Tue Apr 14, 2026 | Updated 06:40 PM IST
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Main Hoon Apni Dhanlaxmi Part-21: क्यों भारतीय महिलाओं के लिए रियल एस्टेट है सबसे भरोसेमंद निवेश?

भारतीय परिवारो में ये देखा गया है कि वे म्यूचुअल फंड्स या शेयर्स के बजाय जमीन या अचल संपत्ति के बारे में सोचना अतार्किक नहीं है। आप उसे देख सकते हैं। छू सकते हैं। उस जगह पर अपनी खुशहाल जिंदगी की कल्पना कर सकते हैं।
Editorial
Updated:- 2026-04-14, 13:56 IST

घर का एक पता होता है, उसकी चाबियां होती हैं। इन वजहों से अचल संपत्ति के विषय में सोचना अतार्किक नहीं है। यह मानवीय स्वभाव होता है। इसी वजह से रियल एस्टेट को भारत में सर्वाधिक विश्वसनीय संपत्ति माना जाता है।
पीढ़ी दर पीढ़ी देखा गया है कि भारतीय महिलाएं संपत्ति को जटिल विषय मानती हैं। शेयर के साथ अनिश्चितता का पहलू जुड़ा है, म्यूचुअल फंड अमूर्त होते है, गोल्ड के साथ अवश्य कुछ भावनात्मक जुड़ाव होता है, लेकिन उसकी भी सीमा है। अचल संपत्ति, जमीन या फ्लैट के विषय में महिलाएं कुछ हद तक जानकारी रखती हैं, उसे लेकर मोल-भाव व लड़ाई करने तक का माद्दा उनमें देखा गया। मैं ऐसी बहुत सी महिलाओं से मिली हूं, जिनकी इक्विटी मार्केट को लेकर कोई राय नहीं थी, लेकिन किस इलाके में संपत्ति खरीदना ठीक होगा, कौन सा तल सही रहेगा, वास्तु उचित है या नहीं, इन बातों को लेकर उनका सशक्त मत था। अंतर्मन की ये समझ यूं ही नहीं थी। वास्तव में ये वित्तीय समझ से जुड़ा पहलू ही है, पर व्यक्त करने का तरीका अलग है।
इस हफ्ते मैं रियल एस्टेट की बात करूंगी, पर ये संवाद घर खरीदने या ऋण को लेकर नहीं होगा, बल्कि हम बात करेंगे कि अचल संपत्ति को किस प्रकार देखना चाहिए। ये क्या है, उसके परिणामों और वित्तीय योजना में अचल संपत्ति को शामिल किए जाने के महत्व की हम चर्चा करेंगे। रियल एस्टेट का मूर्त स्वरूप होता है। उसकी भौतिक उपलब्धता होती है, छूकर देख सकते हैं। कोई उसे चुरा नहीं सकता, सर्वर फेल हो जाने के कारण वह संपत्ति गायब नहीं हो जाएगी। क्षणिक अंतराल पर उसकी कीमतें घटती-बढ़ती नहीं हैं।

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यही मूर्त स्वरूप रियल एस्टेट के साथ जुड़ाव का अहम कारण है। जब शेयर बाजार गिरता है तो सुर्खियां बनती हैं, जब गोल्ड के दाम घटते हैं तो सबकी नजरें आकर्षित होती हैं, लेकिन बहुत से भारतीय शहरों में जब वर्ष 2014-20 के दौरान अचल संपत्ति के दाम स्थिर रहे तो मालिकाना हक रखने वालों ने उसी प्रकार महसूस नहीं किया। इसकी वजह क्या थी? दरअसल लोग प्रतिदिन सुबह उठकर अपने फ्लैट या संपत्ति की कीमत नहीं लगवाते थे। इक्विटी निवेशकों के भीतर उसके मूल्य में उतार-चढ़ाव को लेकर जो चिंता या तनाव होता है, वैसा कुछ संपत्ति के साथ नहीं था। आप उसे खरीदते हैं और वह आपकी हो जाती है। ये विश्वास बनता है कि मुश्किल समय में वह संपत्ति आपके काम आएगी। इस निवेश को लेकर कोई असुविधा या भय नहीं होता। तनाव के क्षणों में आप अन्य परिसंपत्तियों के विक्रय को लिए आतुर हो उठते हैं, पर अचल संपत्ति के साथ वैसा नहीं, इसलिए कालांतर में उसका मूल्य भी बढ़ता है।

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भारत में रियल एस्टेट का महत्व एक और वजह से भी है। घर के साथ परिवार की स्मृतियां जुड़ी होती हैं, दीवाली का उत्सव हो या शादी, किचेन में खाना पकाते वक्त स्वजन के साथ गपशप की कितनी ही अमूल्य यादें जुड़ जाती हैं। यही वजह है कि हम जब ये बोलते हैं कि अपना घर तो उसके साथ गर्मजोशी का भाव होता है। किसी म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो का उल्लेख करते समय वैसा भाव नहीं आता। विशेषकर महिलाओं के लिए संपत्ति के स्वामित्व का भावनाओं से इतर अलग अर्थ होता है। उनके नाम पर मकान होने का अर्थ आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है। अपने हितों के लिए मोलभाव कर सकती हैं। उसके आधार पर सहजता से ऋण ले सकती हैं। जीवन के अप्रत्याशित क्षणों में वे मजबूती से खड़ी से होती हैं। ये सिर्फ धन को लेकर रणनीति नहीं, बल्कि गरिमा की भी बात है।
भावनात्मक पहलू से इतर अचल संपत्ति से कई चीजें हल होती हैं जो अन्य परिसंपत्तियों के माध्यम से संभव नहीं हैं। मकान किराए पर देने से आय होती है, बाजार में कितने ही उतार-चढ़ाव आएं पर किराये से आमदनी होती रहेगी। उसे गिरवी रखकर होम लोन दरों पर संपत्ति के मूल्य की 80 प्रतिशत तक राशि ऋण ले सकती हैं। भारत में तेजी से तरक्की करते शहरों में संपत्ति के मूल्य में अच्छी बढ़त दर्ज की गई है।

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हालांकि रियल एस्टेट की सीमाएं भी हैं। कुशल निवेशक को उन्हें भी ध्यानपूर्वक देखना चाहिए। इसमें तरलता नहीं होती। स्कूल फीस या मेडिकल इमरजेंसी में आप फ्लैट का 10 प्रतिशत हिस्सा बेच सकें, ये संभव नहीं होता। उसे बेचकर नगदी जुटाने में समय लग सकता है, कागजी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं।
संपत्ति हस्तांतरित करना भी महंगा पड़ता है। स्टांप ड्यूटी, पंजीकरण, सौदे के लेन-देन का मध्यस्थता शुल्क, कानूनी शुल्क में भी संपत्ति के कुल मूल्य की सात से दस प्रतिशत राशि लग जाती है। ये राशि पुन: प्राप्त नहीं होती। संपत्ति के मूल्य का आकलन करते समय इस राशि को हटाना चाहिए।
इसके प्रतिफल को अक्सर बढ़ा-चढ़ाकर देखा जाता है। किराये से आमदनी में भी बहुत बढ़त नहीं होती। पिछले एक दशक में अधिकांश शहरों में संपत्ति में बढ़ोत्तरी मुद्रास्फीति के अनुरूप औसत ही रही है। भूमि के दाम में दस गुणा बढ़ोतरी होने के मामले भी देखे गए हैं, लेकिन उन्हें औसत की श्रेणी से अलग रखा जाएगा।
फिर प्रश्न उठता है कि वित्तीय योजना में रियल एस्टेट का क्या स्थान है? इसका महत्व है, पर इसे संपूर्ण निवेश एक हिस्से के रूप में रखना ही उचित होगा। ये आपका संपूर्ण निवेश पोर्टफोलियो नहीं होना चाहिए। जब किसी परिवार के संपूर्ण निवेश की 80-90 प्रतिशत राशि फ्लैट में लगाई जाती है तो यह सोच-विचार का विषय है। बहुत से कुशल परामर्शदाता यही सलाह देते हैं कि संपत्ति में निवेश कुल पारिवारिक संपत्ति का 30-40 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।
अब यहां एक अन्य सवाल उठता है। मकान खरीदना उचित होगा या किराए पर रहना सही है? इसका कोई एक सही उत्तर नहीं हो सकता। ये आपके शहर, उम्र के पड़ाव, आर्थिक स्थिति और इस बात पर निर्भर करता है कि आपके लिए घर के मायने क्या हैं।
इस हफ्ते विचार करें कि आपके परिवार की कुल संपदा में से अचल संपत्ति कितने प्रतिशत है। यदि अधिकांश हिस्सा अचल संपत्ति है तो इसे आलोचना न समझें। ये जानकारी होना भी जरूरी है। कोई रणनीति बनाने से पहले यही सजगता आवश्यक है।
स्मरण रखें कि लक्ष्मी की मजबूती तब उभरती है जब वह किसी एक स्थान पर केंद्रित नहीं होती। लक्ष्मी चलायमान होती है, तभी बढ़ती है।
अगले हफ्ते- हम घर की खरीद के गणित को समझने का प्रयास करेंगे। उसकी वास्तविक कीमत क्या होती है। किराये पर निवास की कीमत का तुलनात्मक अध्ययन करेंगे।
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