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What is the punishment for fake doctors in India

Medical Course की अगर पाई जाती है नकली डिग्री, तो क्या हो सकती है सजा?

Fake Medical Degree Punishment: नकली मेडिकल डिग्री या फर्जी डॉक्टर बनकर प्रैक्टिस करना भारी पड़ सकता है। जानें भारतीय कानून (BNS/IPC) और NMC नियमों के तहत जेल की सजा, भारी जुर्माना और गैर-इरादतन हत्या पर क्या सजा हो सकता है?
Editorial
Updated:- 2026-04-01, 17:55 IST

Fake doctor punishment In India: मेडिकल फील्ड में करियर बनाने के लिए स्टूडेंट्स काफी मेहनत करते हैं। इस परीक्षा को इंडिया के हार्ड एग्जाम में गिना जाता है। 12वीं पास करने के बाद इच्छुक कैंडिडेट्स नीट का फॉर्म भरते हैं फिर इसका एंट्रेस एग्जाम देते हैं। एग्जाम पास करने वाले स्टूडेंट्स आगे का प्रोसेस पूरा करते हैं, जिसमें काउंसलिंग, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और कॉलेज एडमिशन शामिल है, लेकिन कुछ लोग शॉर्टकट के चक्कर में फर्जी या नकली डिग्री का सहारा लेते हैं। मेडिकल एक ऐसी सर्विस है, जिसका डायरेक्ट कनेक्शन लोगों की जान से होता है। अगर कोई व्यक्ति बिना मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी की डिग्री या फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर डॉक्टरी करता पाया जाता है, तो उसे झोलाछाप की श्रेणी में रखा जाता है।

भारत में नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत ऐसे जालसाजों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाती है। आइए नीचे लेख में जानते हैं कि Medical Course की अगर नकली डिग्री पाई जाती है, तो क्या हो सकती है सजा?

Medical Course की डिग्री नकली होने पर क्या सजा मिलती है?

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अगर किसी व्यक्ति के पास नकली मेडिकल डिग्री मिलती है या फिर उस पर डॉक्टरी करता हुआ पाया जाता है, तो उस पर धोखाधड़ी और डॉक्यूमेंट फ्रॉड का मुकदमा चलता है। इंडियन लॉ के अनुसार, नकली डॉक्यूमेंट को रोजगार के लिए इस्तेमाल करना एक गंभीर अपराध है। इसके लिए 7 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।

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मेडिकल कोर्स की डिग्री फर्जी होने पर किस एक्ट के तहत सजा मिलती है?

NMC Act 2019 punishment

मेडिकल काउंसिल के बनाए गए नियन के अनुसार, भारत में प्रैक्टिस करने के लिए स्टेट मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन जरूरी है। यदि कोई नकली डिग्री के आधार पर रजिस्ट्रेशन कराता है या बिना रजिस्ट्रेशन के इलाज करता है, तो NMC Act, 2019 के तहत भारी सजा का प्रावधान है। इसमें 1 साल से 5 साल तक की कैद और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

मरीजों की जान को खतरे में डालने पर मिलती है सजा

अगर किसी फर्जी डॉक्टर के इलाज के दौरान मरीज की तबीयत बिगड़ती है या उसकी मृत्यु हो जाती है, तो सजा बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में उस व्यक्ति पर बिना इरादे के हत्या (Culpable Homicide) का केस दर्ज किया जा सकता है। इसमें जमानत मिलना भी बेहद मुश्किल होता है और दोषी को लंबे समय तक जेल की सलाखों के पीछे रहना पड़ता है। साथ ही, उस व्यक्ति का नाम ब्लैकलिस्ट कर दिया जाता है, जिससे वह भविष्य में कभी भी चिकित्सा क्षेत्र से नहीं जुड़ सकता।

हॉस्पिटल और संस्थान पर होती कार्रवाई

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अगर आपके हॉस्टिपल या संस्थान में किसी व्यक्ति की मृत्यु या जान खतरे में जाती है, तो सजा सिर्फ डिग्री धारक तक ही सीमित नहीं होता है। अगर किसी अस्पताल या क्लीनिक ने बिना डॉक्यूमेंट की सही से चेक किए ऐसे व्यक्ति को नौकरी पर रखा है, तो उस संस्थान का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।

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