
होलाष्टक का आरंभ 7 मार्च, दिन शुक्रवार से हो रहा है। इस दौरान मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है और धार्मिक कार्य करना ही शुभ माना जाता है। वहीं, होलाष्टक के इन 8 दिनों के दौरान अगर 8 चीजों का दान किया जाए तो इससे घर की आर्थिक स्थिति सुधरती है। घर में धन की कमी नहीं होती है और सुख-समृद्धि बढ़ती जाती है। ऐसे में ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से आइये जानते हैं कि होलाष्टक के दौरान किन चीजों का दान करना चाहिए।
होलाष्टक के दौरान घर में दीप दान करने का विशेष महत्व है। यह धार्मिक मान्यता है कि होलाष्टक के समय दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं। दीपक का प्रकाश अंधकार को समाप्त करता है, ठीक वैसे ही जैसे यह हमारी आत्मा के अंधकार को दूर कर पुण्य और शांति का संचार करता है।

दीप दान से वातावरण शुद्ध होता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। साथ ही, यह कार्य घर के सदस्यों के बीच प्रेम और भाईचारे को बढ़ाता है। दीपक जलाने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन में खुशहाली बनी रहती है। यह एक प्रकार से ईश्वर की कृपा प्राप्त करने का एक माध्यम भी है, जिससे समृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है।
होलाष्टक के दौरान पंच दान का बहुत महत्व माना गया है। होलाष्टक के दौरान अनाज, वस्त्र, फल, धन और जल का दान करने का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह समय दान के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि होलाष्टक के दौरान किए गए दान से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। अनाज और वस्त्र का दान जरूरतमंदों को सहायता प्रदान करता है और समाज में एकता और भाईचारे का संदेश भेजता है।

फल और धन का दान सेहत और धन की वृद्धि का प्रतीक माना जाता है, जबकि जल का दान शुद्धता और जीवन के तत्वों को संरक्षित करने का प्रतीक है। इन दानों से न केवल दाता को मानसिक संतोष मिलता है, बल्कि इससे भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है और आगामी वर्ष में समृद्धि, शांति और खुशहाली का संचार होता है। यह दान नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने में मदद करता है और घर में सकारात्मक वातावरण बनाने में सहायक होता है।
होलाष्टक के दौरान सोलह श्रृंगार का दान करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। यह दान न केवल सामर्थ्य और समृद्धि के लिए होता है, बल्कि यह मानसिक शांति, सौभाग्य और आंतरिक संतोष को भी बढ़ावा देता है। सोलह श्रृंगार में महिलाएं अपने श्रृंगार सामग्री जैसे बिंदियाँ, कड़े, हार, कंगन, चूड़ियां, बिचुए, और अन्य आभूषणों का दान करती हैं, जो स्त्री सौंदर्य और आभूषणों का प्रतीक होते हैं।

यह दान न केवल व्यक्ति के जीवन में सुख और समृद्धि लाता है, बल्कि दाता के जीवन में भी सौभाग्य का संचार करता है। साथ ही, यह दान दाता की मनोवांछित इच्छाओं की पूर्ति करने में सहायक माना जाता है और दांपत्य जीवन में प्रेम और समझदारी को बढ़ाता है। इस दान से न केवल परिवार के लिए खुशियां आती हैं, बल्कि इससे समाज में सकारात्मकता और खुशहाली का भी प्रसार होता है।
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