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Aaj Ka Suvichar 22 Jan 2026: क्या प्रेम आपको दर्द दे रहा है? आज के सुविचार में गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर का बताया मंत्र रिश्तों से दुख मिटा देगा

आज के सुविचार में गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने सच्चे मित्र की पहचान बताई है। उनके अनुसार, सच्चा मित्र वह है, जिससे मिलकर मन हल्का और स्पष्ट महसूस हो, उत्साह बढ़े और चिंताएं कम हों। सच्ची दोस्ती अपेक्षा रहित होती है, उपकारों का प्रदर्शन नहीं करती और शब्दों से परे भावनाओं को समझती है। 
Editorial
Updated:- 2026-01-22, 08:10 IST

संसार में प्रेम सबसे सुंदर और नाज़ुक एहसास होता है। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि जहां सबसे ज्‍यादा प्यार होता है, वहीं सबसे ज्‍यादा दर्द भी मिलता है। हम कई बार कहते हैं कि जिसे हमने दिल से चाहा, उसी ने हमें सबसे ज्‍यादा दुख पहुंचाया।

लेकिन क्या सच में इसमें प्रेम की गलती है? गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर कहते हैं कि प्रेम तभी पूरा और सुरक्षित रहता है, जब इसके साथ ज्ञान हो। बिना समझ और विवेक के प्रेम हमें चोट भी पहुंचा सकता है।

जैसे एक नाज़ुक फूल को बचाने के लिए इसके चारों ओर कांटे होते हैं, वैसे ही प्रेम की कोमलता को बचाने के लिए ज्ञान का कवच जरूरी होता है। यह ज्ञान हमें सही और गलत में फर्क करना सिखाता है और रिश्तों को संतुलन में रखता है। आइए जानते हैं कि कैसे यह सूत्र आपके जीवन और रिश्तों को बेहतर और मजबूत बना सकता है।

आज का सुविचार

''ज्ञान का कवच प्रेम की रक्षा करता है।''
-गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर

aaj ka suvichar 22 jan 2026

प्रेम की नाजुकता और दुख का कारण

प्रेम मनुष्य की सबसे स्वाभाविक आकांक्षा है, लेकिन यह जितना गहरा होता है, उतना ही सूक्ष्म और नाजुक भी। जहां प्रेम होता है, वहां संवेदनशीलता बढ़ जाती है और इसीलिए वहां आघात भी बहुत जल्दी लगता है। गुरुदेव समझाते हैं कि यदि प्रेम के साथ ज्ञान न हो, तो पीड़ा का आना अनिवार्य है। बिना विवेक के प्रेम अक्सर अपेक्षाओं की बेड़ियों में जकड़ जाता है।

अपनों से ही क्यों मिलता है दुख?

सोचिए, यदि सड़क पर चलता कोई अजनबी आपको 'नमस्ते' न कहे, तो क्या आपको दुख होता है? नहीं। लेकिन यदि आपका बच्चा, जीवनसाथी या भाई-बहन आपकी उपेक्षा करें, तो मन को दुखी होता है। दुख का कारण अक्सर वे लोग ही होते हैं जिनसे हम प्रेम करते हैं। इसका कारण यह है कि प्रेम में हम 'अधिकार' और 'अपेक्षा' जोड़ लेते हैं। जब सामने वाला हमारी अपेक्षा के अनुकूल व्यवहार नहीं करता, तो हमारा प्रेम घायल हो जाता है।

गलत प्रतिक्रिया- मन का कठोर हो जाना

जब प्रेम पर आघात होता है, तब अक्सर लोग खुद को अंदर से बंद कर लेते हैं। मन के बंद होते ही स्वभाव में कठोरता, निष्ठुरता और रूखापन आने लगता है। हर बात पर 'ना' कहना और कटुता भरा व्यवहार करना इस बात का संकेत है कि भीतर का प्रेम घायल है। यही घायल प्रेम आगे चलकर द्वेष और मन-मुटाव का रूप ले लेता है।

'मैं सही हूं' का अहंकार

संसार में होने वाले सभी युद्धों, कलह और विवादों की जड़ एक ही धारणा है, 'मैं सही हूं।' जब हम अपनी मान्यताओं की पुष्टि करना चाहते हैं और अहंकार के वश में होते हैं, तब प्रेम कहीं पीछे छूट जाता है। जिसे भीतर से यह बोध हो कि 'मुझसे भी गलती हो सकती है', वह कभी झगड़ा कर ही नहीं सकता। विवेकहीनता ही प्रेम की सबसे बड़ी दुश्मन है।

ज्ञान का कवच- ज्ञानी और संतों का प्रेम

विवेकहीनता और ज्ञान के अभाव में प्रेम कहीं खो जाता है। जब प्रेम पर ज्ञान का कवच होता है, तब ये विकार उत्पन्न नहीं होते। प्रेम विकृत नहीं होता; वह अपनी शुद्धता में बना रहता है। यही ज्ञानी का प्रेम है, यही संतों का प्रेम है।

आज का सुविचार

जीवन की भागदौड़ और उलझनों के बीच हर किसी को ऐसे रिश्ते की तलाश होती है, जहां बिना डर, बिना जजमेंट और बिना बोझ के दिल की बात कही जा सके। यह तलाश एक सच्चे और अच्छे मित्र के साथ पूरी होती है। लेकिन दोस्ती की असली पहचान क्या है? गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर अपने आज के सुविचार में इसी भाव को बेहद आसान और सुंदर शब्दों में समझा रहे हैं। अगर आप अपनी जिंदगी को हल्का, सकारात्मक और खूबसूरत बनाना चाहती हैं, तो यह सुविचार जरूर पढ़ें।

''जब आप किसी मित्र के पास किसी समस्या के साथ जाते हैं और उनसे मिलने के बाद निर्भार चित्त, उत्साह और स्पष्टता का अनुभव करते हैं, तो वह एक अच्छा मित्र है।''
- गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर

aaj ka suvichar 21 jan

मन का हल्कापन और स्पष्टता

एक सच्चा मित्र वह है जिसकी संगति में समस्याएं छोटी लगने लगती हैं। वह शायद आपको कोई जादुई समाधान न दे, लेकिन उसकी बातें आपके मन का बोझ कम कर देती हैं। अगर किसी से मिलकर आपका उत्साह बढ़ जाए और उलझनें कम हो जाएं, तो समझ लें कि आप सही व्यक्ति के साथ हैं। इसके विपरीत, यदि किसी से मिलकर आपकी चिंता बढ़ जाए, तो वह संगति आपके लिए सही नहीं है।

अपेक्षा रहित प्रेम

मित्रता तब बोझ बन जाती है, जब उसमें मांग शुरू हो जाती है। जब हम दोस्त से ध्यान या सहारे की ज्‍यादा अपेक्षा करने लगते हैं, तब रिश्ता कमजोर पड़ जाता है। सच्ची मित्रता वह है जो बिना कुछ मांगे, केवल देने के भाव से निभाई जाए। जहां अपेक्षा का दबाव नहीं होता, वही रिश्ता सबसे लंबा चलता है।

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उपकारों का प्रदर्शन न करना

असली दोस्त वह है जो संकट के समय आपकी ढाल बनकर खड़ा हो जाए, लेकिन कभी अपने एहसानों का बखान न करें। वह मदद करके भूल जाता है ताकि आपका आत्म-सम्मान सुरक्षित रहे। मित्रता में एक-दूसरे के सम्मान की रक्षा करना सबसे बड़ा धर्म है।

शब्दों से परे भावनाओं का मेल

कई बार भावुकता में इंसान गलत शब्द बोल देता है, लेकिन एक सच्चा मित्र शब्दों के पीछे छिपे भाव को समझता है। ऐसी उदारता और समझदारी ही टूटे हुए रिश्तों को जोड़ देती है। मित्रता शब्दों का खेल नहीं, बल्कि दिल का जुड़ाव है।

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निस्वार्थ और स्थायी रिश्ता

जो दोस्ती स्वार्थ, लाभ या किसी डर पर टिकी होती है, वह समय के साथ खत्म हो जाती है। लेकिन जो मित्रता केवल 'मित्रता' के लिए निभाई जाती है, वह स्थायी होती है। यह मित्रता विवेक से जन्म लेती है और हमें आत्मिक रूप से अमीर बनाती है।

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