
3 मार्च 2026 को होने वाला पूर्ण चंद्र ग्रहण एक महत्वपूर्ण खगोलीय और आध्यात्मिक घटना है। हिंदू धर्म में ग्रहण का विशेष महत्व होता है क्योंकि इसे शुभ-अशुभ फलों से जोड़कर देखा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है तो चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ती है जिसे चंद्र ग्रहण कहा जाता है। इस दौरान प्रकृति में ऊर्जा का संतुलन बदल जाता है इसलिए सूतक काल के नियमों का पालन करना अनिवार्य माना जाता है। भारत के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर दिल्ली और उत्तर भारत में यह दृश्य काफी स्पष्ट होने की उम्मीद है। वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स ने हमें बताया कि भारत के हर शहर में चंद्र ग्रहण का समय अलग-अलग होगा और हर शहर में इसके लगने की अवधि भी भिन्न रहेगी।
यह पूर्ण चंद्र ग्रहण भारत के लगभग सभी प्रमुख राज्यों में दिखाई देगा। मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के आसमान में यह खगोलीय घटना स्पष्ट रूप से देखी जा सकेगी।

इसके अलावा, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे पूर्वी राज्यों में भी ग्रहण के कुछ अंश दिखाई देंगे क्योंकि यह शाम के समय शुरू होगा इसलिए जिन राज्यों में चंद्रमा जल्दी उदय होता है, वहां ग्रहण का नजारा सबसे पहले और लंबा दिखेगा।
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भारत के प्रमुख शहरों में चंद्र ग्रहण के संभावित समय और उसकी कुल अवधि के बारे में आप यहां देख सकते हैं-
| शहर का नाम | चंद्र ग्रहण का समय |
| दिल्ली | शाम 6.22 |
| नोएडा | शाम 6.20 |
| मुंबई | शाम 06:40 |
| जयपुर | शाम 6.14 |
| लखनऊ | शाम 06:05 |
| अहमदाबाद | शाम 06:35 |
| मथुरा | शाम 6:25 |
| कानपुर | शाम 6.14 |
| प्रयागराज | शाम 5.55 |
ग्रहण काल के दौरान शास्त्र सम्मत कुछ सावधानियां और नियम बताए गए हैं जिनका पालन करना आध्यात्मिक रूप से लाभकारी माना जाता है। ग्रहण के दौरान अपने ईष्ट देव का ध्यान करें और 'ॐ नमः शिवाय' या 'महामृत्युंजय मंत्र' का जाप करें।

ग्रहण समाप्त होने के बाद गरीबों को सफेद वस्तुओं जैसे चावल, चीनी, दूध का दान करना बहुत शुभ होता है। ग्रहण खत्म होने के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें और स्वयं भी स्नान करें। ग्रहण शुरू होने से पहले ही खाने-पीने की वस्तुओं में तुलसी के पत्ते डाल दें।
ग्रहण काल के दौरान भोजन पकाना या खाना वर्जित माना जाता है। साथ ही इस समय सोने से भी बचना चाहिए। सूतक काल शुरू होने के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दें और देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श न करें।
गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान धारदार चीजें चाकू, कैंची का उपयोग नहीं करना चाहिए और बाहर निकलने से बचना चाहिए। इस अवधि में किसी भी नए या मांगलिक कार्य की शुरुआत न करें।
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image credit: herzindagi
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