
मौनी अमावस्या हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र तिथि मानी जाती है जिसे आध्यात्मिक शुद्धि और पितृ तर्पण के लिए आरक्षित रखा गया है। 18 जनवरी 2026 को पड़ने वाली इस अमावस्या पर ग्रहों का संयोग और माघ मास का प्रभाव इसे और भी शक्तिशाली बनाता है। शास्त्र कहते हैं कि अमावस्या के दिन स्वर्ग और पृथ्वी के बीच के द्वार खुलते हैं और हमारे पूर्वज यानी कि पितृ पृथ्वी पर अपनी संतान से तर्पण और सम्मान की अपेक्षा लेकर आते हैं। इस दिन की गई एक छोटी सी गलती न केवल पूजा के फल को नष्ट कर सकती है बल्कि पितृ दोष का कारण बनकर परिवार में अशांति और बाधाएं भी ला सकती है। ऐसे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से आइये जानते हैं कि मौनी अमावस्या पर क्या करना चाहिए और क्या नहीं?
तामसिक भोजन और नशा: अमावस्या के दिन शरीर और मन की पवित्रता बहुत जरूरी है। इस दिन मांस, मछली, अंडा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक भोजन का सेवन बिल्कुल न करें। साथ ही, शराब या किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहें। ऐसा करने से पितृ नाराज होते हैं और घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

देर तक सोना और कलह करना: इस दिन सुबह देर तक सोना वर्जित माना गया है। अमावस्या की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए। इसके अलावा, इस दिन घर में वाद-विवाद, झगड़ा या किसी को अपशब्द कहने से बचें। जिस घर में अशांति होती है, वहां पितृ नहीं ठहरते और बिना आशीर्वाद दिए लौट जाते हैं।
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ब्रह्मचर्य का पालन न करना: धार्मिक दृष्टिकोण से अमावस्या की तिथि संयम की होती है। इस दिन पति-पत्नी को शारीरिक संबंध बनाने से बचना चाहिए और पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, अमावस्या पर गर्भाधान से उत्पन्न संतान के जीवन में कष्ट रह सकते हैं।
श्मशान या सुनसान जगहों पर जाना: अमावस्या की रात नकारात्मक शक्तियां अधिक प्रभावी होती हैं। इसलिए, मौनी अमावस्या की शाम या रात को किसी सुनसान रास्ते, जंगल या श्मशान भूमि के पास नहीं जाना चाहिए। इस दिन नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है।
मौन व्रत और ध्यान: जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इस दिन कम से कम कुछ घंटों के लिए मौन रहने का प्रयास करें। यदि मौन रहना संभव न हो तो कम बोलें और भगवान का नाम जपते रहें। मौन रहने से एकाग्रता बढ़ती है और मानसिक शक्ति का विकास होता है।

पितृ तर्पण और दान: सुबह स्नान करने के बाद अपने पितरों के नाम से जल में काले तिल मिलाकर अर्घ्य दें। इस दिन दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का ध्यान करना चाहिए। इसके बाद किसी गरीब या ब्राह्मण को अनाज, गर्म कपड़े या तिल के लड्डू का दान अवश्य करें।
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दीपदान और पीपल पूजा: शाम के समय यानी कि गोधुली बेला मुहूर्त में घर के मंदिर और मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं। अमावस्या पर पीपल के पेड़ की पूजा करना और वहां दीपक रखना अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि पीपल में देवताओं और पितरों का वास माना गया है।
गंगा स्नान या शुद्ध जल से स्नान: अगर गंगा तट पर जाना संभव न हो तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु और शिव की आराधना करें।
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