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Main Hoon Apni Dhanlaxmi: चांदी की कीमतों में क्यों आ रहा है उछाल, क्या यह निवेश का सही विकल्प है?

नववर्ष पर हम सेहत और रिश्तों को बेहतर बनाने के संकल्प तो लेते हैं, लेकिन आर्थिक समझ को मजबूत करने का संकल्प अक्सर छूट जाता है। बीते वर्ष चांदी की कीमतों में आई जबरदस्त तेजी ने निवेश को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। इस लेख में जानिए चांदी के चमकने के पीछे की असली वजह और महिलाओं के लिए इसमें निवेश कितना और कैसे सही है।
Editorial
Updated:- 2026-01-06, 12:37 IST

नववर्ष पर जीवन को बेहतर बनाने के लिए सबसे जरूरी संकल्प है धन से जुड़े मामलों की बेहतर समझ विकसित करना। विगत वर्ष चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल ने सभी को अचंभित किया। इसमें निवेश की दिशा में आगे बढ़ें,   उससे पहले इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझना जरूरी है। इस विषय में विस्तार से बता रही हैं डॉ. आरती गुप्ता...  

सभी को नववर्ष की शुभकामनाएं। नववर्ष पर हम कुछ संकल्प लेते हैं। स्वयं से वादा करते हैं कि अपनी व परिवार की सेहत का ख्याल रखेंगे,  पर बहुत सी महिलाएं एक जरूरी संकल्प लेना भूल जाती हैं। ये संकल्प है धन से जुड़े मामलों की बेहतर समझ विकसित करने का। यदि आप शुरुआत से ही इस स्तंभ की नियमित पाठक हैं तो भलीभांति अवगत होंगी कि हर हफ्ते हम व्यावहारिक व सरल तरीके से धन के विषय में चर्चा करते हैं। जटिल शब्दों में उलझने के बजाय बचत, निवेश इत्यादि पर हमने सहज भाव से बात की। अगर आप पहली बार इस स्तंभ को पहली बार पढ़ रही हैं तो स्वागत है। धन को लेकर समझदारी विकसित करने में रातों रात विशेषज्ञ बनने जैसा कुछ नहीं है। इसका उद्देश्य तो आत्मविश्वास जगाना है, ताकि आप अर्थ से जुड़े निर्णय ले सकें। धन को समझना इस वर्ष आपके जीवन का संकल्प होना चाहिए।  

चांदी की बढ़ती कीमतें 

हम 2026  में कदम रख रहे हैं,  मैं चाहूंगी कि हम निवेश के विकल्प चांदी पर बात करें। वर्ष 2025 में चांदी की जितनी चर्चा रही,  इतनी सोने की नहीं हुई।  

आप पाठिकाओं में बहुत ने मुझसे एक सा सवाल किया कि चांदी के दाम इतनी तेजी से क्यों बढ़े?   ये उत्सुकता अच्छा संकेत है। इससे पता चलता है कि महिलाएं सिर्फ संपत्ति के स्वामित्व में नहीं बल्कि उनके विषय में समझने में रुचि ले रही हैं। इस क्रम में ये समझने का प्रयास करते हैं कि वास्तव में चांदी क्या है?  

चांदी एक उत्पाद है। ये शेयर्स या म्यूचुअल फंड्स से अलग है। इसका संबंध व्यवसाय में स्वामित्व से नहीं है। इससे कोई लाभ या साल दर साल चक्रवृद्धि ब्याज नहीं मिलता। इसका दाम मुख्यत: मांग व आपूर्ति की वजह से ऊपर-नीचे होता है। जब आपूर्ति की तुलना में मांग तेजी से बढ़ती है तो मूल्य बढ़ता है। जब मांग में कमी आती है या आपूर्ति बढ़ जाती है तो मूल्य घटने लगता है। भारतीय घरों में त्योहार के अवसर पर या उपहार देने के लिए हम चांदी खरीदते हैं। यह सोच गलत नहीं था। पीढ़ी दर पीढ़ी चांदी को संभालकर रखने पर जोर दिया गया,   पर आज इसे एक अन्य दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है।  

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सिल्वर एक औद्योगिक धातु भी है। इसे सोलर पैनल्स, इलेक्ट्रिक वाहनों,   इलेक्ट्रानिक्स,   चिकित्सीय उपकरणों और कई प्रौद्योगिकी में इस्तेमाल किया जाता है। चांदी की सर्वाधिक मांग मुख्यत: औद्योगिक क्षेत्र में निर्मित होती है। जिस तरह विश्व क्लीन एनर्जी और प्रौद्योगिकी की ओर तेजी से मुड़ रहा है,   उसी गति से चांदी की मांग भी बढ़ रही है,   जबकि चांदी की आपूर्ति सीमित है। चांदी का खनन आसानी से नहीं बढ़ाया जा सकता। चांदी की नई खदानें विकसित करने में कई वर्ष लगते हैं। रीसाइक्लिंग से मदद मिलती है,   लेकिन इससे बढ़ती मांग को पूरा नहीं किया जा सकता। मांग और आपूर्ति के मध्य यही अंतर हाल के दिनों में चांदी की कीमतों में उछाल का मुख्य कारण है।  

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चांदी की कीमतों के लिए क्या कहते हैं आंकड़े 

अब आंकड़ों को समझने का प्रयास करते हैं। भारत में वर्ष 2025 की शुरुआत में प्रति किलोग्राम चांदी का मूल्य 87   हजार से 90   हजार रहा,   जबकि दिसंबर के अंत में प्रति किलोग्राम चांदी का मूल्य ढाई लाख पहुंच गया?   मात्र एक साल के भीतर मूल्य में 180-190   प्रतिशत की ये बढ़त ऐतिहासिक थी। इसी वजह से लोगों को ये लगने लगा कि चांदी खरीदना लाभकारी है। हालांकि इतिहास में एक महत्वपूर्ण सबक छिपा है। चांदी में उतार-चढ़ाव आता है भारत में 25 अप्रैल 2011 में चांदी ने प्रति किलोग्राम 75   हजार मूल्य को स्पर्श किया था। इस मूल्य वृद्धि के बाद दाम तेजी से घटे और कई वर्ष तक यही कमजोर स्थिति कायम रही। वर्ष 2023   में बदलाव दर्ज किया गया। चांदी को मजबूती मिली और इसका मूल्य प्रति किलोग्राम 75   हजार रुपये को पार कर गया। यानी स्पष्ट है कि जिन लोगों ने मूल्य वृद्धि को देखकर अप्रैल 2011   में चांदी खरीदी होगी,   उन्हें लगभग 12   सालों तक इसे लेकर मायूसी रही होगी। यही सजगता वाली बातें प्रत्येक निवेशक को ध्यान में रखनी चाहिए। चांदी की कीमतें नाटकीय तरीके से बढ़ती हैं,   पर ये लंबे समय तक आपके धैर्य की परीक्षा भी लेती है। यह सधा हुआ निवेश नहीं है। इसके अच्छे परिणाम उसी को मिलते हैं जो यथार्थ के साथ तालमेल बनाकर चलते हैं,   ना कि उन्हें जो अति उत्साह में निर्णय लेते हैं।  

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क्या चांदी संपत्ति जोड़ने का नया विकल्प है?  

ईमानदारी से इसका उत्तर नहीं में है। चांदी का मूल्य अवश्य है,  पर इसे मुख्यत: संपत्ति मानकर जोड़ना ठीक नहीं होगा। ये इक्विटी,   म्यूचुअल फंड्स या दीर्घकालिक निवेश का विकल्प नहीं है। इससे धन की बढ़त नहीं होती। इसके साथ कोई चक्रवृद्धि ब्याज नहीं जुड़ता। इसका मूल्य बना रहता है और ग्लोबल ट्रेंड्स से कुछ लाभ हो सकता है,   पर इसमें निवेश आपके पोर्टफोलियो में अन्य विकल्पों पर हावी नहीं होना चाहिए। धन से जुड़ी अपनी कहानी में चांदी को नायक के बजाय सहायक के तौर पर देखें। भारतीय महिलाएं इस सच को भली प्रकार समझती हैं। दशकों तक ये देखा गया कि भारतीय घरों में चांदी की खरीद का उद्देश्य लाभ के लिए नहीं था। हां, चांदी को लंबे समय तक संभालकर रखने का भाव अवश्य रहा। यही वजह है कि कई घरों में चांदी भी उनकी मजबूती का आधार बन गई।  
वास्तविक चांदी के साथ एक प्रकार का भावनात्मक जुड़ाव होता है,   लेकिन इसके साथ ही उसे सुरक्षित रखने और आवश्यकता पड़ने पर सही मूल्य पर बेचने की चुनौती भी होती है। ऐसे में निवेश के सही विकल्प जैसे सिल्वर ईटीएफ और सिल्वर म्यूचुअल फंड्स अपनाने पर उसे सुरक्षित रखने की चिंताओं से मुक्ति मिल जाती है। कुछ में आपको एसआईपी के समान ही नियमित निवेश की सुविधा मिल जाती है।  
यहां एक महत्वपूर्ण बात को ध्यान में रखना आवश्यक है। भारतीय नियामकों ने निवेशकों को एप्स के माध्यम से बेचे जाने वाले डिजिटल गोल्ड और सिल्वर उत्पादों को लेकर आगाह किया है। म्यूचुअल फंड्स या ईटीएफ की भांति इस क्रय-विक्रय की निगरानी नहीं की जाती। सरल शब्दों में कहें तो यह स्पष्ट नहीं होता कि किस नियामक संस्था के तरह ये व्यापार हो रहा है और किस प्रकार आपका निवेश सुरक्षित है,   इसलिए इन सबसे दूर रहना ही उचित है।  
नए साल में जब आप प्रवेश कर रही हैं तो सवाल ये नहीं है कि चांदी की कीमतें बढ़ेंगी या घटेंगी। आपको सरल सा ये सवाल पूछना चाहिए कि क्या चांदी मेरी आर्थिक यात्रा में सहायक होगी,   कितनी मात्रा में क्रय करना उचित होगा। स्मरण रखें कि लक्ष्मी वहीं बढ़ती हैं,   जहां आर्थिक निर्णयों में समझदारी होती है।  

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