स स्लैब को लेकर उम्मीदें?

बता दें कि मध्यम वर्ग की सबसे बड़ी मांग इनकम टैक्स की सीमा को बढ़ाना थी। उम्मीद थी कि नई टैक्स व्यवस्था के तहत छूट की सीमा को ₹12 लाख से बढ़ाकर ₹15 लाख किया जाएगा। 

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ऐसे में जब हमने राजनगर एक्सटेंशन की स्तुति शाह से बात की तो उन्होंने कहा कि टैक्स स्लैब में कोई बदलाम न करके हम सभी की उम्मीदें टूटी हैं। हालांकि, सरकार कहती है कि वे स्थिरता चाहते हैं, लेकिन एक हमारे लिए इसका मतलब है कि बढ़ती कमाई के बावजूद टैक्स का वही पुराना बोझ हम पर पड़ रहा है।

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लोन और ईएमआई से नहीं मिली राहत

बता दें कि कुछ लोगों को उम्मीद थी कि बजट में होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली कटौती की सीमा बढ़ सकती है। वर्तमान में घर खरीदने वालों के लिए EMI का बोझ लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में बजट में रियल्टी सेक्टर या सस्ते कर्ज को लेकर कोई बड़ा ऐलान न होने से घर खरीदने का सपना देख रहे युवाओं को सबसे ज्यादा निराशा हुई है। सिकंद्राबाद की रानी गुप्ता कहती हैं कि सस्ते कर्ज का सपना तो अब हमने छोड़ ही दिया है बल्कि वर्तमान कर्ज को चुकाना भी हमारे लिए बेहद ही चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।

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बता दें कि सोशल मीडिया से लेकर चाय की दुकानों तक बजट की चर्चा हो रही हैं, ऐसे में केवल एक ही शब्द गूंज रहा है 'निराशा'। 

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लोगों का मानना है कि बजट बड़े उद्योगों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काफी ध्यान दिया गया है लेकिन हम जैसे लोग जो ईमानदारी से टैक्स भरते हैं, उसे बदले में कुछ खास नहीं मिला।

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Images: Freepik/pinterest

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