Sun Feb 15, 2026 | Updated 07:10 AM IST
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Mahashivratri Vrat Katha 2026: भगवान शिव के विवाहोत्सव पर शिवलिंग पूजा के साथ जरूर करें महाशिवरात्रि व्रत कथा का पाठ, सभी कष्ट होंगे दूर

Mahashivratri Vrat Katha Path 2026: महाशिवरात्रि पर मुख्य रूप से भगवान शिव की पूजा की जाती है और उन्हें प्रसन्न करने के लिए व्रत-उपवास किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि यदि कोई भक्त पूजन करने के साथ महाशिवरात्रि की व्रत कथा का पाठ करता है तो उसके जीवन की सभी समस्याएं दूर हो सकती हैं। 
Editorial
Updated:- 2026-02-15, 05:43 IST

महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक पवित्र पर्व है और इस दिन को मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती के विवाहोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी और इसी दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करना शुभ होगा। यही नहीं इस दिन लोग विधि-विधान से पूजन और उपवास करते हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। इस दिन भक्त शिवलिंग का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करके, बेलपत्र, धतूरा और दूध अर्पित करते हैं और भोलेनाथ को प्रसन्न करते हैं। ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन से की गई शिव पूजा और उपवास जीवन के दुख, रोग, भय और कष्टों को दूर करने में मदद करता है। महाशिवरात्रि के दिन केवल पूजा-अर्चना ही नहीं, बल्कि व्रत कथा का पाठ करना या व्रत कथा सुनना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। आइए आपको बताते हैं महाशिवरात्रि की उस व्रत कथा के बारे में जिसका पाठ करना विशेष रूप से भक्तों के लिए फलदायी माना जाता है।

महाशिवरात्रि व्रत कथा (Mahashivratri Vrat Katha 2026)

महाशिवरात्रि व्रत कथा के अनुसार एक समय में चित्रभानु नामक शिकारी शिकार करके अपने परिवार का पालन पोषण करता था उस पर साहूकार का कर्ज था समय से कर्ज चुकता न करने के कारण साहूकार ने उसे बंदी बना लिया उस दिन शिवरात्रि का दिन था और पूरे दिन उसने भूखे प्यासे रहते हुए भगवान शिव का स्मरण किया और दिन गुजर गया। शाम को साहूकार ने उसे कर्ज चुकाने के लिए अलग से एक दिन का समय दिया और चित्र भानु को छोड़ दिया तब चित्र भानु भूख प्यास से व्याकुल होकर जंगल में शिकार खोजने लगा।  

देखते ही देखते शाम हुई और फिर रात हो गई तब वह एक तालाब के पास बेल के पेड़ पर चढ़ गया और रात बीतने की प्रतीक्षा करने लगा। उस बेल के पेड़ के नीचे शिवलिंग मौजूद था, लेकिन चित्रभानु इस बात से अनजान था और अनजाने में पूरी रात वो बेलपत्र तोड़कर नीचे गिरा रहा था जो शिवलिंग पर गिर रहे थे। इस प्रकार संयोग से वह दिनभर भूखा प्यासा रहा और रात्रि में वह शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाता रहा। शिवलिंग पर बेलपत्र गिरने से उसकी आराधना पूर्ण हुई और रात बीतने पर एक गर्भिणी हिरणी तालाब किनारे पानी पीने आई तब वह धनुष बाण से उसका शिकार करने के लिए तैयार हो गया। उस हिरनी ने चित्र भानु को देख लिया उसने शिकारी से कहा कि वह गर्भवती है जल्द ही वह बच्चों को जन्म देगी। यदि तुमने मुझे मारा तो एक साथ दो जीव हत्या करोगे जो ठीक नहीं है। हिरनी ने शिकारी को वचन दिया कि वह बच्चे को जन्म देकर आएगी तब शिकार कर लेना इस पर शिकारी ने उसे जाने दिया इस दौरान प्रत्यंचा चढ़ाने तथा ढीली करते समय कुछ बेलपत्र शिवलिंग पर गिरे इससे प्रथम प्रहर की शिव पूजा भी हो गई।

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कुछ समय बाद एक और हिरनी वहां से जा रही थी तब शिकारी खुश होकर उसके शिकार के लिए तैयार हो गया। तब उसने शिकारी से निवेदन किया कि वह अपने प्रिय की खोज में भटक रही है और जैसे ही वह अपने पति से मिलेगी आपके पास वापस आ जाएगी। चित्र भानु शिकार ना कर पाने से चिंतित था रात्रि का आखिरी पहर बीत रहा था इस बार भी कुछ बेलपत्र टूटकर शिवलिंग पर गिरे जिससे दूसरे प्रहर की भी पूजा हो गई तभी एक दूसरी हिरनी बच्चों के साथ वहां से जा रही थी। उस समय चित्र भानु ने उसका शिकार करने का निर्णय लिया तब हिरनी ने उससे कहा हे शिकारी मैं इन बच्चों को इनके पिता को सौंपकर वापस आउंगी। इस पर शिकारी ने कहा कि वह मूर्ख नहीं है इससे पहले अपने दो शिकार छोड़ चुका है उसका परिवार भूख प्यास से तड़प रहा होगा तब हिरनी ने कहा मेरा विश्वास करो मैं इन्हें इनके पिता के पास छोड़कर तुरंत लौटने की प्रतिज्ञा करती हूं। ऐसा करते हुए शिकारी को सुबह हो गई।

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अंजाने में ही शिकारी की शिवरात्रि की पूजा हो गई उपवास और रात्रि जागरण भी हो गया। इसी बीच एक हिरण वहां से जा रहा था तब शिकारी ने इसका शिकार करने का निश्चय कर लिया चित्र भानु को प्रत्यंचा चढ़ाई देखकर उस हिरण ने निवेदन किया कि यदि तुमने मेरे से पहले तीन हिरनी और उनके बच्चों का शिकार कर लिया हो तो उसे भी मार दो ताकि उनके वियोग में दुखी न होना पड़े। अगर उनको जीवनदान दिया है तो कुछ समय के लिए उसे भी जीवनदान दे दो उनसे मिलकर वह दोबारा यहां आ जाएगा। हिरण की बातें सुनकर शिकारी के मन में रात का पूरा घटनाक्रम सामने आ गया उसने सारा घटनाक्रम हिरण को बताया तब हिरण ने कहा कि वे तीनों हिरनी उसकी पत्नियां है जिस प्रकार तुमने उन पर विश्वास करके उन्हें जाने दिया वैसे ही उसे भी जाने दें। वह अपने परिवार के साथ जल्द ही यहां उपस्थित हो जाएगा। चंद्रभानु ने उसे भी जाने दिया शिवरात्रि व्रत और पूजा होने से उसका मन निर्मल हो गया उसके अंदर भक्ति की भावना जागृत हो गई। कुछ समय बाद वह हिरण अपने दिए वचन के कारण अपने परिवार के साथ शिकारी के सामने उपस्थित हो गया, लेकिन उनकी सत्यता को देखकर शिकारी को उन पर दया आ गई और उसने सभी हिरन और उसके बच्चों को छोड़ दिया। यही नहीं अनजाने में ही सही शिवरात्रि का व्रत करने से चित्रभानु को मोक्ष मिला और मृत्यु के बाद शिकारी को शिवगण शिवलोक ले गए और उस पर भगवान शिव की विशेष कृपा हुई।ऐसा माना जाता है कि आज भी जो भक्त महाशिवरात्रि के दिन चार पहर की पूजा करता है और जो शिवलिंग का जलाभिषेक करने के साथ उन्हें बेलपत्र चढ़ाता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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