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aaj ka suvichar 16 january 2026

Aaj Ka Suvichar 16 Jan 2026: क्या आप भी पार्लर में खूबसूरती ढूंढ रही हैं? आज के सुविचार से असली सुंदरता का राज जानें

गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने सुंदरता की नई परिभाषा दी है, जिसके अनुसार वास्तविक सौंदर्य मन, चेतना और उपस्थिति से प्रकट होता है। वह बताते हैं कि बाहरी आकर्षण क्षणभंगुर होता है, जबकि आंतरिक खुशी और शांत मन ही सच्ची चमक लाता है। रिश्तों में दुख का कारण दूसरों से अपेक्षाएं हैं; अपनी खुशी भीतर खोजने से संबंध मधुर होते हैं।
Editorial
Updated:- 2026-01-16, 07:30 IST

हम अक्सर सुंदरता को महंगे कपड़ों और मेकअप से तौलते हैं, लेकिन गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने सुंदरता की एक नई परिभाषा दी है। उनके अनुसार, "वास्तविक सौंदर्य व्यक्ति के मन, चेतना और उपस्थिति से अभिव्यक्त होती है।" 16 जनवरी 2026 यानी आज के सुविचार में हम आपको वह आपको बताएंगे कि असली सुंदरता क्‍या है और रिश्‍तो में दुख क्‍यों आता है?

सुंदरता चेहरे की नहीं, मन की होती है

असली सुंदरता इंसान की चेतना में होती है। जब आपका मन शांत, संतुलित और खुश रहता है, तब निखार आपकी आंखों और चेहरे पर अपने आप दिखने लगता है। इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति बाहर से सुंदर है, लेकिन मन में नफरत या अशांति है, तो चेहरे पर वह चमक कभी नहीं आ सकती। आंतरिक खुशी के बिना बाहरी सुंदरता अधूरी और फीकी है।

aaj ka suvichar 15 jan 2026

बाहरी आकर्षण क्यों नहीं टिकता?

बाहरी सुंदरता समय के साथ ढल जाती है, इसलिए इस पर टिके हुए रिश्ते भी ज्यादा समय तक नहीं चलते। जब हम किसी के सिर्फ रूप-रंग को देखकर उसकी ओर खिंचते हैं, तब वह आकर्षण बहुत जल्दी खत्म हो जाता है। लेकिन जो सुंदरता इंसान के व्यवहार और आत्मा से आती है, वह हमेशा बनी रहती है और कभी पुरानी नहीं होती।

रिश्तों में दुख का असली कारण: 'अपेक्षा'

गुरुदेव कहते हैं कि अगर किसी रिश्ते में आपको तकलीफ हो रही है, तो उसकी वजह सामने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि आपकी अपनी 'अपेक्षाएं' हैं। जब हम अपना पूरा सुख और खुशी किसी दूसरे इंसान पर निर्भर कर देते हैं, तब दुख मिलना तय है। हम सोचते हैं कि सामने वाला हमें खुश रखेगा और जब ऐसा नहीं होता, तो हमें पीड़ा होती है।

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खुद में खोजें खुशी का स्रोत

सच्चाई यह है कि आनंद का झरना आपके बाहर नहीं, बल्कि आपके भीतर है। जो व्यक्ति खुद में खुश रहना सीख जाता है, उसके सभी रिश्ते मधुर हो जाते हैं। जब आप दूसरों से सुख मांगना बंद कर देते हैं और खुद को आनंद से भर लेते हैं, तब आपका व्यक्तित्व 'मैग्नेटिक' हो जाता है और लोग आपकी ओर अपने आप आकर्षित होते हैं।

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वास्तविक सुंदरता आपके मन की निर्मलता और भीतर के कंपन की होती है। जब आप अपनी आत्मा में स्थित होते हैं, तब वही सुंदरता आपके चेहरे और व्यवहार में झलकती है। यही वह सुंदरता है, जो आपको भीतर से पूर्ण बनाती है और समाज में सम्मान दिलाती है।

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