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why heart attack risk increases in pregnancy

प्रेग्नेंसी में क्यों बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा, आप भी बनने वाली हैं मां तो इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

क्या आपको पता है कि प्रेग्नेंसी में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है? इस समय पर हार्ट अटैक के कई ऐसे लक्षण नजर आते हैं, जिन्हें महिलाएं प्रेग्नेंसी में होने वाले सामान्य दिक्कत समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, लेकिन असल में इन पर ध्यान देना चाहिए।
Editorial
Updated:- 2026-03-17, 16:58 IST

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं। इसका असर महिलाओं की सेहत पर भी होता है। इस समय पर होने वाले फिजिकल बदलावों के कारण डायबिटीज और हार्ट अटैक समेत कई दिक्कतों का खतरा बढ़ जाता है। चलिए प्रेग्नेंसी में हार्ट अटैक के खतरे और इसके साइलेंट संकेतों के बारे में एक्सपर्ट से जानते हैं। इस बारे में Dr. Anoop Agrawal, Senior Consultant, Interventional Cardiologist at Yashoda Hospitals, Hyderabad जानकारी दे रहे हैं।

प्रेग्नेंसी में क्यों बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा?

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एक्सपर्ट का कहना है कि इस समय पर शरीर में रक्त की मात्रा 30-50% तक बढ़ जाती है, जिससे हृदय को मां और भ्रूण दोनों को पोषण देने के लिए अधिक जोर से पंप करना पड़ता है, इसकी वजह से हार्ट रेट बढ़ने लगता है, वहीं प्रेग्नेंसी में होने वाले हार्मोनल बदलाव, ब्लड वेसल्स को कमजोर कर देते हैं और इसकी वजह से ब्लड प्रेशर पर असर होता है। खासतौर पर अगर आप 30 की उम्र के बाद प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं, आपका वजन अधिक है, आप डायबिटीज या बीपी जैसी दिक्कतों से परेशान हैं, तो ये खतरा और बढ़ सकता है। कई महिलाओं को डिलीवरी के बाद हार्ट से जुड़ी दिक्कतें परेशान करती हैं।

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प्रेग्नेंसी में साइलेंट हार्ट अटैक होने पर नजर आते हैं ये संकेत

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  • एक्सपर्ट का कहना है कि प्रेग्नेंसी में साइलेंट हार्ट अटैक या दिल की बीमारियों के कई संकेत नजर आते हैं, जिन्हें महिलाएं प्रेग्नेंसी में होने वाली नॉर्मल दिक्कत समझकर नजरअंदाज कर देती हैं।
  • हार्ट अटैक होने पर सिर्फ सीने का दर्द ही एक लक्षण नहीं है। इसके अलावा, बिना किसी कारण के थकान, हल्की सांस फूलना, मतली जिसे मॉर्निंग सिकनेस समझ लिया जाता है, जबड़े या पीठ में दर्द जिसे मांसपेशियों में खिंचाव समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, ये प्रेग्नेंसी में हार्ट अटैक के लक्षण हो सकते हैं।
  • साथ ही, चक्कर आना, सामान्य से अधिक तेज धड़कन, या पैरों/टखनों में सूजन, बेहोशी, लगातार खांसी, या दिल की धड़कन का तेज होना (आराम करते समय 100 बीपीएम से अधिक) होने पर भी आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। महिलाएं अक्सर इन लक्षणों को गर्भावस्था के दौरान बढ़े वजन या सीने में जलन से जोड़कर नजरअंदाज कर देती हैं और इलाज में देर हो जाती है।
  • प्रेग्नेंसी में महिलाओं को बीपी, वजन और बाकी अन्य चीजों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार मॉनिटर करते रहना चाहिए।

 

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एक्सपर्ट का कहना है कि प्रेग्नेंसी में आपको इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हर जिंदगी के वेलनेस सेक्शन में हम इसी तरह अपने आर्टिकल्स के जरिए स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के बारे में आप तक सही जानकारी पहुंचाने की कोशिश करते रहेंगे।
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Image Credit:Freepik

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