
पिछले कुछ हफ्तों में बहुत लोगों ने मुझे लिखा कि अब हम अर्थ की समझ को लेकर थोड़ा आगे बढ़ना चाहते हैं। बचत, इंश्योरेंस, इमरजेंसी फंड, लोन और म्यूचुअल फंड्स के विषय में आप जानकारी प्राप्त कर चुकी हैं, अब शेयर बाजार के प्रति जिज्ञासा बढ़ती है। इसके विषय में अक्सर लोग बातें करते हैं। टेलीविजन, व्हाट्स एप ग्रुप और फैमिली डिनर पर इस पर चर्चाएं होती हैं, इसके बावजूद बहुत सी महिलाएं इसे लेकर जानकारी का अभाव महसूस करती हैं।
शेयर बाजार वह प्लेटफार्म है, जहां कंपनियों का स्वामित्व खरीदा और बेचा जाता है। जब कोई कंपनी आगे बढ़ना चाहती है, तो उसे धन की आवश्यकता होती है। हो सकता है कि इस धन की आवश्यकता नई फैक्ट्री खोलने, नए शहरों में विस्तार करने, नई प्रौद्योगिकी में निवेश या लोन की अदायगी के लिए हो। इसके लिए बैंकों से ऋण लेने के बजाय कंपनियां शेयर के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी बेचकर धन जुटाने का विकल्प अपनाती हैं। इस तरह कंपनियां सार्वजनिक क्षेत्र (पब्लिक) की बनती हैं। वह अपनी हिस्सेदारी को छोटे हिस्सों यानी शेयरों में बांटकर विक्रय के लिए आम लोगों को उपलब्ध कराती है। कोई भी व्यक्ति ये शेयर खरीदकर कंपनी में हिस्सेदारी प्राप्त कर सकता है।
अब सवाल उठता है कि कोई भी व्यक्ति शेयर क्यों खरीदना चाहेगा। इसके दो मुख्य कारण हैं।
पहला, यदि कंपनी व्यवसाय में अच्छा प्रदर्शन करती है और लाभ कमाती है तो आपको फायदा होगा। कुछ कंपनियां अपने लाभ को लाभांश के रूप में शेयरधारकों के साथ साझा करती हैं। जब आप किसी सोच या आइडिया पर विश्वास करते हैं तो ये उसका सुखद प्रतिफल होता है।
दूसरा, यदि कंपनी तरक्की करती है और समय के साथ उसका मूल्य बढ़ता है, तो अधिक संख्या में लोग उसके साथ जुड़ना चाहेंगे। जब मांग बढ़ेगी तो शेयर का मूल्य भी बढ़ेगा। जब आप बढ़ी हुई कीमत पर शेयर बेचते हैं तो मुनाफा होता है।

यहां कई और सवाल उत्पन्न होते हैं। कोई और बढ़े हुए मूल्य पर आपसे शेयर क्यों खरीदना चाहेगा। इसका उत्तर है कि ये विश्वास की बात है। लोगों को यह विश्वास होता है कि कंपनी तरक्की करेगी। अतीत के मुकाबले उसका भविष्य बेहतर है। शेयर बाजार व्यवसाय की बेहतर संभावनाओं के इसी विश्वास पर काम करता है।
जब मोबाइल एप या आनलाइन ट्रेडिंग नहीं थी तब वास्तविक बाजार में शेयरों का क्रय-विक्रय होता था। भीड़ से खचाखच भरे हाल में ब्रोकर चिल्लाकर बोली लगाते थे। आमने-सामने व्यवसाय हुआ करता था। आजकल सबकुछ शांतिपूर्वक आनलाइन स्क्रीन पर तय होता है। एक क्लिक पर सौदा होता है।
भारत में ये ट्रेडिंग मुख्यत: दो एक्सचेंज में होती है- नेशनल स्टाक एक्सचेंज(NSE) और बांबे स्टाक एक्सचेंज(BSE)। ये एक्सचेंज खरीदारों और विक्रेताओं को मंच प्रदान कराते हैं। शेयर के मूल्य मांग व आपूर्ति, कंपनी के परिणामों, खबरों और अपेक्षाओं के आधार पर बदलते हैं।
अब एक व्यावहारिक सवाल आता है। आपके शेयर कहां रहते हैं। ज्वेलरी और संपत्ति के कागजातों से अलग शेयर फिजीकली नहीं होते। इन्हें डीमैट अकाउंट में इलेक्ट्रानिक तरीके से रखा जाता है। इसे आप अपने निवेश का डिजिटल लाकर की तरह समझें। जैसे बैंक अकाउंट में आपका धन होता है, वैसे ही डीमैट अकाउंट में आपके शेयर्स रखे जाते हैं। जब आप कोई शेयर खरीदते हैं तो वो आपके डीमैट अकाउंट में क्रेडिट हो जाते हैं। जब बेचते हैं तो वे डेबिट हो जाते हैं। शेयर के क्रय-विक्रय व निवेश की यह व्यवस्था त्वरित, सुरक्षित और पारदर्शी है।
बहुत सी महिलाएं कहती हैं कि वे शेयर में सीधे निवेश करना चाहती हैं। ये रुचि उत्साहजनक है, पर इसके साथ जिम्मेदारी भी आती है। सीधे निवेश में समय, धैर्य और परिश्रम की आवश्यकता होती है। आपको व्यवसाय की समझ होनी चाहिए। अर्थ से जुड़ी खबरों को पढ़ना, कंपनियों के परफारमेंस और घटनाक्रम पर नजर रखना आवश्यक है। शेयरों के मूल्य बढ़ते हैं, लेकिन यदि कंपनी की स्थिति डांवाडोल हो तो तेजी से नीचे भी आते हैं।
इसलिए सोच-विचारकर आगे बढ़ें। हर कंपनी का ट्रैक रिकार्ड रखना मुश्किल होता है, किंतु यदि आप शेयर बाजार को समझना चाहती हैं तो इसका सरल तरीका है म्यूचुअल फंड्स। बाजार विशेषज्ञ गहन शोध के बाद म्यूचुअल फंड्स की राशि के निवेश के लिए कंपनियों का चयन करते हैं। ये समझना चाहिए कि शेयर बाजार कोई जुआ नहीं है। यह व्यवसाय में भागीदारी है। मूल्यों में उतार-चढ़ाव कंपनी के प्रति बदलती अपेक्षाओं को प्रतिबिंबित करते हैं।
इस हफ्ते टास्क सरल है। आपको तुछ खरीदना नहीं है। अर्थ से जुड़ा कोई अखबार या एप खोलें। जिन कंपनियों का जिक्र सुना या पढ़ा हो उनसे जुड़ी खबरों पर नजर डालें, ये देखें कि वे क्या कर रही हैं। धीरे-धीरे बाजार के विषय में समझ बढ़ती प्रतीत होगी।
अगले हफ्ते हम समझने का प्रयास करेंगे कि निवेशक किस तरह सोचते हैं। किस प्रकार अपना निवेश पोर्टफोलियो बनाएं जो आपके लक्ष्य और परिस्थितियों के अनुकूल हो। स्मरण रखें लक्ष्मी बाजार के पीछे नहीं भागती, वह तो जागरूकता, जिज्ञासा और शांत भाव से पूर्ण विश्वास के साथ अपना मार्ग बनाती है।
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