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aaj ka suvichar 23 feb 2026

Aaj Ka Suvichar 23 Feb 2026: चिंता खत्म करने का सबसे आसान तरीका, आज के सुविचार में गुरुदेव से जानें

गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर के सुविचार के अनुसार, चिंता मन और वर्तमान क्षण के बीच की दूरी है। यह कोई बाहरी समस्या नहीं, बल्कि मन की आदत है। इसे खत्म करने का सबसे आसान तरीका श्वास पर ध्यान केंद्रित करना है, क्योंकि श्वास हमेशा वर्तमान में चलती है। भरोसा और श्वास आधारित अभ्यास मन को शांत कर चिंता से मुक्ति दिलाते हैं, जिससे व्यक्ति वर्तमान में जीना सीखता है।
Editorial
Updated:- 2026-02-23, 08:17 IST

हर सोमवार की तरह आज भी हम आपके लिए गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर जी का सुविचार लेकर आए हैं, ताकि आपके सप्ताह की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ हो। आज का सुविचार सिर्फ एक विचार नहीं, बल्कि चिंता को जड़ से खत्म करने का आसान सूत्र है।

आज की तेज भागदौड़ भरी जिंदगी में चिंता लगभग हर इंसान की साथी बन गई है, लेकिन अगर आपको पता चले कि चिंता कोई बाहरी समस्या नहीं, बल्कि एक समझ है जिसे बदलते ही मन हल्का और शांत हो सकता है, तो क्या आप इसे अपनाना नहीं चाहेंगी? आज के सुविचार में जानिए चिंता से मुक्ति का वही आसान तरीका, जो जीवन को भीतर से बदल सकता है।

आज का सुविचार

''चिंता मन और वर्तमान क्षण के बीच की दूरी के अतिरिक्त और कुछ नहीं है।''
-श्री श्री रवि शंकर

aaj ka suvichar 23 feb

चिंता असल में है क्या?

चिंता कोई बाहरी परिस्थिति नहीं, बल्कि मन की आदत है। ध्यान से देखें तो मन कभी स्थिर नहीं रहता। यह पेंडुलम की तरह भूतकाल में या भविष्य में झूलता रहता है।

  • भूतकाल में जाता है तो पछतावा और क्रोध लाता है।
  • भविष्य में जाता है तो डर और असुरक्षा।
  • यही झूलना चिंता की जड़ है।

मन और शरीर की दूरी = चिंता

जब शरीर वर्तमान में होता है और मन भविष्य में, तो दोनों के बीच एक खाली जगह बनती है। इसी दूरी को चिंता कहा जाता है। जब आप पूरी तरह वर्तमान में होते हैं, तब चिंता गायब हो जाती है। जैसे खेल खेलते समय, पेंटिंग करते समय और किसी चुनौतीपूर्ण स्थिति में, इन पलों में मन और शरीर एक ही जगह वर्तमान में होते हैं।

चिंता खत्म करने का सबसे आसान उपाय

इस दूरी को भरने का सबसे आसान तरीका श्वास है, क्योंकि श्वास हमेशा वर्तमान में चलती है। जैसे कल की सांस आज और भविष्य की सांस अभी नहीं ली जा सकती, ठीक वैसे जब ध्यान श्वास पर जाता है, मन तुरंत वर्तमान में लौट आता है।

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ध्यान और श्वास की शक्ति

श्वास आधारित अभ्यास सुदर्शन क्रिया, सहज ध्यान, ब्रीदिंग मेडिटेशन है। ये सभी मन को वर्तमान में स्थिर करते हैं और चिंता कम करते हैं। इससे अलावा, भरोसा चिंता को पिघला देता है। जिस शक्ति ने अब तक जीवन को संभाला है, वही आगे भी देखभाल करेगी।

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जब यह भरोसा गहरा होता है तब भविष्य का डर कम हो जाता है, मन शांत हो जाता है और व्यक्ति वर्तमान में जीना सीख जाता है।

चिंता कोई समस्या नहीं, बल्कि वर्तमान से दूरी का संकेत है। जितना आप श्वास और वर्तमान से जुड़ेंगे, उतनी ही चिंता मिटने लगेगी। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है,तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहे हर जिंदगी से।

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