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aaj ka suvichar 19 jan 2026

Aaj Ka Suvichar 19 Jan 2026: बिना कुछ किए आप कैसे सुंदर बन सकते हैं? आज के सुविचार में गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर से जानें

गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर का सुविचार बताता है कि सच्ची सुंदरता बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि आंतरिक चरित्र में है। जब हम शिकायत करना छोड़ देते हैं, जिम्मेदार और साहसी बनते हैं, और मन से कड़वाहट निकालते हैं, तब हमारा सौंदर्य अवर्णनीय हो जाता है। यह सुविचार हमें सिखाता है कि आंतरिक शुद्धता और शिकायत-मुक्त जीवन ही वास्तविक आकर्षण का स्रोत है, जो हमारी आत्मा को प्रकाशित करता है।
Editorial
Updated:- 2026-01-21, 13:07 IST

रोज की तरह आज हम आपके लिए गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर का एक ऐसा सुविचार लेकर आए हैं, जो न सिर्फ आपकी सुबह को ऊर्जा से भर देगा, बल्कि आपके जीवन को देखने का नजरिया भी बदल देगा। आज के इस सुविचार में गुरुदेव हमें बाहरी चमक-धमक से दूर असली खूबसूरती के बारे में बता रहे हैं, जो हमारे चरित्र की गहराई में छिपी है। आइए समझते हैं कि कैसे हमारा स्वभाव सुंदरता को तय करता है।

आज का सुविचार

''जब तुम शिकायत नहीं करते, जब तुम जिम्मेदार, साहसी, दृढ, खोखले और खाली होते हो, तब तुम्हारा सौंदर्य अवर्णनीय होता है।''
-गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर

aaj ka suvichar 19 jan 2025

शिकायत: सुंदरता की सबसे बड़ी दुश्मन

हमारे मन की आदत है कि वह हर चीज में कमी ढूंढता है। जब हम लगातार शिकायत करते हैं, तब हमारे चेहरे पर तनाव और मन में भारीपन आ जाता है। गुरुदेव के अनुसार, असली सुंदरता तब प्रकट होती है जब शिकायत का भाव पूरी तरह खत्म हो जाता है। शांत और शिकायत-मुक्त मन ही चेहरे पर दैवीय चमक लाता है।

जिम्मेदारी और साहस ही हैं असली गहने

शिकायत करना कायरता और गैर-जिम्मेदारी है, जो व्यक्ति समस्याओं का रोना रोने के बजाय समाधान की दिशा में कदम उठाता है, वही वास्तव में साहसी है। जब आप अपने जीवन की जिम्मेदारी खुद लेते हैं, तब आपकी पर्सनैलिटी में अलग ही आत्मविश्वास और आकर्षण झलकने लगता है।

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खाली होने का चमत्कार

यहां खाली होने का अर्थ मन में कोई कड़वाहट है, ईर्ष्या या पुराने बोझ का न होना। जैसे एक बांसुरी अंदर से खाली होती है तभी उसमें से मधुर संगीत निकलता है, वैसे ही जब हम भीतर से अहंकार और शिकायतों को निकालकर 'खाली' हो जाते हैं, तब हमारा अस्तित्व दिव्य और सुंदर हो जाता है।

बाहरी सजावट बनाम आंतरिक शुद्धता

हम बाहरी रूप को संवारने के लिए घंटों आईने के सामने बिताते हैं और महंगे प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करते हैं। लेकिन आंतरिक सौंदर्य को प्रकट करने के लिए हमें कुछ 'लगाना' नहीं बल्कि कुछ 'त्यागना' पड़ता है और वह सबसे पहली चीज शिकायत है। शिकायत मुक्त जीवन ही सबसे सुंदर जीवन है।

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साधना और सौंदर्य का संबंध

जो लोग आध्यात्मिक पथ पर हैं, उनके लिए शिकायत करना साधना में बाधा है। शिकायतें एक अदृश्य बोझ की तरह होती हैं जो आत्मा की चमक को फीका कर देती हैं। जब आप अपनी अंतर्निहित शक्ति को पहचान लेते हैं, तब आप बाहरी परिस्थितियों को दोष देना बंद कर देते हैं और यही आपके सौंदर्य को अवर्णनीय (जिसका वर्णन न किया जा सके) बना देता है।

आज का सुविचार हमें अंदर से सुंदर बनना सिखाता है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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