
प्रधानमंत्री मोदी अपने खान-पान की आदतों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। पहले उनके नाश्ते में शामिल मोरिंगा के पराठे चर्चा में आ गए थे, तो अब शाम के स्नैक में उन्होंने झालमुड़ी खाकर, इसे भी फूड ट्रेंड में शामिल कर दिया है। हालांकि, झालमुड़ी कोई नई डिश नहीं है, बल्कि यह भारतीय स्ट्रीट फूड का एक बेहद लोकप्रिय और पुराना व्यंजन है। कई बार लोग इसे भेलपुरी समझने की गलती कर बैठते हैं, जबकि सच यह है कि दोनों एक-दूसरे से काफी अलग हैं। इनका स्वाद तो अलग है ही, साथ ही इन्हें बनाने का तरीका भी बहुत अलग है।
पहली नजर में दोनों को देखने में यह जरूर एक जैसे लगते हैं, क्योंकि दोनों में ही मुरमुरे मुख्य सामग्री होते हैं, लेकिन इनके फ्लेवर और टेस्ट में जमीन-आसमान का फर्क होता है। अगर आप भी अब तक भेलपुरी और झालमुड़ी को एक ही समझते आए हैं, तो आइए जानते हैं इनके बीच का असली अंतर ।
भेलपुरी मुख्य रूप से मुंबई का फेमस स्ट्रीट फूड है, जबकि झालमुड़ी पश्चिम बंगाल का लोकप्रीय ईवनिंग स्नैक है। भेलपुरी का स्वाद खट्टा-मीठा और हल्का मसालेदार होता है। यह इमली और सौंठ की मीठी चटनी का कमाल होता है। वहीं दूसरी तरफ झालमुड़ी का स्वाद ज्यादा तीखा होता है। इसे सरसों के तेल में भूना जाता है और ऊपर से थोड़ें बहुत मसालें और सब्जियां डाली जाती हैं। आपको बता दें कि भेलपूरी चटनी वजह से गीली हो जाती है, मगर झालमूड़ी बहुत क्रिस्पी होती है।

भेलपुरी का टेक्सचर थोड़ा सॉफ्ट और नम होता है क्योंकि इसमें चटनियां मिलाई जाती हैं। यदि आप भेलपूरी के बनते ही उसे खा लेती हैं, तो आपको उसका स्वाद लेने में बहुत आनंद आएगा। वहीं झालमुड़ी इसके मुकाबले बहुत ही क्रंची होती है और इसमें बारीक कटे प्याज टमाटर इसके पूरे फ्लेवर को कमाल का बना देते हैं। झालमुड़ी में अमूंगफली, हरी मिर्च, प्याज और खास मसाले डाले जाते हैं, जबकि भेलपुरी में टमाटर, प्याज, सेव, चटनियां और नींबू का इस्तेमाल ज्यादा होता है।
भेलपुरी बनाने के लिए मुरमुरे में चटनियां, सेव, पापड़ी, उबले आलू और मसाले मिलाए जाते हैं। इसका स्वाद खट्टा, मीठा और नमकीन होता है। वहीं झालमुड़ी को सरसों का तेल में मुरमुरों को काफी देर तक भूना जाता है और इसे क्रिस्पी बनाया जाता है। इसमें कटा प्याज, हरी मिर्च, उबले आलू, चने, भुनी मूंगफली और तीखा मसाला मिलाया जाता है। इसमें कोई चटनी नहीं बड़ती हैं और इसका स्वाद बेमिसाल होता है।
दोनों ही स्नैक्स हल्के और जल्दी बनने वाले हैं, लेकिन अगर कम चटनी और कम तेल इस्तेमाल किया जाए तो ये दोनों काफी हेल्दी हो सकते हैं। झालमुड़ी में सरसों का तेल डाला जाता है। यह थोड़ा ही डालना चाहिए, जिससे झालमुड़ी कुरकुरी हो जाए। वहीं भेलपुरी में मीठी चटनी डलती है। जिसकी वजह से शुगर ज्यादा हो जाती है, ऐसे में डायबिटीज वालों को भेलपूरी खाने से बचना चाहिए। लेकिर झालमुड़ी में कम तेल डाला जाए, तो इसे कोई भी खा सकता है।
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भेलपुरी और झालमुड़ी दोनों का ही स्वाद अपने आप में खास होता है। भेलपुरी जहां खट्टे-मीठे फ्लेवर के लिए जानी जाती है, वहीं झालमुड़ी अपने तीखे स्वाद के लिए पसंद की जाती है। अगर आप हल्का और चटपटा खाना चाहते हैं तो भेलपुरी ट्राई करें, और अगर तीखा और देसी फ्लेवर पसंद है तो झालमुड़ी आपके लिए परफेक्ट ऑशन हो सकती हैं। तो फिर देर किस बात की आप भी आज ही घर पर झालमुड़ी बनाकर ट्राई करें और ईवनिंग स्नैक फूड की क्रेविंग को खत्म करें। यह जानकारी आपको पसंद आई हो तो इस लेख को शेयर और लाइक जरूर करें। इसी तरह और भी आर्टिकल्स पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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