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Mauni Amavasya Pitru Tarpan 2026: मौनी अमावस्या के दिन कैसे करें स्नान-दान और पितृ तर्पण? जानें संपूर्ण पूजा विधि

Mauni Amavasya 2026 Pitru Tarpan Vidhi: शास्त्रों के अनुसार, मौनी अमावस्या पर संगम या पवित्र नदियों में स्नान करने से अमृत प्राप्ति का पुण्य मिलता है। इसके साथ ही, यह दिन अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पितृ तर्पण और दान-पुण्य करने के लिए भी सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
Editorial
Updated:- 2026-01-16, 16:20 IST

मौनी अमावस्या हिंदू पंचांग की सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक है जो माघ मास के कृष्ण पक्ष में आती है। इस दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व इतना अधिक है कि इसे महाकुंभ के समान फलदायी माना जाता है। मौनी शब्द का अर्थ है मौन रहना, इसलिए इस दिन मौन रहकर आत्म-मंथन और प्रभु भक्ति का विशेष विधान है। शास्त्रों के अनुसार, मौनी अमावस्या पर संगम या पवित्र नदियों में स्नान करने से अमृत प्राप्ति का पुण्य मिलता है। इसके साथ ही, यह दिन अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पितृ तर्पण और दान-पुण्य करने के लिए भी सर्वश्रेष्ठ माना गया है। सही विधि से किया गया पूजन न केवल पितृ दोषों को शांत करता है बल्कि साधक के जीवन में सुख, शांति और मोक्ष के द्वार भी खोल देता है। ऐसे में आइये जानते हैं वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से मौनी अमावस्या की संपूर्ण पूजा विधि के बारे में विस्तार से।

मौनी अमावस्या के दिन पवित्र स्नान की विधि (Mauni Amavasya Snan Vidhi)

मौनी अमावस्या के दिन स्नान का सबसे उत्तम समय 'ब्रह्म मुहूर्त' यानी कि सूर्योदय से पूर्व का समय माना जाता है। अगर संभव हो तो गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करें। अगर आप घर पर स्नान कर रहे हैं तो नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल और काले तिल जरूर मिलाएं।

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स्नान करते समय 'गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥" मंत्र का जाप करें। स्नान के दौरान पूरी तरह मौन रहें और बाहरी दुनिया से कटकर ईश्वर का ध्यान करें। ऐसा माना जाता है कि इस दिन मौन रहकर स्नान करने से अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है।

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मौनी अमावस्या के दिन पितृ तर्पण की विधि (Pitru Tarpan Vidhi)

स्नान के बाद पितरों के निमित्त तर्पण करना इस दिन का सबसे जरूरी हिस्सा है। तर्पण के लिए एक तांबे के पात्र में जल भरें और उसमें काले तिल, सफेद फूल और कुशा (एक विशेष प्रकार की घास) डालें। अब अपने हाथ की अंजलि में जल लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके उसे धीरे-धीरे जमीन पर गिराएं।

पितरों का ध्यान करते हुए उनसे अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगें और उनकी शांति की प्रार्थना करें। इसके बाद घर के मंदिर में दीप जलाएं और पितृ चालीसा या पितृ सूक्त का पाठ करें। शाम के समय घर की दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का दीपक जलाना भी बहुत शुभ माना जाता है।

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मौनी अमावस्या के दिन दान की विधि 

मौनी अमावस्या पर 'दान' को महादान कहा गया है। इस दिन अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र और तिल का दान जरूर करना चाहिए। माघ मास की ठंड को देखते हुए ऊनी कपड़े, कंबल, जूते या चप्पल का दान करना अत्यंत फलदायी होता है।

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इसके अलावा तिल के लड्डू, गुड़, घी और अनाज का दान पितरों को तृप्त करता है। दान हमेशा निस्वार्थ भाव से किसी जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को देना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किया गया दान कई जन्मों तक पुण्य फल देता है और दरिद्रता का नाश करता है।

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