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सावधान! कहीं आपकी मार्कशीट भी तो फर्जी नहीं, वेबसाइट पर मुख्यमंत्री की फोटो देख न खाएं धोखा; जानें कैसे करें पहचान?

उत्तर प्रदेश में एक गिरोह ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री की तस्वीरों का इस्तेमाल कर फर्जी वेबसाइट बनाई और छात्रों को नकली मार्कशीट बेची। साइबर क्राइम पुलिस ने एक सदस्य को गिरफ्तार किया है। 
Editorial
Updated:- 2026-03-09, 13:46 IST

आज के डिजिटल दौर में धोखाधड़ी के तरीके भी हाईटेक हो गए हैं। फ्रेश मामला उत्तर प्रदेश से सामने आया है, जहां ठगों ने लोगों का भरोसा जीतने के लिए अपनी फर्जी वेबसाइट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और शिक्षा मंत्री की तस्वीरें लगा रखी थीं। इस फर्जीवाड़े का मुख्य उद्देश्य छात्रों को हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के नकली मार्कशीट और प्रमाण पत्र थमाना था। साइबर क्राइम पुलिस ने इस गिरोह के एक मुख्य सदस्य को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन यह घटना हम सभी के लिए एक बड़ी चेतावनी है। ऐसे में ये जानना तो बनता है कि कैसे नकली मार्कशीट की पहचान करें? आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि नकली मार्कशीट और वेबसाइट को कैसे पहचानें। पढ़ते हैं आगे...

क्या था पूरा मामला?

बता दें कि गिरफ्तार आरोपी 'उप्र राज्य मुक्त विद्यालय परिषद' के नाम से एक अवैध संस्था चला रहा था। इसने हूबहू सरकारी दिखने वाली एक वेबसाइट बनाई और उस पर सीएम की तस्वीरें लगा दीं ताकि किसी को शक न हो। 

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यह गिरोह भोले-भाले छात्रों से मोटी रकम लेकर उन्हें फर्जी डिग्रियां और सर्टिफिकेट बांट रहा था। पुलिस अब इसके अन्य साथियों और उन लोगों की तलाश कर रही है, जिन्होंने यहां से डिग्रियां खरीदीं या धोखाधड़ी का शिकार हुए।

नकली मार्कशीट और वेबसाइट की पहचान कैसे करें?

  • किसी भी सरकारी विभाग की असली वेबसाइट के अंत में आमतौर पर gov.in या nic.in होता है। यदि वेबसाइट का एड्रेस बहुत अजीब है या उसमें .com, .org या .net जैसे सामान्य डोमेन हैं, तो सावधान हो जाएं। जैसे यूपी बोर्ड की आधिकारिक साइट upmsp.edu.in है।

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  •  आजकल लगभग सभी नई मार्कशीट्स पर QR कोड होता है। इसे अपने स्मार्टफोन से स्कैन करें। अगर स्कैन करने पर स्टूडेंट की सारी डिटेल्स आधिकारिक बोर्ड की साइट पर नजर आती है, तभी उसे सही मानें। फेक मार्कशीट पर या तो कोड काम नहीं करेगा या वह किसी निजी पोर्टल पर ले जाएगा।

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  • असली सर्टिफिकेट एक खास तरह के कागज पर छपे होते हैं। उन्हें रोशनी की तरफ करके देखने पर बोर्ड का वॉटरमार्क या सरकारी लोगो दिखाई देता है। नकली मार्कशीट अक्सर साधारण रंगीन प्रिंटआउट जैसी लगती है।
  • ठगी लोग अक्सर वेबसाइट या सर्टिफिकेट डिजाइन करते समय छोटी-मोटी गलतियां कर देते हैं। बोर्ड के नाम, पदनाम या सरकारी नाम में स्पेलिंग मिस्टेक होना इस बात का सबूत है कि डॉक्यूमेंट फेक है।

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Images: Freepik/shutterstock

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