
बसंत पंचमी का त्योहार हर साल माघ मास की शुक्ल पंचमी के दिन पड़ता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन ऋतुओं में परिवर्तन होता है। साथ ही मौसम भी बदलने लगता है। इस दिन मां सरस्वती जिन्हें ज्ञान, बुद्धि, विघा और कला की देवी कहा जाता है। उनकी पूजा की जाती है। यह पूजा स्कूल से लेकर घरों में पूरे विधि-विधान के साथ की जाती है। इस साल ये त्योहार 23 जनवरी को मनाया जाएगा। हर तरह पीले वस्त्र और पीले फूलों का रंग दिखाई देगा, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती को पीले रंग फूल क्यों चढ़ाए जाते हैं? साथ ही इसका धार्मिक महत्व क्या होता है, ताकि आप भी इसके बारे में अच्छे से जान सके।
बसंत पंचमी से ही बसंत ऋतु की शुरुआत मानी जाती है। इस समय खेतों में सरसों के पीले फूल लहराते हुए नजर आते हैं और चारों ओर प्रकृति में नई ऊर्जा दिखाई देती है। पीला रंग उमंग, खुशी, सकारात्मकता और नई शुरुआत का प्रतीक है। यही कारण है कि इस पर्व पर पीले रंग का विशेष महत्व होता है। इस रंग के फूल आपको बसंत पंचमी के दिन हर तरफ देखने को मिल जाएंगे।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीला रंग ज्ञान, बुद्धि और सात्विकता का प्रतीक माना जाता है। मां सरस्वती श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जो शांति का संकेत होता है, लेकिन बसंत पंचमी पर उन्हें पीले फूल अर्पित करने से ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि होती है। ऐसा माना जाता है कि पीले फूल मां सरस्वती को सबसे ज्यादा प्रिय होते हैं। ऐसे में आप भी मां सरस्वती का आशीर्वाद पाने के लिए इन फूलों को चढ़ा सकती हैं। साथ ही अपने बच्चों के हाथों से भी चढ़ा सकती हैं।

ऐसा कहा जाता है कि बसंत पंचमी के दिन पीले फूल, पीले वस्त्र और पीले रंग के प्रसाद से की गई पूजा से विद्या, वाणी और विवेक का आशीर्वाद प्राप्त होता है। विद्यार्थी इस दिन विशेष रूप से मां सरस्वती की पूजा करते हैं, ताकि पढ़ाई में एकाग्रता और सफलता मिले। वहीं घरों में इनकी पूजा सकारात्मकता के लिए की जाती है। इसलिए फूल आप भी इन्हें चढ़ाकर आशीर्वाद प्राप्त कर सकती हैं। मां सरस्वती को चढ़ाने के लिए आप सरसों के फूल, गेंदे के फूल या पीले गुलाब को अर्पित कर सकती हैं। इन फूलों को पूजा में शामिल करने से नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
बसंत पंचमी पर मां सरस्वती को पीले फूल चढ़ाना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि इसका गहरा धार्मिक महत्व है। पीला रंग ज्ञान, सकारात्मकता और समृद्धि का प्रतीक है। इस शुभ दिन पर श्रद्धा और नियमों के साथ पूजा करने से मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में उन्नति के मार्ग खुलते हैं।
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Image Credit-Freepik/ Gemini
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