
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम हर चीज को तर्क और बुद्धि की कसौटी पर तौलते हैं। लेकिन क्या आपने कभी महसूस किया है कि जितना ज्यादा हम सोचते हैं, उतना ही ज्यादा संशय और तनाव हमें घेर लेता है? गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर हमें याद दिलाते हैं कि जीवन केवल गणित नहीं, बल्कि सुंदर 'भाव' है। आइए जानते हैं कि कैसे अपनी बुद्धि को थोड़ा विश्राम देकर और हृदय के भावों को जगाकर हम वास्तविक सुख और शांति पा सकते हैं।
''बौद्धिक, शुष्क और नीरस जीवन जीने से कहीं अधिक श्रेष्ठ है भावपूर्ण जीवन जीना।''
गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर

जब हम सिर्फ अपनी बुद्धि में उलझ जाते हैं, तब जीवन संशयों से भर जाता है। हमें हर बात पर, खुद पर और यहां तक कि अपनों पर भी शक होने लगता है। पुराने समय में संशय को बुद्धिमत्ता का प्रतीक माना जाता था, लेकिन आज का सत्य अलग है। संशय सिर्फ मन को भारी करता है और रिश्तों में दरार पैदा करता है। शुष्क बौद्धिक जीवन नीरस होता है, जहां आनंद की कोई जगह नहीं बचती।
यह भी पढ़ें- क्या आपके भीतर भी छिपी है अद्भुत कला? आज के सुविचार से जानें इसे जगाने का रहस्य
वास्तव में जीवन भाव-प्रधान है। मनुष्य ही नहीं, पशु-पक्षी और यहां तक कि पेड़-पौधे भी भाव से संचालित होते हैं। वैज्ञानिकों ने भी यह माना है कि पौधे हमारी भावनाओं पर प्रतिक्रिया देते हैं। यदि आप दो पौधों में से एक को सिर्फ मशीन की तरह पानी दें और दूसरे को प्रेम भाव से, तो भाव वाला पौधा ज्यादा खिलता है। जब हम भाव से जुड़ते हैं, तब हमारा अस्तित्व प्रकृति के साथ लयबद्ध हो जाता है।
भाव से भी श्रेष्ठ अवस्था 'भावातीत' होना है, यानी भावों के भी परे चले जाना। यही ध्यान है। जब हम मौन और शांति में अपनी आत्मा के साथ विश्राम करते हैं, तब दो अद्भुत चीजें होती हैं, हमारा हृदय भावों से भर जाता है और हमारी बुद्धि पहले से ज्यादा तेज हो जाती है। ध्यान हमें वह संतुलन देता है जहां हम भावनाओं में बहते नहीं, बल्कि उन्हें गहराई से अनुभव करते हैं।
यह भी पढ़ें- क्या प्रश्नों का शोर आपको थका रहा है? आज के सुविचार से शांति का रहस्य जानें
भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में स्पष्ट कहा है कि जो व्यक्ति अपनी आत्मा से नहीं जुड़ा, उसकी बुद्धि कभी स्थिर नहीं हो सकती। जिसके पास स्थिर बुद्धि नहीं, उसके भीतर ऊंचे भाव नहीं उठते और जिसके भीतर ऊंचे भाव नहीं, उसे शांति कैसे मिल सकती है? अंततः, बिना शांति के सुख की कल्पना करना असंभव है। सुख का मार्ग हमारे अंदर से ही होकर गुजरता है।
आज दिन भर में जो भी काम करें, उसे केवल 'कर्तव्य' समझकर नहीं, बल्कि 'भाव' के साथ करें। भोजन बनाना हो या ऑफिस की फाइल पूरी करना, इसमें थोड़ा प्रेम और शांति जोड़ दें। आपको परिणाम जादुई महसूस होंगे।
अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
यह विडियो भी देखें
Herzindagi video
हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, [email protected] पर हमसे संपर्क करें।