
मौनी अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है क्योंकि इस दिन मन को नियंत्रित करने के लिए मौन रहने का संकल्प लिया जाता है जिससे मानसिक शांति और आत्मबल की प्राप्ति होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मास की इस अमावस्या पर गंगा जैसी पवित्र नदियों का जल अमृत के समान हो जाता है जिसमें स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही, यह दिन पितरों को प्रसन्न करने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है जिसमें तर्पण और दान-पुण्य करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। ऐसे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से आइये जानते हैं कि इस साल कब पड़ रही है मौनी अमावस्या, क्या हैं इस दिन पितरों की पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व?
हिंदू पंचांग के अनुसार, मौनी अमावस्या का आरंभ 18 जनवरी 2026, रविवार के दिन दोपहर 12 बजकर 03 मिनट से होगा। वहीं, इसका समापन 19 जनवरी 2026, सोमवार के दिन दोपहर 01 बजकर 21 मिनट पर होगा।
चूंकि हिंदू धर्म में उदया तिथि का विशेष महत्व है इसलिए स्नान-दान और मुख्य व्रत 19 जनवरी, सोमवार को करना भी शास्त्र सम्मत रहेगा, लेकिन पितृ कार्य के लिए 18 जनवरी की दोपहर का समय भी बहुत महत्वपूर्ण है।

पंचांग के अनुसार, अमावस्या का स्नान-दान हमेशा उदया तिथि के अनुसार होता है। ऐसे में मौनी अमावस्या का स्नान-दान 19 जनवरी को सुबह 5 बजकर 27 मिनट से आरंभ होगा और सुबह 7 बजकर 14 मिनट तक रहेगा।
इसके अलावा, अगर आप सुबह के समय स्नान-दान नहीं कर पाएं तो शाम को 5 बजकर 40 मिनट से 7 बजकर 11 मिनट तक के मध्य में भी स्नान-दान संपन्न कर सकते हैं। यह मुहूर्त भी व्यक्ति को अमृत फल प्रदान करेगा।
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अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है। पितृ पूजा के लिए दोपहर का समय 'कुतप काल' सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। ऐसे में 18 जनवरी को दोपहर 12 बजकर 21 मिनट से दोपहर 1 बजकर 52 मिनट का मुहूर्त पितृ पूजा के लिए श्रेष्ठ है।
वहीं, अमावस्या के स्नान-दान के बाद जो लोग पितृ पूजा करते हैं उनके लिए 19 जनवरी को पितृ पूजा का मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। इस दौरान पितृ पूजा से पितृ दोष दूर होगा।

मौनी अमावस्या पर विधि-विधान से पूजा और स्नान करने के अनगिनत लाभ हैं। मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत धारण करने से व्यक्ति का चंचल मन शांत होता है और इच्छाशक्ति मजबूत होती है। व्यक्ति को मानसिक बल प्राप्त होता है।
इस दिन पितरों के लिए तर्पण करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और वंश वृद्धि व सुख का आशीर्वाद देते हैं। मान्यता है कि माघ अमावस्या पर गंगा स्नान करने से जाने-अनजाने में हुए सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।
इस दिन काले तिल का दान करने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के दुष्प्रभावों में कमी आती है। पवित्र नदियों के संगम पर स्नान करने से व्यक्ति को जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है।
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