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'नाबालिग छात्रा से किया रेप और फिर प्रेग्नेंट हुई तो...', लखनऊ में ट्यूशन टीचर ने स्टूडेंट के साथ की दरिंदगी; क्या कोई भी रिश्ता नहीं रह गया है बेटियों के लिए सुरक्षित?

लखनऊ में एक ट्यूशन टीचर ने अपनी 13 वर्षीय स्टूडेंट के साथ बार-बार दरिंदगी की। उसे डरा-धमकाकर उसने कई बार रेप किया। गुरू को हमारे समाज में भगवान का दर्जा दिया जाता है, लेकिन जरा सोचिए अगर गुरू ऐसे हों, तो फिर क्या उन्हें इंसान भी माना जा सकता है?
Editorial
Updated:- 2026-02-24, 17:10 IST

हमारे यहां गुरू को भगवान से भी ऊपर का दर्जा दिया जाता है। कहा जाता है कि अगर गुरु और गोविंद दोनों खड़े हों, तो गुरु के पैर पहले छूने चाहिए, लेकिन अगर गुरु ही अपनी गरिमा को भूल जाए तो!
बेटियों को सबसे सुरक्षित घर में माना जाता है, अपने रिश्तेदारों, गुरु और परिवार वालों के आस-पास माना जाता है, लेकिन आजकल हर दूसरे दिन ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां घर के अंदर और भरोसेमंद अपनों के बीच लड़कियों की इज्जत तार-तार हो रही है।
ऐसा ही एक मामला लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी इलाके से सामने आया है। यहां एक शिक्षक ने 13 साल की नाबालिग छात्रा के साथ एक नहीं, बल्कि कई बार यौन उत्पीड़न किया और प्रेग्नेंट हो जाने पर उसका गर्भपात करवा दिया। चलिए आपको बताते हैं कि क्या है पूरा मामला?

20 दिनों में कई बार किया छात्रा से रेप

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक ट्यूशन टीचर ने 13 साल की नाबालिग छात्रा के साथ 22 जनवरी से 12 फरवरी के बीच कई बार रेप किया। उसने 20 दिनों में कई बार डरा-धमकाकर बच्ची का शोषण किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब छात्रा गर्भवती हो गई, तो शिक्षक ने जबरदस्ती उसे दवाईयां खिलाकर उसका एबॉर्शन किया। इसके बाद जब बच्ची को दर्द और पीड़ा हुई, तो उसने अपनी मां को सारी बात बताई। पीड़िता नौवीं कक्षा में पढ़ती है और 22 जनवरी को किशोरी के माता-पिता जब ऑफिस में थे, तो शिक्षक ने उसके साथ ऐसा किया। जब उसने विरोध किया, तो उसे डराया और इसके बाद वो बच्ची को घर में ट्यूशन देने आने लगा। शिक्षक के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

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अपनों के बीच ही क्यों सुरक्षित नहीं हैं बेटियां?

why women are not safe even in their own homes

घर-परिवार और जान-पहचान वाले लोगों के बीच अमूमन बेटियों को सबसे सुरक्षित माना जाता है, लेकिन अगर अपनों के बीच ही बच्चियां सुरक्षित न हों तो फिर क्या किया जाए? ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब इस तरह का कोई मामला सामने आया है। पहले भी कई बार ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जहां रक्षक ही भक्षक बन गए हैं। एक रिपोर्ट में भी इस बात का खुलासा हुआ था कि इस तरह की घटनाओं में ज्यादाकर आरोपी पहचान वाले ही होते हैं। जरा सोचिए अगर बेटियों के लिए घर और परिवार के बीच ही सुरक्षित माहौल न मिल पाए, तो क्या किया जाए?

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घर से बाहर निकलते वक्त बेटियों को अक्सर खुद को महफूज रखने की सलाह दी जाती थी, लेकिन जब घर के अंदर ही कभी पिता, कभी भाई, कभी गुरू और कभी कोई और अपना जाना-पहचाना रिश्ता ही बेटियों की इज्जत तार-तार करने पर आमादा हो जाए, तो फिर आखिर वो कहां खुद को सेफ महसूस करे?

 

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