Mon Apr 20, 2026 | Updated 06:37 AM IST
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सक्सेसफुल लोगों को स्टॉक करने की आदत, जानें क्यों आप अपनी रियल लाइफ से हो रही हैं अनहैप्पी?

यह लेख बताता है कि कैसे इंस्टाग्राम रील्स हमें दूसरों की 'परफेक्ट' जिंदगी से अपनी तुलना करने पर मजबूर करती हैं। यह 'कंपैरिजन ट्रैप' हीन भावना, अकेलापन और डिप्रेशन का कारण बनता है। 
Editorial
Updated:- 2026-04-19, 09:05 IST

आज के दौर में स्मार्टफोन हमारे हाथ में हर वक्त रहता है और इंस्टाग्राम हमारी दिनचर्या का जरूरी हिस्सा है। हम अक्सर अपनी सुबह की शुरुआत दूसरों की प्रोफाइल 'स्टॉक' करने से करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि किसी की लग्जरी वेकेशन, नई कार या परफेक्ट बॉडी वाली रील देखने के बाद आप अपनी ही जिंदगी से दुखी या खुद को कम समझना महसूस करने लगते हैं? यह एक गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है। आप ये जाने कि सोशल मीडिया की यह परफेक्ट दुनिया हमारी असल जिंदगी पर कैसे असर डाल रही है। ऐसे में इनके बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि रियल लाइफ को रील से तुलना रपना और खुद को कम आंकना कितना गलत है?  इसके लिए हमने कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं इस लेख के माध्यम से...

रील वीडियो क्यों प्रभाव डालती हैं?

बता दें कि हमारा दिमाग कहानियों और दृश्यों से बहुत जल्दी प्रभावित होता है। इंस्टाग्राम रील्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे हमारे दिमाग में डोपामाइन  यानि खुशी का हार्मोन रिलीज करती हैं। जब हम किसी सफल व्यक्ति को चकाचौंध भरी रील में देखते हैं, तो हमारा दिमाग उसे एक आदर्श जीवन मान लेता है। रील की चमक-धमक, फिल्टर और बैकग्राउंड म्यूजिक एक साधारण पल को भी असाधारण बना देते हैं। समस्या तब शुरू होती है जब हम यह भूल जाते हैं कि जो हम देख रहे हैं, वह किसी के जीवन का केवल 15 सेकंड का सबसे बेहतरीन हिस्सा है, न कि उनकी पूरी हकीकत है।

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मानसिक सेहत पर इसका असर क्या है?

जब हम दूसरों की सफलताओं को अपनी आज की सिच्युएशन से तौलते हैं, तो हम अनजाने में हीन भावना के शिकार हो जाते हैं। इसे 'कंपैरिजन ट्रैप' कहा जाता है।

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इसका सबसे बुरा असर यह होता है कि हम अपनी उपलब्धियों को छोटा समझने लगते हैं। दूसरों की रीयल लाइफ को अपनी रियल लाइफ से कंपेयर करने पर अकेलापन, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। 

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इस डिजिटल जाल से कैसे निकलें?

हमेशा याद रखें कि आप किसी की फिल्म का क्लाइमेक्स देख रहे हैं, जबकि आप अपनी फिल्म के मेकिंग दौर में हैं। हर सफल व्यक्ति के पीछे असफलताओं की एक लंबी लिस्ट होती है, जो वे रील पर कभी नहीं दिखाते। इससे अलग दिन में कम से कम 2-3 घंटे फोन से पूरी तरह दूरी बनाएं। उन अकाउंट्स को 'अनफॉलो' या 'म्यूट' कर दें जिन्हें देखकर आपको प्रेरणा के बजाय दुख या जलन महसूस होती है।

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Images: Freepik/shutterstock

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