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Nepali woman gangrape in Haryana

'ऑटो रिक्शा में बैठी और फिर...', गुरुग्राम में नेपाली महिला के साथ तीन लोगों ने की दरिंदगी; दिल्ली-एनसीआर में 1 हफ्ते में सामने आए ये मामले दिखा रहे हैं महिला सुरक्षा के दावों का सच

  गुरुग्राम में एक बार फिर महिला सुरक्षा को तार-तार करता एक मामला सामने आया है। यहां ऑटो से घर लौट रही एक नेपाली महिला के साथ ऑटो चालक समेत तीन लोगों ने गैंगरेप किया। कुछ दिन पहले भी गुरुग्राम में एक तीन साल की बच्ची संग हैवानियत की घटना सामने आई थी। असल में ये मामले हमें महिला सुरक्षा के खोखले दावो की हकीकत दिखाते हैं।
Editorial
Updated:- 2026-02-27, 19:09 IST

महिलाओं को एक सुरक्षित माहौल, एक सेफ समाज देना शायद बहुत बेसिक जरूरत है, लेकिन अफसोस की बात है कि हम महिलाओं को इसे दे पाने में पूरी तरह से फेल हो चुके हैं। ऐसा मैं नहीं कह रही हूं, बल्कि ऐसा वो आंकड़े और हेडलाइंस कह रही हैं, जिन्हें न चाहते हुए भी हमें रोज देखना और सुनना पड़ता है और बतौर जर्नलिस्ट जिन्हें मुझ जैसी न जाने कितनी लड़कियों को कवर करना पड़ता है। इस बार दिल्ली से सटे गुरुग्राम में ऑटो रिक्शा से घर लौट रही नेपाली महिला के साथ तीन लोगों ने गैंगरेप किया। लड़की की उम्र 26 साल बताई जा रही है और वह एक प्राइवेट कंपनी में काम करती है। अभी कुछ दिन पहले ही गुरुग्राम में एक तीन साल की बच्ची संग हैवानियत की घटना सामने आई थी। इसके अलावा भी दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ दिनों में कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जो महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े करते हैं या यूं कहें कि महिला सुरक्षा के खोखले दावों की असलियत दिखाते हैं।

गुरुग्राम में नेपाली महिला के साथ गैंगरेप

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गुरुग्राम में एक नेपाली महिला के साथ तीन लोगों ने कथित तौर पर गैंगरेप किया। महिला का आरोप है कि ऑटो चालक समेत तीन लोगों ने उसके साथ रेप किया। उनसे अपनी शिकायत में कहा कि वह गुरुग्राम में अपने एक दोस्त से मिलने आई थी। कुछ कारणों के चलते उनसे शराब पी थी और वो नशे में थी। ऐसे में उसे सही से कुछ याद नहीं था। बताया जा रहा है कि पीड़िता एक ऐसे ऑटो में बैठ गई, जिसमें पहले से ही तीन लोग सवार थे। वो जब होश में आई, तो उसने खुद को एक कमरे में बंद पाया। उसने शिकायत में तीन पुरुशों पर गैंगरेप का आरोप लगाया है। फिलहाल ऑटो चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है और बाकी आरोपियों की तलाश जारी है। इस मामले में महिला की भी काउंसलिंग करवाई जा रही है।

1 हफ्ते में दिल्ली-एनसीआर में सामने आए ये मामले महिला सुरक्षा पर खड़े कर रहे हैं सवाल

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  • कुछ दिन पहले गुरुग्राम से एक मामला सामने आया था। यहां पड़ोसी ने एक 3 साल की बच्ची को किडनैप करके उसका रेप किया और फिर उसकी हत्या कर दी। हत्या करने के बाद आरोपी ने उसका शव एक गड्ढे में दफना दिया था। इस मामले में एक 24 साल के युवक को गिरफ्तार किया गया था।
  • गुरुग्राम से ही एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया था। एक व्यक्ति ने अपनी लिव-इन पार्टनर के प्राइवेट पार्ट्स पर सैनिटाइजर डालकर आग लगा दी थी। व्यक्ति ने न केवल युवती को बंधक बनाकर पीटा था, बल्कि उसे 3 दिनों तक कई तरह से टॉर्चर भी किया था। पीड़िता ने जैसे-तैसे अपनी मां को फोन लगाकर पूरी बात बताई और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उसे बताया।
  • कुछ दिन पहले एक और हैरान करने वाला मामला सामने आया था। दिल्ली के पहाड़गंज में एक पिता ने अपनी बेटी के साथ कई बार दुष्कर्म किया। पीड़िता को डरा-धमकाकर चुप रहने के लिए कहा। हालांकि, पीड़िता ने हिम्मत करके उसके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई।
  • दिल्ली के सराय काले खां से 19 फरवरी को एक 6 साल की बच्ची का शव एक कुएं से मिला था। इस मामले में भी रेप की आशंका जताई गई थी। इस मामले में पुलिस ने उसके एक रिश्तेदार को गिरफ्तार किया था।
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क्या कभी रुकेंगी ये घटनाएं?

हर बार जब किसी बेटी के साथ दरिंदगी की कोई खबर सामने आती है, तो कुछ पल के लिए हम गुस्से से भर जाते हैं, सोशल मीडिया पर हैशटैग ट्रेंड करता है, मोमबत्तियां जलाई जाती है और कड़े कानूनो की मांग उठती है, लेकिन आखिर में वहीं सवाल उठता है कि आखिर यह सब कब रुकेगा? एक तरफ हम चांद पर पहुंचने की बात करते हैं, डिजिटल इंडिया का जश्न मनाते हैं और खुद को विकसित देश कहने का दम भरते हैं, लेकिन दूसरी तरफ बेटियों को आज भी यह सिखाते हैं कि "रात में बाहर मत निकलो", "ज्यादा मत हंस", "कपड़े संभाल कर पहनो।" क्यों हर बार सुरक्षा का बोझ लड़की के कंधों पर डाल दिया जाता है? क्यों नहीं लड़कों को सिखाया जाता कि सम्मान क्या होता है, सहमति क्या होती है, इंसानियत क्या होती है?
महिला सुरक्षा केवल कानून से नहीं आएगी, यह असल में सोच बदलने से आएगी। जब तक घरों में बेटों को यह नहीं सिखाया जाएगा कि महिलाएं कोई वस्तु नहीं, बल्कि समान हक और सम्मान वाली इंसान है, तब तक आंकड़े बदलते रहेंगे, हकीकत नहीं। सवाल आज भी वहीं खड़ा है कि क्या हम सच में बदलाव चाहते हैं या बस अगली खबर का इंतजार?

 

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महिलाओं के साथ हर दूसरे दिन इस तरह की दरिंदगी के मामले सामने आ रहे हैं और चीख-चीखकर ये कह रहे हैं कि किसी भी उम्र और किसी भी जगह पर महिलएं सुरक्षित नहीं हैं। समाज के तौर पर हमें शायद बहुत कुछ बदलने की जरूरत है तभी इस तरह के मामले रुकेंगे।

 

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