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रंग-गुलाल नहीं, कभी पलाश के फूलों से खेली जाती थी होली? जानें इससे कलर बनाने के 3 तरीके

How To Make Colour From Palash Flower: टेसू, पलाश या ढाक के फूल मार्च-अप्रैल में खिलते हैं। ये फूल होली के प्राकृतिक और त्वचा के अनुकूल रंग बनाने के लिए जाने जाते हैं। पहले के समय में इस फूल से रंग बनाकर होली खेली जाती थी।
Editorial
Updated:- 2026-02-23, 13:25 IST

How To Make Colour Help Of Palash Flower: होली का त्योहार 04 मार्च को मनाया जाएगा। इस मौके पर हर-तरफ रंग-बिरंगे कलर्स की धूम देखने को मिलती है, लेकिन क्या आप जानते हैं प्राचीन समय में केमिकल वाले रंगों के बजाय पलाश के फूलों का इस्तेमाल किया जाता था। आज के इस लेख में हम आपको पलाश के फूल से 3 तरीके से रंग बनाने का तरीका और कब से शुरू हुआ केमिकल रंगों का इस्तेमाल इसके बारे में बताने जा रहे हैं?

प्राचीन समय में होली कैसे खेली जाती थी?

Palash flower colors making process

होली का पर्व दो-चार या 10 साल से नहीं बल्कि बरसों से मनाई जाती है। अब ऐसे में मन में यह प्रश्न आता है कि तब होली कैसे खेली जाती रही होगी क्या आज की तरह पहले भी इन्हें रंगों का इस्तेमाल किया जाता था?

होली की शुरुआत धार्मिक मान्यताओं और लोककथाओं से मानी जाती है। पहले के समय में होली मुख्य रूप से नेचुरल रंगों से खेली जाती थी। लोग फूल, चंदन और हल्दी का उपयोग करते थे। बसंत ऋतु में पेड़-पौधों पर नए फूल खिलते थे, तो इन फूलों से होली का रंग बनाया जाता था। खासतौर से टेसू यानी पलाश के फूल से।

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रंगों का इस्तेमाल कब से शुरू हुआ?

बदलते समय के साथ नेचुरल रंगों की जगह पर रंगों का इस्तेमाल शुरू हुआ। ऐसा कहा जाता है कि रंगों का चलन भगवान कृष्ण और राधा की प्रेम लीला से जुड़ा है।

वृंदावन और बरसाना में कृष्ण और गोपियों की होली से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित है। ऐसा कहा जाता है भगवान कृष्ण अपनी सखियों के साथ गुलाल से होली खेलते थे।

गुलाल या अबीर को प्राकृतिक रंगों से तैयार किया जाता था, जिसमें फूलों, पत्तियों और मिट्टी से प्राप्त रंग शामिल थे। इसका उल्लेख भक्तिकाल की कविताओं और साहित्य में देखने को मिलता है। खासकर 15वीं-16वीं सदी के दौरान हुआ।

पलाश के फूल से रंग कैसे बनाया जाता है?

why are palash flowers used in indian festival

पलाश के फूलों से रंग बनाने के लिए आपको केवल इनको पानी में भिगोने की जरूरत होती है। इस फूल से बने रंग का इस्तेमाल करने से स्किन को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होता है क्योंकि यह पूरी तरह से नेचुरल होता है। नीचे देखें रंग बनाने का तरीका-

  • सबसे पहले फूलों को लाकर इन्हें सुखा लें।
  • अब इन्हें पानी में डालकर रातभर या 4-5 घंटे के लिए छोड़ दें।
  • अगले दिन पानी को छानकर दूसरे बर्तन में डालें।
  • अब आप देखेंगे कि रंग बनकर तैयार है।

दूसरा तरीका-पलाश के फूल से कैसे बनाएं गुलाल?

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अगर आप पानी से नहीं खेलना चाहती हैं, तो पलाश के फूलों से ऑर्गेनिक गुलाल तैयार कर सकती हैं।

गुलाल बनाने का तरीका

  • पलाश के फूलों को पूरी तरह सुखाकर उनका महीन पाउडर बना लें।
  • अब इस पाउडर को आरारोट या टैल्कम पाउडर के साथ मिलाएं।
  • चमक के लिए आप इसमें थोड़ा सा चंदन पाउडर या आटे का चोकर मिला सकती है।

तीसरा तरीका- समय कम होने पर पलाश के फूल से रंग कैसे बनाएं?

how to make colour help of palash flower at home

अगर आपके पास समय कम है और आप फूलों को रात भर भिगोना भूल गई हैं, तो यह तरीका अपना सकती हैं।

रंग बनाने का तरीका

  • सबसे पहले एक बड़े बर्तन में पानी गरम करें और उसमें पलाश के फूल डाल दें।
  • जब पानी खौलने लगे, तो उसमें एक चुटकी चूना मिला दें।
  • चूना डालने से पलाश फूल का रंग तुरंत बदलकर गहरा लाल या नारंगी हो जाता है।
  • चूना बहुत कम मात्रा में डालें।

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Image Credit- Gemini

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