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aaj ka suvichar 02 feb 2026

Aaj Ka Suvichar 02 Feb 2026: क्या प्रश्नों का शोर आपको थका रहा है? आज के सुविचार से शांति का रहस्य जानें

गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर का कहना है कि जीवन की हर जिज्ञासा का अंत मन की स्थिरता में है। यह मौन शब्दों से परे सत्य को दर्शाता है और व्यावहारिक जीवन में भी शांति व विवेक प्रदान करता है। अशांत मन को शांत करने के लिए दो मिनट का मौन धारण करने की सलाह दी गई है, जो सबसे बड़ा जवाब हो सकता है।
Editorial
Updated:- 2026-02-02, 08:00 IST

अक्सर हमारा जीवन सवालों के घेरे में बीतता है, ऐसा क्यों हुआ?, मुझे क्या करना चाहिए? या जीवन का उद्देश्य क्या है? हम पूरी उम्र इन सवालों के जवाब के पीछे भागते रहते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सारे जवाब मिलने के बाद क्या बचता है? आज 02 फरवरी का सुविचार हमें शब्दों के जाल से निकालकर असीम शांति की ओर ले जाता है, जहां हर जिज्ञासा का अंत होता है। आइए, गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर के दिव्य ज्ञान से मौन की शक्ति समझते हैं।

आज का सुविचार

suvichar 02 feb

"हर उत्तर का अंतिम लक्ष्य मौन है।"
-गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर

जीवन की हर जिज्ञासा और हर खोज का अंत मन की स्थिरता है। मनुष्य का मन स्वभाव से ही खोजी है; वह "मैं कौन हूं?" जैसे प्रश्नों से अपनी चेतना की यात्रा शुरू करता है। लेकिन गुरुदेव समझाते हैं कि उत्तर खोजने की यह प्रक्रिया केवल तब तक सार्थक है जब तक वह आपको मौन तक न ले जाए। यदि एक उत्तर से केवल नया प्रश्न जन्म ले रहा है, तो मन कभी तृप्त नहीं होगा। वास्तविक समाधान वह है जहां पहुंचकर प्रश्न खुद-ब-खुद शांत हो जाएं।

शब्दों से बड़ा सत्य

शब्दों की अपनी एक सीमा होती है। वे सत्य की ओर इशारा तो कर सकते हैं, लेकिन इसे पूरी तरह समेट नहीं सकते। ज्ञान, शास्त्र और उपदेश का असली उद्देश्य व्यक्ति को उस अनुभव तक पहुंचाना है, जो शब्दों से परे है। जब शिष्य पूरी तरह तैयार होता है, तब गुरु को बोलने की जरूरत नहीं पड़ती; उनका 'मौन' ही सबसे बड़ा उपदेश बन जाता है। यह वह अवस्था है, जहां ज्ञान सीधा दिल में उतरता है।

व्यावहारिक जीवन में मौन का जादू

मौन केवल साधुओं के लिए नहीं, बल्कि हमारे रोजमर्रा के जीवन के लिए भी शक्तिशाली टूल है। विवाद, तनाव और गलतफहमियां अक्सर इसलिए बढ़ती हैं, क्योंकि हम बोलने में जल्दबाजी करते हैं। यदि हम प्रतिक्रिया देने से पहले सिर्फ एक क्षण का मौन धारण कर लें, तो हमारे शब्द अधिक संतुलित और करुणामय हो जाते हैं। मौन हमें वह विवेक देता है जो शोर-शराबे में खो जाता है।

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शांति ही है अंतिम समाधान

प्रश्नों का जन्म मन में होता है और उनके उत्तर भी मन के स्तर पर ही मिलते हैं। लेकिन जब हम अपनी चेतना की गहराइयों में उतरते हैं, तब पाते हैं कि हर जिज्ञासा का अंतिम पड़ाव मौन है। जहां प्रश्न और उत्तर दोनों विलीन हो जाते हैं, वहीं से वास्तविक जीवन और आनंद की शुरुआत होती है।

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आज दिन भर में जब भी मन अशांत हो या कोई उलझन सामने आए, तो तुरंत जवाब न ढूंढें। बस दो मिनट के लिए आंखें बंद करें और अपने अंदर के मौन को महसूस करें। शायद वही आपका सबसे बड़ा जवाब हो।

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