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जानिए मोढेरा सूर्य मंदिर के बारे में, पीएम मोदी ने भी ट्वीट कर शेयर किया है इस मंदिर का खूबसूरत वीडियो

पीएम मोदी ने ट्वीट कर मोढेरा के सूर्य मंदिर का एक बेहद खूबसूरत वीडियो शेयर किया है। आप भी जान लीजिए कि ये मंदिर आखिर क्यों खास है। 
Editorial
Updated:- 2020-08-27, 16:03 IST

भारत में ऐसी कई अद्भुत जगह हैं जहां हमें प्रकृति और मानव निर्मित दुर्लभ और बेहद खूबसूरत नजारे देखने को मिलते हैं। भारत में ऐसी कई अविस्मरणीय जगह हैं जहां जाकर आपको यहां की संस्कृति और सभ्यता की एक अनोखी झलक देखने को मिलेगी। ऐसी ही एक जगह है गुजरात का मोढेरा मंदिर। ये मंदिर हाल ही में चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि पीएम नरेंद्र मोदी ने इस मंदिर के एक खूबसूरत नजारे का वीडियो ट्वीट कर इसके बारे में बताया है। 

पीएम मोदी ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से मोढेरा सूर्य मंदिर का जो वीडियो शेयर किया है उसमें मोढेरा की सीढ़ियों पर बारिश का पानी गिरते दिखाया जा रहा है। ये पानी बहुत ही खूबसूरती से मंदिर की आकृतियों से होते हुए गुजर रहा है और ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने जान बूझकर इसे झरने का रूप दे दिया हो। ये बहुत ही खूबसूरत नजारा है और जब से पीएम मोदी ने इस वीडियो को शेयर किया है तब से ही मोढेरा को लेकर लोगों की जिज्ञासा बढ़ गई है।  

पीएम नरेंद्र मोदी ने इस मंदिर को आइकॉनिक कहा है और यकीनन इस वीडियो को देखकर हम इसकी खूबसूरती का अंदाज़ा लगा सकते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पीएम के ट्वीट करने के अलावा भी इस मंदिर में बहुत सारी खूबियां हैं जो इसे खास बनाती हैं। आज हम आपको इस मंदिर से जुड़े कुछ खास फैक्ट्स के बारे में बताने जा रहे हैं।  

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10-11वीं सदी में बनाया गया था ये मंदिर- 

हम इस वक्त 21वीं सदी में जी रहे हैं, लेकिन 10वीं और 11वीं सदी में बनाया गया ये मंदिर अभी भी हमारे आकर्षण का केंद्र बन सकता है। दरअसल इसे बनाने की शुरुआत 10वीं सदी में हुई थी, लेकिन कुछ इतिहासकारों का मानना है कि ये 10वीं नहीं बल्कि 11वीं सदी में पूरी तरह से बनकर तैयार हुआ था। इसे कई भागों में बनाया गया है और मुख्य मंदिर चालुक्य वंश के राजा भीमदेव-प्रथम के काल में बना था जो 10वीं सदी के थे। तब से लेकर अब तक इसमें कई बदलाव किए गए हैं, लेकिन मुख्य मंदिर अभी भी खड़ा हुआ है।  

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इस मंदिर परिसर की एक दीवार पर उल्टा लिखा हुआ एक लेख (देवनागरी भाषा में) है जो विक्रम संवत 1083 को दर्शाता है।  

इसके अलावा, इसके कोने के मंदिर और कुंड को बनाया गया था 11वीं सदी में।  

सूर्य देव को समर्पित है ये मंदिर- 

ये मंदिर सूर्य देव को समर्पित है। मेहसाणा जिले में मौजूद ये मंदिर पुष्पवति नदी के किनारे बनाया गया है। ये मंदिर तीन भागों में बटा हुआ है जिसमें गुधा मंडप, सभा मंडप और कुंड मौजूद है। इस मंदिर को घूमने और अच्छी तरह से इस जगह की खूबसूरती का आनंद लेने में आपको कुछ घंटे लग सकते हैं।  

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पुराणों में भी मिला है स्थान- 

इस मंदिर का नाम स्कंद पुराण, ब्रह्म पुराण आदि में भी लिखा गया है। इसके अलावा, कई पौराणिक कथाओं में भी इस मंदिर का जिक्र किया जाता है। इतिहासकारों के मुताबिक इस मंदिर पर हमला भी हो चुका है और महमूद गजनवी ने भी एक बार अपनी फौज के साथ इस मंदिर पर आक्रमण किया था। हालांकि, वो इसे पूरी तरह से मिटाने में नाकामियाब रहा था।  

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी है खास- 

ये मंदिर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी खास है। साल के हर इक्विनॉक्स (जब दिन और रात बराबर होते हैं और सूर्य की किरणें धरती के केंद्र से टकराती हैं। ये साल में दो बार पड़ता है।) के उगते हुए सूरज की पहली किरण जब मंदिर के अंदर मौजूद सूर्य भगवान के सिर पर लगे हीरे पर पड़ेगी तो इससे पूरे मंदिर परिसर में सुनहरा प्रकाश फैल जाएगा।  

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साल के 52 हफ्तों को दर्शाते 52 खंबे- 

इस मंदिर परिसर का सभा मंडप 52 खंबों पर खड़ा हुआ है जो साल के 52 हफ्तों को दर्शाता है। इसकी दीवार में पंच तत्व यानि आसमान, पृथ्वी, पानी, हवा और अग्नि को देखा जा सकता है। इसके अलावा, अलग-अलग हिस्सों में सूर्य की आकृतियां हैं। 

 

कोई पूजा नहीं होती- 

आपको शायद ये जानकर थोड़ा अजीब लगे कि भले ही ये हिंदू मंदिर है, लेकिन फिर भी अब यहां कोई पूजा नहीं की जाती है।  

2014 में इस मंदिर को UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित कर दिया गया था। हर साल गुजरात सरकार की तरफ से यहां तीन दिन का एक डांस फेस्टिवल भी आयोजित किया जाता है। इसे उत्तारार्ध महोत्सव कहा जाता है। ये मकर संक्राति के बाद शुरू होता है और यहां कई रंगारंग कार्यक्रम किए जाते हैं।  

कुल मिलाकर ये मंदिर एक ऐसी जगह है जहां आप बहुत ही खूबसूरत नजारे देख सकते हैं और शांति का अनुभव भी कर सकते हैं।  

 

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