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Meaning of release and bail from jail

रिहाई और जमानत में क्या होता है फर्क? एडवोकेट से यहां जानें

Difference Between Bail And Release: दिल्ली दंगों की आरोपी गुलफिशा फातिमा  07 जनवरी, 2026 को 5 साल बाद जेल से रिहा किया गया है। क्या आपको पता है कि रिहाई और जमानत में अंतर है? अगर नहीं, तो इलाहाबाद हाईकोर्ट के एडवोकेट नीतेश पटेल से जानें इन दोनों के बीच क्या है फर्क?
Editorial
Updated:- 2026-01-12, 17:04 IST

Bail vs Release: लड़ाई-झगड़ा, हत्या या अन्य क्राइम के तहत आने वाले आरोपी को तय धारा के अनुसार सजा दी जाती है। साथ ही आरोप बड़ा होने पर कानूनी प्रक्रिया के तहत जेल भी भेजा जाता है। हालांकि, कानूनी प्रक्रियाओं में रिहाई और जमानत दो ऐसे शब्द हैं जिन्हें हम अक्सर सुनते हैं और कहीं न कहीं इन्हें एक ही समझ लेते हैं, लेकिन कानून की नजर में इनके मायने बिल्कुल अलग हैं। जब कोई व्यक्ति किसी अपराध के आरोप में पुलिस की गिरफ्त में होता है या जेल में होता है, तो उसे बाहर आने के लिए कानूनी रास्ता अपनाना पड़ता है।

आम बोलचाल में हम कहते हैं कि फलां व्यक्ति जेल से छूट गया है, पर वह छूटने का आधार क्या है, यह तय करता है कि वह रिहाई है या जमानत। इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील नीतेश पटेल से जानिए रिहाई और जमानत में अंतर क्या है?

जमानत का क्या है? (What Is Meaning Of Bail)

What Is Meaning Of Bail

जमानत को अंग्रेजी भाषा में बेल कहते हैं, जो एक अस्थायी व्यवस्था है। जब किसी व्यक्ति पर कोई आरोप लगता है और उसे गिरफ्तार किया जाता है, तो अदालत उसे कुछ शर्तों के साथ जेल से बाहर आने की अनुमति देती है।

जमानत मिलने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति निर्दोष साबित हो गया है। इसका मतलब सिर्फ यह है कि केस की सुनवाई के दौरान वह जेल के बाहर रह सकता है।

कोर्ट आमतौर पर जमानत के बदले कुछ पैसे या किसी व्यक्ति की गारंटी मांगता है, जिससे वह यह सुनिश्चित हो सके कि आरोपी सुनवाई के लिए कोर्ट में हाजिर होगा।

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रिहाई क्या है? (What is Release)

वहीं अगर कोई व्यक्ति जेल से बाहर रिहाई पर आता है, तो इसका मतलब उसे बाइज्जत बरी किया गया है। रिहाई एक स्थायी स्थिति होती है, जब अदालत किसी मामले की पूरी सुनवाई कर लेती है और इस नतीजे पर पहुंचती है कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

रिहा होने के बाद व्यक्ति को न तो कोर्ट में बार-बार हाजिरी लगानी पड़ती है और न ही उसे किसी गारंटी की जरूरत होती है। वह पूरी तरह स्वतंत्र होता है।

जमानत या रिहाई व्यक्ति को कब मिलती है?

Meaning of release from jail

जमानत केस की सुनवाई के दौरान मिलती है। यह एक तरह की मोहलत है ताकि आरोपी अपनी पैरवी बाहर रहकर कर सके वहीं रिहाई केस के अंत में होती है, जब फैसला सुना दिया जाता है। हालांकि, कई बार पुलिस जांच में दोष न पाए जाने पर चार्जशीट दाखिल होने से पहले भी रिहाई हो सकती है।

जमानत या रिहाई को लेकर कानूनी बंधन और पाबंदियां क्या हैं?

जमानत पर बाहर आए व्यक्ति पर कई तरह की पाबंदियां होती हैं, जैसे वह शहर या देश छोड़कर नहीं जा सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि समय-समय पर पुलिस स्टेशन में हाजिरी देनी पड़ सकती है और गवाहों को प्रभावित नहीं करना होता।

अगर वह इनमें से किसी भी शर्त का उल्लंघन करता है, तो उसकी जमानत रद्द कर उसे दोबारा जेल भेजा जा सकता है।

इसक उलट अगर कोई व्यक्ति रिहा होकर जेल से बाहर आया है, तो उस पर किसी भी प्रकार की कोई शर्त नहीं होती है क्योंकि कानून की नजर में वह उस अपराध से मुक्त हो चुका होता है।

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 Image Credit- freepik

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