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Income Tax Budget 2026: टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं, जानें अब कितनी आय पर देना होगा टैक्स?

Union Budget 2026: निर्मला सीतारमण ने पिंक साड़ी में इस साल का बजट पेश किया है। बता दें कि उन्होंने कई सेक्टर्स में छूट की बात कही। वहीं, टैक्स और लोन को लेकर कई बड़े बदलाव बताए हैं। पढ़ते हैं इन बदलावों के बारे में...
Editorial
Updated:- 2026-02-01, 13:11 IST

इस बार का Budget 2026 मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है। आम लोगों का मुख्य फोकस 'टैक्स' और 'लोन है। ऐसे में बता दें कि नई टैक्स व्यवस्था के तहत टैक्स को लेकर कई प्रस्ताव रखे गए हैं। साथ ही, स्टैंडर्ड डिडक्शन में बदलाव किया गया, जिससे कर्मचारियों की नेट टेक-होम सैलरी में बढ़ोतरी होने के आसार है। वहीं लोन के क्षेत्र में भी कई फायदे होने वाले हैं। ऐसे में इन फायदों के बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि टैक्स और लोन के क्षेत्र में इस बार लोगों के लिए क्या खास है। पढ़ते हैं आगे...

टैक्स को लेकर क्या हुए बदलाव? (Budget 2026 Tax Changes)

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में विदेश घूमने वाले पर्यटकों को बड़ी राहत दी है। विदेशी टूर पैकेज पर लगने वाले TCS की दरों में कटौती की गई है। इस फैसले से विदेश घूमना अब कम खर्चीला होगा और टूरिज्म सेक्टर को नई रफ्तार मिलेगी।

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इस फैसले से विदेश घूमना अब कम खर्चीला होगा और टूरिज्म सेक्टर को नई रफ्तार मिलेगी। इससे अलग बजट 2026 के दौरान ITR फाइल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई कर दी है।

बजट 2026 में छोटे निवेशकों और प्रवासियों को राहत देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बड़ी घोषणा की है। अब ₹20 लाख तक की विदेशी संपत्ति के बारे में न बताने पर भी भारी जुर्माना नहीं लगाया जाएगा।

निर्मला सीतारमण ने स्वास्थ्य क्षेत्र को बड़ी राहत देते हुए कैंसर की 17 जीवन रक्षक दवाओं पर मूल सीमा शुल्क (Basic Customs Duty) को पूरी तरह खत्म करने या कम करने का ऐलान किया है।

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टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं

मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों की निगाहें इस बार भी इनकम टैक्स की दरों पर टिकी थीं, लेकिन सरकार ने इस मोर्चे पर 'यथास्थिति' (Status Quo) बनाए रखने का फैसला किया है। बजट 2026 में व्यक्तिगत आयकर की दरों और स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया हैbudhet 2026 loan and tax details

साथ ही एजुकेशन लोन पर ब्याज सब्सिडी और पर्सनल लोन की प्रोसेसिंग फीस में कटौती के लिए नए दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं। 

अक्सर टैक्स स्लैब देखकर मध्यम वर्ग घबरा जाता है कि ₹4 लाख से ऊपर की कमाई पर टैक्स लगेगा, लेकिन असलियत यह है कि स्लैब केवल एक गणना का ढांचा है।

नई टैक्स रिजीम में सरकार सेक्शन 87A के तहत ₹60,000 तक की भारी रिबेट देती है। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि आपकी कुल टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख तक है, तो रिबेट की वजह से आपका टैक्स शून्य हो जाता है।

नौकरीपेशा लोगों के लिए ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ यह 'नो-टैक्स' सीमा ₹12.75 लाख तक पहुंच जाती है। अतः ₹4 लाख की लिमिट केवल बड़े आय वर्ग के लिए टैक्स की शुरुआत है, मध्यम वर्ग के लिए नहीं।

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