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मध्य प्रदेश के सीहोर में इंसानियत हुई शर्मसार! 13 साल की मासूम के साथ 70 साल के बुजुर्ग ने किया 6 बार दुष्कर्म, आखिर कब तक देश की बेटियां लगाएंगी सुरक्षा की गुहार?

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से सामने आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने एक बार फिर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे मामले न सिर्फ समाज के लिए एक प्रश्न चिह्न लगाते हैं, बल्कि हमें यह सोचने पर भी मजबूर करते हैं कि क्या बेटियां सच में घर से बाहर सुरक्षित नहीं हैं?
Editorial
Updated:- 2026-01-21, 16:34 IST

आए दिन न जाने कितनी ऐसी घटनाएं सामने आती हैं जिन्हें सुनकर दिल दहल जाता है। कभी किसी महिला के साथ ऑफिस से घर आते समय कोई ऐसी घटना होती है जो महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्न चिह्न लगाती है, तो कभी स्कूल में ही बच्ची के साथ कुछ गलत होता है। हम न जाने कितने ऐसे मामलों को सुनते हैं और अगले ही पल भूलकर अपनी दिनचर्या में व्यस्त हो जाते हैं। महिलाओं को सुरक्षा अभी भी एक सवाल है और उसका उत्तर शायद हम सभी खोजने में लगे हैं कि आखिर कब देश की बेटियां सड़कों पर, स्कूल में, वर्कप्लेस में और यहां तक कि घर में खुद को महफूज समझेंगी? एक ऐसा ही मामला सामने आया मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में जब ये घटना सामने आई कि एक नाबालिग के साथ 6 महीने में 6 बार एक 70 वर्षीय बुजुर्ग ने दुष्कर्म किया। वास्तव में इस घटना ने सोचने के लिए मजबूर कर दिया कि आखिर ये समाज को क्या होता जा रहा है जहां पिता से भी ज्यादा बड़ी उम्र का एक व्यक्ति बच्ची के साथ गलत करता है। वास्तव में ऐसी घटनाएं न सिर्फ देश की सुरक्षा पर बल्कि समाज की विकलांग सोच को भी दिखाती हैं।

क्या है सीहोर में नाबालिग के साथ दुष्कर्म का पूरा मामला?

मध्यप्रदेश के सीहोर में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म और छेड़छाड़ का मामला सामने आया है और यह घटना पांगरी गांव के चित्रकूट धाम मंदिर के पास एक कमरे में हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 13 साल की पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वह चंद्रभान त्रिपाठी नाम के व्यक्ति के घर पढ़ने जाती थी। इसी दौरान आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म और छेड़छाड़ भी की। पीड़िता का कहना है कि आरोपी ने 29 जून से 29 दिसंबर 2025 के बीच उसके साथ छह बार दुष्कर्म किया और हाल ही में उसे मंदिर के पास एक कमरे में उसके हाथ-पैर बांधकर दुष्कर्म का प्रयास किया। हालांकि, जब उसी जगह पर और बच्चे भी आ गए तो वो सफल नहीं हो सका। पुलिस ने आरोपी चंद्रभान त्रिपाठी के खिलाफ शिकायत दर्ज की है।

sihore rape of a minor girl

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से सामने आई यह घटना किसी एक व्यक्ति का अपराध नहीं है, बल्कि यह उस समाज और सुरक्षा व्यवस्था पर एक गहरा प्रश्नचिह्न है, जिसमें एक 13 साल की नाबालिग बच्ची छह महीने तक एक बुजुर्ग व्यक्ति का शोषण सहती रही और अपनी सुरक्षा के लिए आवाज भी न उठा सकी।  

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आरोपी पर लगाया गया पॉक्सो एक्ट

रिपोर्ट्स के अनुसार 70 वर्षीय आरोपी चंद्रभान त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो एक्ट की अलग-अलग धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। हालांकि कानून अपनी कार्यवाही कर रहा है, लेकिन असली सवाल यह है कि ऐसा अपराध हुआ ही क्यों और इतनी आखिर कैसे 6 महीनों तक यह चलता रहा।

आखिर किस पर भरोसा कर सकती हैं बेटियां?

हमारी संस्कृति गुरु को देवों का दर्जा देती है और उसी समाज में एक गुरु का अपनी छात्रा के साथ किया गया ऐसा दुष्कर्म इस बात को दिखाता है कि बेटियां घर की दहलीज के पार किसी भी स्थान पर सुरक्षित नहीं हैं। शिक्षा, जिसे बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की नींव माना जाता है, उसी शिक्षा के नाम पर एक नाबालिग के बचपन को कुचल दिया गया। घर के लोगों ने जिस व्यक्ति को मार्गदर्शक, शिक्षक या संरक्षक माना होगा, वही उसके लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया और उसके साथ दुष्कर्म करता रहा। यह घटना हमें बताती है कि बेटियों के साथ होने वाले यौन अपराध केवल अनजान लोगों द्वारा नहीं किए जाते हैं, बल्कि करीबी लोग भी बेटियों के साथ आपराधिक घटनाएं कर सकते हैं।

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why girls are not safe

बच्ची के साथ होता रहा अपराध और सिस्टम सोता रहा

पीड़िता के बयान के अनुसार, आरोपी ने पिछले छह महीनों में उसके साथ छह बार दुष्कर्म किया और कई बार छेड़छाड़ भी की। ऐसे में सवाल यह उठता है कि 6 महीने के लंबे समय तक यह सब कैसे चलता रहा? क्या बच्ची ने डर, शर्म या घर की इज्जत के बारे में सोचकर चुप्पी साध ली थी? या फिर उसके किसी भी संकेत को नजरअंदाज किया गया? क्या बच्ची के पेरेंट्स भी इस बात को समझ नहीं पाए? क्या सब जानते हुए भी घर के लोगों ने चुप्पी साधी? वास्तव में यह चुप्पी परिवार की, गांव की और पूरे समाज की थी या फिर सिस्टम की सबसे बड़ी चूक? सवाल कई हैं और उत्तर अभी भी ढूंढ़ रही हूं। हम अक्सर बच्चों के व्यवहार में आए बदलाव को पढ़ाई से बचने का बहाना मान बैठते हैं। हो सकता है बच्ची ने कभी शिक्षक की गलत मनसा के बारे में बताया हो, लेकिन उसे नजरअंदाज किया गया हो।  

भारत में पॉक्सो एक्ट जैसे सख्त कानून मौजूद हैं, जिनका उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधों से बचाना है, लेकिन कई बार ऐसे अपराध कानून की नजर में आ ही नहीं पाते या फिर इतनी देर से आते हैं कि किसी न किसी बुरी घटना की शिकार कोई मासूम हो चुकी होती है। अब सवाल यह उठता है कि बेटियों की सुरक्षा पर अभी भी प्रश्न चिह्न क्यों लगा है और ऐसी घटनाओं का जिम्मेदार आखिर कौन है?

अगर आपके भी इसके बारे में कोई सवाल हैं और ऐसे प्रश्न सोचने के लिए मजबूर करते हैं तो हमें जरूर बताएं। आपको यह स्टोरी अच्छी लगी तो इसे शेयर जरूर करें और ऐसे अन्य आर्टिकल पढ़ने के लिए जुड़ी रहें अपनी साइट हरजिंदगी के साथ। 

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