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Main Hoon Apni Dhanlaxmi Part-19: उम्र के हर पड़ाव पर ऐसे बदलें निवेश की रणनीति, जानें सही मनी मैनेजमेंट टिप्स

उम्र के विभिन्न पड़ावों पर धन को लेकर अलग तरीके से सोचने की आवश्यकता होती है। 30 वर्ष की आयु में धन को लेकर आप जो दृष्टिकोण लेकर चल रही हैं वो 50 वर्ष की आयु में समान नहीं रह सकता। इसे ऐसे समझें, 30 वर्ष की आयु में आप वास्तव में किन चीजों की चाह रखेंगी? तरक्की, संभावनाएं और कुछ सार्थक जोड़ लेने की स्वाभाविक चाह होगी।
Editorial
Updated:- 2026-03-31, 13:37 IST

40 वर्ष की आयु में ये सवाल बच्चों की स्कूल फीस, होम लोन और जिम्मेदारियों पर आकर टिक जाएगा। जब 50 वर्ष की आयु में आएंगी तो आपका ध्यान इस बात पर होगा कि सेविंग्स से कब तक काम चल सकेगा। इसके बावजूद बहुत से लोग उम्र के इन तीनों महत्वपूर्ण पड़ावों से गुजरते हुए एक ही तरीके से निवेश करते रहते हैं। आरंभ में ही जिन म्यूचुअल फंड्स में निवेश कर दिया है, वे उसी प्रकार चलते रहते हैं। फिक्स्ड डिपॉजिट को छेड़ा नहीं जाता, क्योंकि वह सुरक्षित निवेश है। बाजार की मजबूती को ध्यान में रखते हुए जिन शेयर में निवेश किया था वो भी उसी प्रकार बना रहता है। जीवन भले ही धीरे-धीरे आगे बढ़ता जाता है, लेकिन विभिन्न परिसंपत्तियों में निवेश अनुपात वही रहता है।30 वर्ष की आयु में आपका समय बहुमूल्य पूंजी होता है। सेवानिवृत्ति की आयु तक पहुंचने में करीब 30-35 साल की दूरी होती है। आय में बढोत्तरी होती रहती है। यदि कोई झटका सहना पड़े तो भी संभव हो जाता है, क्योंकि आपके पास उससे उबरने का समय होता है। इस पड़ाव पर इक्विटी म्यूचुअल फंड्स और विभिन्न शेयर में निवेश आपके निवेश पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा हो सकते हैं। चक्रवृद्धि ब्याज तब काम करता है जब निवेश में अनुशासन और दीर्घ कालिक हो।

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उदाहरण के लिए यदि आपने प्रतिमाह 10 हजार रुपये का निवेश इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में करीब 25 वर्ष के लिए किया है तो एक बड़ी धनराशि तैयार हो जाएगी। अगर यही निवेश 10 वर्ष के लिए किया है तो परिपक्वता अवधि में आपको उससे बहुत अलग धनराशि मिल सकेगी। निवेश राशि समान है, पर बड़ा फर्क समयावधि के कारण आता है। अगर आप निवेश यात्रा की जल्द शुरुआत करते हैं, पर्याप्त इमरजेंसी फंड लेकर चलते हैं तो निवेश को बार-बार अन्यत्र समायोजित नहीं करना पड़ेगा। स्मरण रखें कि लगातार क्रय-विक्रय से संपत्ति नहीं बनती, बल्कि उसके लिए तो निवेश में निरंतरता आवश्यक है। 30 वर्ष की आयु में मजबूत आधार तैयार करना प्राथमिकता होती है। छह माह का इमरजेंसी फंड अलग रखने और स्वास्थ्य बीमा, उत्तरदायित्वों के निर्वहन की व्यवस्था करने के बाद जब आप इक्विटी फंड्स में निवेश करते हैं तो चक्रवृद्धि का नियम काम करता है। आयु के 40वें पड़ाव पर वित्तीय यात्रा में कई परतें होती हैं। होम लोन की ईएमआइ, बच्चों की शिक्षा का खर्च, अभिभावकों की देखभाल और जीवनशैली से जुड़ी जरूरतें एक-साथ चलती हैं। हो सकता है कि आपकी आय अच्छी हो, लेकिन जरूरतें उससे भी बड़ी हो सकती हैं। मैं 40 वर्ष की आयु वर्ग के बहुत से प्रोफेशनल्स से मिली हूं, जिनकी आय अच्छी थी, लेकिन उन्होंने ये गुणा-भाग नहीं किया था कि सेवानिवृत्ति पर उन्हें कितने धन की आवश्यकता होगी। हम हमेशा सोचते हैं कि अभी तो वक्त है। ये सच है कि वक्त होता है, पर तब भी इस विषय में गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है। इस मोड़ पर संपूर्ण इक्विटी निवेश को निकालना उचित नहीं होगा, क्योंकि सेवानिवृत्ति में अभी भी 20-25 साल शेष होते हैं। मुद्रास्फीति जारी रहेगी, दीर्घ कालिक निवेश में बढ़त की दरकार बनी रहेगी।

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हालांकि इस पड़ाव पर मानसिक स्पष्टता आवश्यक है। जो राशि आपने सेवानिवृत्ति के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में दीर्घ काल के लिए निवेश की है, उसे जारी रख सकते हैं। जिन लक्ष्यों के लिए समय अब निकट है, उन्हें ध्यान में रखते हुए जो निवेश किया है, जैसे बच्चों की शिक्षा या अन्य कोई योजनाबद्ध खर्च, उन्हें फिक्स्ड डिपॉजिट्स या डेट म्यूचुअल फंड्स में डाल सकती हैं। दीर्घ कालिक और अल्प कालिक जरूरतों के अनुसार धन को अलग रखने पर अनावश्यक तनाव से सुरक्षित रहेंगी।


आयु के 50वें पड़ाव में पहुंचने पर आपको सेवानिवृत्ति का समय दिखने लगता है, हालांकि उसमें भी समय होता है। इक्विटी निवेश आपके निवेश पोर्टफोलियो से स्वत: नहीं हट जाएगा। चूंकि सेवानिवृत्ति में अभी 10 वर्ष या अधिक समय है, इसलिए संपूर्ण राशि को फिक्स्ड डिपॉजिट्स में डालने से उस समयावधि में धन की बढ़त की संभावना समाप्त हो जाएगी।
हालांकि इसी पड़ाव पर आपको इस बारे में विचार आरंभ कर देना चाहिए कि जब सेवानिवृत्ति या काम कम हो जाएगा तो खर्चा किस प्रकार चलेगा। बहुत से निवेशक म्यूचुअल फंड्स से सिस्टेमैंटिक विद्ड्रावल प्लान (एसडब्ल्यूपी) या धन की सुनियोजित निकासी योजना पर काम आरंभ कर देते हैं। इसमें नियमित अंतराल पर थोड़ी-थोड़ी निवेश राशि निकाली जाती है, जबकि शेष धनराशि निवेशित रहती है। योजनाबद्ध तरीके से जीवन में आने वाले परिवर्तनों के साथ तालमेल बिठाने पर सेवानिवृत्ति को लेकर तनाव नहीं होता।

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उम्र के सभी तीन पड़ावों पर एक ही सिद्धांत काम करता है। निवेश राशि का आवंटन उम्र के अनुसार होना चाहिए। युवा निवेशक निवेश की शीघ्र शुरुआत को उतना महत्व नहीं देते, जबकि 50 वर्ष की आयु में कुछ लोग सोचने लगते हैं कि उन्हें इक्विटी निवेश से पूरी तरह निकल जाना चाहिए। ये तरीका योजनाबद्ध सोच का परिचायक नहीं है, बल्कि भावनाओं के आधार पर लिए गए निर्णय होते हैं।
हालांकि ऐसा कोई फार्मूला नहीं है जो सभी पर लागू हो सके। आय में स्थिरता, आश्रितों, स्वास्थ्य, लोन के अलावा बाजार के उतार-चढ़ाव को लेकर आप कितना सहज महसूस करते हैं, इस बात पर भी काफी कुछ निर्भर करता है।
अगर आप उम्र के 30वें पड़ाव पर हैं तो संपत्ति निर्माण के लिए निवेश की निरंतरता पर ध्यान दें और समय का अपना काम करने दें। जब उम्र का 40वां पड़ाव दस्तक दे तो सेवानिवृत्ति व अन्य जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए दीर्घ कालिक व अल्प कालिक निवेश को अलग करें। उम्र के 50वें दशक में पहुंचने पर निवेश को अन्य सुरक्षित विकल्पों में डालने की प्रक्रिया आरंभ कर देनी चाहिए, पर धन की बढ़त का खयाल भी रखना चाहिए।
यदि आप ये महसूस करती हैं कि निवेश की शीघ्र शुरुआत का समय बीत चुका है तो निराश न हों। उपलब्ध धन व संसाधनों के साथ आत्मविश्वास के साथ आज से ही अपनी वित्तीय यात्रा की शुरुआत करें। गर्व से कहें कि मैं हूं अपनी धनलक्ष्मी।
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