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aaj ka suvichar 30 jan 2026

Aaj Ka Suvichar 30 Jan 2026: क्या आपके भीतर भी छिपी है अद्भुत कला? आज के सुविचार से जानें इसे जगाने का रहस्य

श्री श्री रवि शंकर के 30 जनवरी 2026 का आज का सुविचार बताता है कि सच्ची सृजनशीलता शोर से नहीं, बल्कि मौन से उत्पन्न होती है। यह समझाता है कि कैसे एक शोरगुल वाला मन नए विचारों को रोकता है, जबकि शांत मन नवाचार को बढ़ावा देता है, ठीक वैसे ही जैसे प्रकृति की मौन रचनाएं। 
Editorial
Updated:- 2026-01-30, 08:02 IST

अक्सर आप सोचते हैं कि नई खोज करने या कुछ नया रचने के लिए बहुत ज्‍यादा सोचने, भाग-दौड़ करने और दिमाग पर जोर देने की जरूरत है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि प्रकृति की सबसे सुंदर रचनाएं जैसे एक कली का खिलना या एक बीज का अंकुरित होना, कितनी शांति से होती हैं?

आज 30 जनवरी 2026 के आज के सुविचार में, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर जी हमें बता रहे हैं कि वास्तविक सृजन का रास्ता शोर से नहीं, बल्कि मौन से होकर गुज़रता है। आइए जानते हैं, कैसे शांति ही सफलता की असली जननी है।

आज का सुविचार

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''सृजनशीलता केवल मौन से ही उत्पन्न हो सकती है।''
-गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर

मौन है सृजन की उपजाऊ भूमि

गुरुदेव कहते हैं कि हम सृजनशीलता को बुद्धि और प्रयास का परिणाम मानते हैं, किंतु वास्तविक प्रेरणा वह है जो बिना प्रयास के सहज रूप से आए। मौन वह उपजाऊ भूमि है, जहां से नवीनता और प्रेरणा का उद्भव होता है। जब तक मन शोर से भरा है, उसमें नया विचार आने की जगह ही नहीं बचती।

विचारों की भीड़ और आंतरिक कोलाहल

चिंताओं, इच्छाओं और पुरानी यादों की भीड़ हमारे मन को इतना व्यस्त कर देती है कि हम केवल अपनी पुरानी आदतों को ही दोहराते रहते हैं। सृजन तभी संभव है, जब यह आंतरिक शोर शांत हो जाए। जब मन विश्राम की गहरी अवस्था में प्रवेश करता है, तभी वह कुछ ऐसा रच पाता है जो पहले कभी नहीं हुआ।

प्रकृति का मौन संदेश

अगर हम अपने आस-पास देखें, तो प्रकृति स्वयं मौन में सृजन करती है। बीज मिट्टी के नीचे मौन में अंकुरित होता है, फूल बिना किसी आवाज के खिलता है और नदी अपनी शांत लय में बहती है। सृष्टि के सबसे जरूरी काम बिना किसी शोर-शराबे के होते हैं। इसी प्रकार, जब मनुष्य अपने अंदर मौन को स्थान देता है, तब उसके अंतर्मन से अनूठे समाधान और कलात्मक अभिव्यक्तियां जन्म लेती हैं।

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महान खोजों का मौन कनेक्शन

इतिहास गवाह है कि महान वैज्ञानिकों, कवियों और कलाकारों को उनकी सबसे क्रांतिकारी खोजें और रचनाएं तब मिलीं जब वे शांत थे। चाहे वह न्यूटन हों या आर्किमिडीज, प्रेरणा के वे क्षण तब आए जब मन पूरी तरह विश्राम में था। यह सिद्ध करता है कि सृजनशीलता सोचने से नहीं, बल्कि शांत होकर सुनने से आती है।

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मौन से बदलता है जीवन का दृष्टिकोण

यदि हम दैनिक जीवन में कुछ समय मौन और ध्यान को दें, तो हमारी निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और भावनाएं संतुलित रहती हैं। मौन हमें स्वयं से जोड़ता है और स्वयं से जुड़ना ही उस द्वार को खोलना है जहां से सच्ची रचनात्मकता बाहर आती है।

सच्ची सृजनशीलता के लिए बाहर हाथ-पांव मारना बंद करें और रोज कुछ पल एकांत और मौन में बिताएं। जब आपका मन शांत झील की तरह स्थिर होगा, तभी उसमें नवीनता के प्रतिबिंब साफ नजर आएंगे।

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