
क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो होली पर रंग खेलने से बचते हैं? आपको भी लोगों के बीच जाकर मस्ती करने में झिझक महसूस होती है तो हमारा यह आर्टिकल होली के लिए आपकी इस बनी-बनाई धारणा को दूर करने में मदद करेगा। असल में हर्षोल्लास का त्योहार होली, दुनियादारी की तमाम जिम्मेदारियों से बोझिल हो चुके व्यक्ति को जीवन का उत्सव मनाने का अवसर देता है।
ऐसे में देखा जाए तो होली पर रंग खेलना सिर्फ मौज-मस्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि असल में यह व्यक्ति को एक नई ऊर्जा प्रदान करता है जो शारीरिक और मानसिक दोनों ही रूप से सेहत के लिए लाभकारी होती है। इस आर्टिकल में हम आपको धार्मिक मान्यताओं से अलग रंग खेलने और होली का त्योहार मनाने के सेहत लाभ बताने जा रहे हैं। बता दें कि हमने इस बारे में मेंटल हेल्थ थेरेपिस्ट शालिनी श्रीवास्तव से बात की और उनसे मिली जानकारी आपके साथ शेयर करे रहे हैं।
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शालिनी श्रीवास्तव कहती हैं कि त्योहार जीवन में उल्लास लेकर आते हैं। होली का त्योहार तो खासतौर पर इसी के लिए जाना जाता है, जब रंगों के साथ मन का गुबार भी हवा में उड़ा जाता है। काम और दूसरी व्यक्तियों के चलते बोझिल हो चुके मन को इससे शांति और ऊर्जा मिलती है। इस तरह से यह मानसिक तनाव को कम करने में सहायक साबित होता है।
शालिनी श्रीवास्तव बताती हैं कि होली अपने आप में सामाजिकता का एक बेहतर माध्यम है, जो लोगों को एक दूसरे के पास लाता है। त्योहार पर मिलने के बहाने ही सही लोग जब दूसरे से महीनों बाद मिलते हैं तो इससे न सिर्फ उनके बीच की दूरियां कम होती है बल्कि मन का बोझ भी उतर जाता है। इससे लोगों का अकेलापन दूर होता है और मानसिक अवसाद से बचाव होता है।

मेंटल हेल्थ थेरेपिस्ट शालिनी श्रीवास्तव बताती हैं रंगों का मानव मन-मस्तिष्क पर अपना प्रभाव पड़ता है। इसलिए मानसिक समस्याओं के लिए कलर थेरेपी का इस्तेमाल भी किया जाता है, जिसमें विशेष तरह के रंगों के जरिए तनाव, एंजायटी और मानसिक अवसाद को दूर करने का प्रयास किया जाता है। देखा जाए तो होली पर तरह-तरह के रंगों से खेलने के की परंपरा का एक बेहद व्यावहारिक पक्ष यह भी यह जीवन में नई ऊर्जा का संचार करता है।
नीद की समस्या की सबसे मुख्य वजह मानसिक तनाव होती है, जिससे राहत दिलाने में होली की त्योहार मददगार होता है। वहीं होली के दौरान जब आप जमकर मस्ती करते हैं तो इससे मसल्स की भी अच्छी खासी एक्सरसाइज होती है जो अच्छी नींद दिलाने में सहायक साबित होता है।
खुश रहने के लिए लोग आजकल हर जतन करते हैं, तमाम तरह की मेंटल थेरेपी और उपाय अपनाते हैं। वहीं देखा जाए तो होली का त्योहार अपने आप एक मेंटल थेरेपी है, जो लोगों को खुशी के कई बहाने देता है। बात चाहें एक दूसरे को रंग से सराबोर करने की हो या साथ मिलकर मस्ती करने की, इस त्योहार का हर चलन व्यक्ति को वास्तविक खुशी प्रदान करता है।

यह खुशी डोपामाइन, सेरोटोनिन और ऑक्सीटोसिन जैसे हैप्पी हार्मोन के संचार को बढ़ाता है, जो शरीर के लिए बेहद फायदेमंद साबित होते हैं। बता दें कि ये हार्मोन अच्छी नींद, बेहतर पाचन के साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं।
होली के त्योहार के समय मौसम में तेजी से बदलाव होता है और इस बदलाव के अनुकूल शरीर को ढालने में यह त्योहार काफी सहायक होता है। जैसा कि इस वक्त ठंड जा चुकी होती है और गर्मी के मौसम की दस्तक हो रही होती है। ऐसे में होली पर ठंडाई का सेवन जहां शरीर को गर्मी से राहत देता है, वहीं ड्राई फ्रूट्स आदी का सेवन शरीर को बदलते मौसम का सामना करने की ताकत प्रदान करता है।
रंग और पानी के साथ खेलने के दौरान शरीर की अच्छी-खासी एक्सरसाइज भी हो जाती है, जिससे सर्दियों के दिनों का अलसाया शरीर एक बार फिर जाग उठता है। इस तरह से देखा जाए तो होला का त्योहार संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी साबित होता है।
उम्मीद करते हैं कि सेहत से जुड़ी यह जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित होगी। अगर यह जानकारी आपको अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों और परिचितों के साथ शेयर करना न भूलें।
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