
जैसे ही इंस्टाग्राम या व्हाट्स एप खोलते हैं, वैसे ही सलाहों की बाढ़ आ जाती है। चांदी खरीदना अच्छा होगा या बेचना? बाजार में प्रवेश करना चाहिए या अलग हो जाना उचित होगा? लोग तात्कालिक निर्णय लेने को समझदारी बताते हैं। कुछ लोग बाजार के भविष्य को जानने का दावा करते हैं। ये सभी बातें देख-सुनकर मन में ये विश्वास पैदा होने लगता है कि सफल निवेश का मतलब है सही समय पर एक्शन। हालांकि सत्यता इतनी नाटकीय नहीं होती। अधिकांश दीर्घकालिक संपत्तियां सटीक टाइमिंग से निर्मित नहीं होतीं, बल्कि निवेश को कायम रखने और समय को अपना कार्य करते देते रहने से प्रतिफल मिलता है। एक सिद्धांत है कि लोग कम कीमत पर खरीदना और बढ़े हुए मूल्य पर बेचना चाहते हैं। हालांकि वास्तविकता में लोग इसके विपरीत व्यवहार करते हैं। जब बाजार गिरता है तो भय बढ़ता है। हेडलाइंस नकारात्मक हो उठती हैं।

लोग कहते हैं कि प्रतीक्षा करना उचित होगा। जब बाजार उठता है तो ये उत्साह छलक पड़ता है। हर कोई लाभ की बात करता है। खरीदारी में तेजी और बिक्री में कमी आ जाती है। ये एक पैटर्न बन जाता है। इसकी वजह बुद्धिमत्ता में कमी होना नहीं है, बल्कि लोग भावावेश में ऐसा कर जाते हैं। निवेश में जो रिटर्न मिलता है और एक निवेशक जो वास्तविक रिटर्न अर्जित करता है, उनके बीच काफी अंतर होता है। ये अंतर कीमतें घटने के भय से की गई बिक्री, उत्साह में खरीद व बाजार के अन्य कारणों से होता है। दो लोग समान निवेश करते हैं, लेकिन संभव है कि उन्हें प्रतिफल काफी अलग मिले, क्योंकि एक व्यक्ति धैर्य बनाए रखता है, जबकि दूसरा भावावेश में निर्णय लेता है। यही वजह है कि बाजार की टाइमिंग से कहीं अधिक मायने रखता है बाजार में निवेश के साथ लगाया गया समय। जब आप बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेश में स्थिरता रखते हैं तो चक्रवृद्धि ब्याज लगने के साथ उसकी राशि बढ़ती ही है। चक्रवृद्धि धन को लेकर बहुत उत्साहित होने जैसा कुछ नहीं है। इसकी गति धीमी, किंतु बढ़त सतत होती है। इससे लाभ चाहते हैं तो निवेश करके छोड़ दें।
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जब आप बार-बार क्रय-विक्रय करते हैं तो बढ़त की प्रक्रिया को बाधित करते हैं। मूल्य में गिरावट की वजह से जब आप बेचते हैं तो धन की पुनर्प्राप्ति की संभावना को समाप्त कर देते हैं। मूल्य में तात्कालिक गिरावट स्थायी हानि में बदल जाती है। सोने को ही लें, उसका मूल्य बढ़ता देख बहुत से लोग अतिउत्साह में उसकी खरीद कर लेते हैं। फिर जब लंबे समय तक उसका मूल्य स्थिर रहता है, तो उनका धैर्य जवाब देने लगता है। लंबे समय तक निवेश के बाद कुछ लोग निराशा में उसे बेच देते हैं, पर बाद में उसके दाम बढ़ जाते हैं। यहां खरीद की टाइमिंग से लाभ नहीं होता, बल्कि निवेश के साथ लंबा समय देने पर लाभ मिल पाता है।
ये सबक महिलाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। महिलाओं की नैसर्गिक प्रवृत्ति होती है कि वे चीजों को पहले ही भांप लेती हैं। घर का प्रबंधन, प्राथमिकताओं में संतुलन बिठाते हुए वे दीर्घकालिक योजनाएं बनाती हैं, लेकिन जब धन की बात आती है, तो उन्हें सलाहें मिलने लगती हैं, लोग सवाल पूछते हैं तो कुछ लोग तत्काल कुछ निर्णय लेने के लिए कहते हैं। इन वजहों से कई बार स्वयं पर संदेह होने लगता है। जब सधी हुई चाल रखने की आवश्यकता होती है, तो झिझक उत्पन्न होती है। जब शांत रहना चाहिए तब प्रतिक्रिया देने लगते हैं। अध्ययन बताते हैं कि जो निवेशक धैर्य रखते हैं और बार-बार क्रय-विक्रय से बचते हैं, उन्हें कालांतर में अधिक लाभ होता है। इसकी वजह ये नहीं कि उन्हें अधिक जानकारी होती है, बल्कि धैर्य है। हालांकि इसका ये अर्थ नहीं कि आप अपने निवेश की समीक्षा न करें। बस जरूरत इस बात की है कि हर हेडलाइन पर प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए।
भावावेश में निर्णय लेने से बचने के कुछ सरल तरीके हो सकते हैं। किसी लक्ष्य के साथ निवेश करें। जब आपको अपना उद्देश्य पता होगा तो तात्कालिक शोर-शराबे के प्रभावों से बचना आसान होगा। दूसरा तरीका है, नियमित निवेश जैसे एसआइपी। इसमें आप टाइमिंग के दबाव से बचते हैं और एक अनुशासन बनता है। तीसरा, विभिन्न संपत्तियों में निवेश, इसका लाभ ये होगा कि किसी एक के मूल्य में तात्कालिक गिरावट से ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।

सबसे महत्वपूर्ण है स्वीकारोक्ति। बाजार तो उठेगा और गिरेगा। ये तो आपकी यात्रा का हिस्सा है। वास्तविक सवाल ये नहीं कि बाजार में हलचल होगी या नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण है कि आप किस प्रकार प्रतिक्रिया देती हैं।
इस हफ्ते मैं चाहती हूं कि आप स्वयं को ऑब्ज़र्व करें। ये देखें कि बाजार से जुड़ी खबरें आपको किस प्रकार प्रभावित करती हैं। क्या उससे तनाव उत्पन्न होता है, आप तत्काल निर्णय का दबाव महसूस करती हैं? स्वयं को संयमित रखने के लिए आप क्या तरीके अपनाती हैं? क्या दीर्घकालिक लक्ष्य संयम रखने में मदद करते हैं? कीमतों को बार-बार चेक करने की प्रवृत्ति पर नियंत्रण करती हैं और स्वयं को याद दिलाती हैं कि आपने निवेश क्यों किया है।
अगले हफ्ते हम बात करें कि विभिन्न संपत्तियों में धन का सोच-विचारकर निवेश क्यों इतना जरूरी है। किस तरह इससे आपको भविष्य की अनिश्चिचतता से सुरक्षा कवच मिलता है।
स्मरण रखें कि संपत्ति किसी एक क्षण में लिए गए निर्णय से नहीं बढ़ती, बल्कि विश्वास और धैर्य के साथ बढ़ती है।
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