
आज बड़े होने के बाद शायद हम सभी सबसे ज्यादा अपने बचपन को याद करते हैं और सोचते हैं कि कितना खूबसूरत था वो वक्त...जब न हमें दुनियादारी की समझ थी और न मन में कोई छल-कपट...न जाने कितनी बातें थीं जिनके तो मतलब तक नहीं पता थे, मासूम से मन में बस नादानियां और कुछ मासूम सवाल रहा करते थे। यही होता है न बचपन, शायद मेरे और आपके लिए तो बचपन की यही परिभाषा रही है, लेकिन आज के वक्त में शायद बचपन की वो मासूमियत कहीं गुम होती जा रही है और नन्हें बच्चे दरिंदगी सीख रहे हैं। हाल ही में दिल्ली के भजनपुरा से एक ऐसा ही मामला सामने आया है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में तीन नाबालिग लड़कों पर छह साल की बच्ची संग हैवानियत करने का आरोप है। तीनों आरोपियों की उम्र 10,13 और 14 साल बताई जा रही है। चलिए आपको बताते हैं क्या है पूरा मामला?

दिल्ली के भजनपुरा में 10-14 साल के तीन लड़कों ने एक 6 साल की बच्ची का रेप किया है। घटना से कुछ देर पहले बच्ची को उसके पिता कैंडी दिलवाकर घर के बाहर छोड़ गए थे और वहीं से वो तीनों उसे नूडल्स का लालच देकर पास की एक बिल्डिंग में ले गए और वहां उसके साथ दरिंदगी की। बच्ची ने अपने बयान में बताया कि उसके हाथ बांधकर और मुंह दबाकर उसके साथ हैवानियत की। बच्ची जब घर लौटी, तो खून बह रहा था और उसके बाद वो बेहोश हो गई। पहले डर के चलते उसने घरवालों से कहा कि वो गिर गई थी। बार-बार सवाल करने के बाद उसने बताया कि 13 साल के पड़ोसी और दो अन्य नाबालिगों ने उसके साथ गैंगरेप किया। मेडिकल रिपोर्ट में सामने आया है कि बच्ची चल नहीं पा रही थी और खून बहुत बह रहा था। पीड़िता की मां ने बताया, "जब वो बैठती है, तो दर्द होता है और जब चलती या खेलती है, तो खून बहने लगता है।" तीन में से दो आरोपियों को पुलिस ने पकड़ लिया है और तीसरे की तलाश जारी है। पीड़िता की मां ने बताया कि वो तीनों उनके 14 साल के बेटे के दोस्त थे, जिसकी पिछले साल मौत हो गई है।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब कोई मासूम बचपन इस तरह से तार-तार हुआ है और सबसे हैरानी की बात ये है कि पहले भी कई बार आरोपी भी नाबालिग रहे हैं। इससे पहले उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक मामला सामने आया था, जहां 12 और 8 साल के दो बच्चों ने 6 साल एक की बच्ची का रेप किया था। ऐसे और भी कई मामले सुर्खियों में रहे हैं। ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर इतने छोटे बच्चे ये सब कहां से सीख रहे हैं, जिस उम्र में हाथों में खिलौने होने चाहिए, मन में निश्छल विचार होने चाहिए, उस उम्र में कैसे मन में दरिंदगी के ख्याल पनप रहे हैं। पेरेंट्स को भी ये सोचने की जरूरत है कि बच्चे क्या देख रहे हैं, किस संगत में हैं और कहीं उनके मन में कोई गलत विचार तो नहीं पनप रहे हैं। इसके अलावा यह हमारी सामाजिक जिम्मेदारी भी है कि हम ये सोचें कि नई पीढ़ी किस दिशा में जा रही है? जरा सोचिए वो मासूम बच्ची, जिसे रेप का मतलब तक नहीं पता, उसके मन पर इसका क्या असर पड़ा होगा?
जिन नन्हे हाथों में खिलौने होने चाहिए, जिस दिमाग में मासूमियत होनी चाहिए और जिस उम्र में नादानी झलकनी चाहिए, उस उम्र में बच्चे इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। आखिर हमारी आने वाली पीढ़ी किस तरह जा रही है और हम एक समाज के तौर पर क्या गलत कर रहे हैं, जो इस तरह के मामले रुकने के बजाय बढ़ते जा रहे हैं।
Image Courtesy: Shutterstock, Freepik
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