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a scary well in kanpur where the british killed women and children and throw them into the well

कानपुर का एक ऐसा खौफनाक कुआं जहां रात में गुजरने से घबराते हैं लोग; यहां औरतों-बच्चों का कत्ल कर डाले जाते शव, जानें क्या है इतिहास?

कानपुर में जहां फूल बाग पार्क है, पहले वहां अंग्रेजों ने बीबीघर बनाया था। यहां एक यूरेशियन परिवार रहता था, लेकिन जब इस परिवार ने घर छोड़ा, तो अंग्रेजों ने भवन गिरा कर वहां एक कुआं बनवा दिया।
Editorial
Updated:- 2026-01-13, 17:42 IST

कानपुर का नाम आते ही आपके दिमाग में एक ऐसे औद्योगिक और ऐतिहासिक शहर की छवि बनती होगी, जहां की इमारते और शहर आज भी अपने इतिहास को दर्शाती है। यह शहर कपड़ा और चमड़े के उद्योगों के लिए भी जाना जाता है। पहले कानपुर का मूल नाम कान्हपुर था, जिसे बदलकर बाद में कानपुर रखा गया। हालांकि, इसके इतिहास में छिपी ऐसी कई बातें हैं, जिसके बारे में आप नहीं जानते होंगे। ऐसे कई किस्से हैं, जो आपको हैरान भी करेंगे और परेशान भी कर देंगे। ऐसे ही एक कुए के बारे में हम इस आर्टिकल में बात करने वाले हैं। कानपुर का यह कुआं अब कहां है और लोग यहां जाते हैं या नहीं, इसके बारे में आप यहां विस्तार से पढ़ सकती है।

कहां है कुआं?

जिस जगह पर कुआ आप खोज रहे हैं, शायद आप वहां रोज घूमने जाते होंगे, लेकिन आपको पता भी नहीं होगा। फूलबाग पार्क के नाम से जाने वाली जगह का इतिहास सालों पुराना माना जाता है। क्रूर जनरल हैवलॉक का नाम आपने सुना ही होगा। कानपुर को हासिल करने और भारतीय सिपाहियों के प्रति उनका कठोर रवैया आज भी भारतीय इतिहास में क्रूर ब्रिटिश जनरल के नाम से उसे याद करता है। क्रूर जनरल हैवलॉक के आदेश पर कुएं को की जगह कब्रगाह बना दिया गया था और फिर इसका नाम मेमोरियल वेल नाम दे दिया। हालांकि, अब इसे नानाराव पार्क के नाम से जाना जाता है।

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कैसे हुआ था नानाराव पार्क का निर्माण?

क्रूर जनरल हैवलॉक ने इस वेल को बनाने के लिए पैसे भी आम जनता से वसूले थे। कानपुर वासियों से उस समय 3 लाख रुपये जुर्माना लेकर इसे बनाया गया था। जिन आम लोगों के पैसों से इसका निर्माण हुआ, वहां पर ही लोगों को जाने की अनुमति नहीं थी। भारतीय नागरिक उस समय मेमोरियल वेल नें नहीं जा सकते थे। हालांकि, 15 अगस्त 1947 को देश आजाद होने के बाद इसे सभी के लिए खोल दिया गया।

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फेंके जाते थे शव

जिस कुएं को पाटकर आज मेमोरियल गार्डन बना दिया गया है। उस जगह पर अंग्रेज क्रांति के समय औरतों-बच्चों का कत्ल कर शव कुएं में फेंक देते थे। ऐसा लगता था, जैसे कुआ लाशों का घर है। कुएं में पानी की जगह शव भरा था। इसके बाद ही हैवलाक ने कुएं को मिट्टी से पाटने का आदेश जारी कर दिया।

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