
अपने घर के विषय में एक क्षण सोचें। सामान्यतः: प्रत्येक भारतीय घर में दरवाजे में बंद रखी एक इंश्योरेंस पॉलिसी अवश्य होती है। कुछ घरों में इसकी संख्या पांच या दस भी हो सकती है। कई पालिसी ऐसी भी हो सकती हैं , जिन्हें इसलिए खरीदा गया , क्योंकि पड़ोसी या परिचित ने ऐसा करने की सलाह दी थी या फिर किसी एजेंट ने उसके फायदे गिनाते हुए ये कहा कि उसे खरीदने की तिथि अंतिम है। बहुत से घरों में पालिसी साल दर साल रिन्यू होती रहती है , बिना ये पड़ताल किए कि उनमें क्या कवर होता है। ये जानकर आप आश्चर्य करेंगे कि बहुत सी महिलाओं ने मुझे ये बताया कि हां , पालिसी तो है , पर क्या कवर होता है ये पता नहीं। ये स्थिति इसलिए नहीं है कि हम अक्षम हैं , बल्कि इसलिए है क्योंकि हमारे देश में उनके बारे में विस्तार से बताया नहीं जाता। हालांकि जब इस यात्रा में हम और आप साथ हैं तो हमें इस विषय में भी भली प्रकार समझना चाहिए। इंश्योरेंस महज एक उत्पाद नहीं है , ये एक सुरक्षा है , सुरक्षा तभी काम करती है , जब हमें ये पता हो कि हमें किन चीजों से सुरक्षा मिलेगी। सरल शब्दों में इंश्योरेंस से आशय जोखिम को स्थानांतरित करना है। यदि कुछ गलत हुआ तो आपके स्थान पर कोई और उस जोखिम का वित्तीय खर्च उठाएगा। मुख्यत: दो प्रकार के खतरे होते हैं , जो परिवार की नींव हिला सकते हैं , वो हैं बीमारी या मृत्यु। यही वजह है कि प्रत्येक महिला को हेल्थ इंश्योरेंस और लाइफ इंश्योरेंस के बारे में जानना-समझना चाहिए।
शुरुआत करते हैं हेल्थ इंश्योरेंस (स्वास्थ्य बीमा) से। भारत में मेडिकल खर्च अन्य खर्चों के मुकाबले अधिक तेजी से बढ़ रहा है। एक छोटी सी सर्जरी का खर्च भी हजारों में पहुंच सकता है। अस्पताल में भर्ती होने का खर्च तो लाखों में पहुंच सकता है। जो परिवार ऐसी अप्रत्याशित मुश्किल परिस्थितियों के लिए धन बचाकर रखते हैं ,उनके लिए भी तेजी से बढ़ते मेडिकल बिल का भुगतान करना कठिन हो सकता है। हेल्थ इंश्योरेंस आपको ऐसी परिस्थितियों में प्रभावित होने से बचाता है। इससे अस्पताल में भर्ती , जांच ,दवाइयों और अस्पताल में भर्ती होने से पहले व डिस्चार्ज होने के बाद के खर्च का भुगतान होता है।

अस्पताल के रूम के खर्च की सीमा , क्योंकि यदि आप पॉलिसी की खर्च सीमा से अधिक महंगे रूम का चयन करती हैं तो जो अतिरिक्त खर्च आएगा वह आपको स्वयं वहन करना पड़ेगा। पूर्व शर्तों को पूरा करने के वेटिंग पीरियड पर ध्यान दें। जिन चीजों को पालिसी से बाहर रखा गया है , उन्हें ध्यान से पढ़ें। हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में खर्च अदायगी की जो सीमा तय की गई है , क्या वह वर्तमान में मेडिकल बिलों के भुगतान के लिए पर्याप्त है। पांच लाख की पालिसी देखने में पर्याप्त लग सकती है , लेकिन बहुत से शहरों में यह काफी नहीं है। हेल्थ इंश्योरेंस विलासिता नहीं है , बल्कि यह बीमारी की स्थिति में लंबे चौड़े मेडिकल बिल में आपकी सारी जमा पूंजी को स्वाहा होने से बचाता है।
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अब बात करेंगे लाइफ इंश्योरेंस की। यहां पर भ्रम की स्थिति बहुत ज्यादा है। बहुत से परिवार लाइफ इंश्योरेंस को निवेश की तरह देखते हैं। कोई मित्र को हमने कहते सुना कि इसमें बोनस मिलता है , तो वहीं एजेंट बताते हैं कि ये पालिसी रिटायरमेंट के लिए परफेक्ट है। कोई यह कहता दिखेगा कि इसमें पैसा डबल हो जाएगा। पर यहां स्वयं से एक सरल सवाल पूछें। इस धन का उद्देश्य क्या है। क्या ये धन इसलिए है कि यदि आपको कुछ हो जाए तो परिवार के काम आएगा। या फिर इससे धन की बढ़त के विषय में सोचती हैं। ये समझना होगा कि इससे दोनों उद्देश्य हल नहीं हो सकते। इंश्योरेंस एक छतरी की तरह है , जबकि निवेश आपके सुख-समृद्धि व जीवन को उन्नत बनाने के एक उपकरण की भांति है। एक छतरी के साथ आप बहुत लंबी यात्रा नहीं कर सकतीं , पर यह आपको मुश्किलों की बारिश से सुरक्षा दे सकती है। जब हम दोनों को मिला देते हैं तो उसका खर्च बहुत बढ़ जाता है , जबकि उससे ना तो मजबूत सुरक्षा मिलती है और ना ही धन तेजी से बढ़ता है।

लाइफ इंश्योरेंस का सबसे प्रभावी विकल्प है टर्म इंश्योरेंस। यह सरल और किफायती है। इसमें आपको एक छोटा प्रीमियम या किस्त देनी पड़ती है , सामान्यतः: इसका खर्च सालाना कुछ हजार रुपये का होता है। यदि आपको कुछ हो जाए तो उसके बदले में आपके परिवार को बड़ी सुरक्षा मिलती है। इसमें कोई बोनस या रिटर्न नहीं होता। यह विशुद्ध रूप से किसी अनहोनी की स्थिति में परिवार की सुरक्षा के लिए है। लाइफ इंश्योरेंस का यह वास्तविक उद्देश्य होना चाहिए।
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आपने यूलिप के बारे में संभवत: सुना होगा , ये बाजार से जुड़ी पालिसी होती हैं जिसमें इंश्योरेंस और निवेश दोनों शामिल रहता है। ये विकल्प सहज-सरल व आकर्षक लगता है , लेकिन इसका खर्च अधिक हो सकता है। महिलाओं के लिए किफायती और सहज उपाय है टर्म इंश्योरेंस पालिसी। इसे लेने के बाद वे एसआईपी के माध्यम से म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकती हैं। एक पालिसी से आपको सुरक्षा मिलेगी , जबकि दूसरी से आपका धन बढ़ेगा। इससे आप अपने लक्ष्य की ओर बेहतर तरीके से बढ़ पाएंगी।
इस हफ्ते मैं चाहूंगी कि आप एक महत्वपूर्ण कदम उठाएं। आपके पिता , पति या आपने स्वयं जो भी पॉलिसी ली है ,उसे निकालें। पालिसी के प्रथम दो पृष्ठों को पढ़ें। बीमा राशि , नामिनी , प्रीमियम और वह पालिसी किन चीजों को कवर करती है , उसे लिखें। आपको विशेषज्ञ बनने की आवश्यकता नहीं है , बस सजग होने की जरूरत है।
यदि आपके मन में कोई सवाल हैं तो आप हमारी ईमेल आईडी [email protected] पर बेहिचक लिख सकती हैं। उनके विषय में हम भावी स्तंभों में सुझावों के साथ विस्तृत चर्चा कर सकते हैं।
भले ही इंश्योरेंस का विचार आकर्षित न करे , लेकिन इसके माध्यम से आपका भविष्य व वित्तीय योजनाएं सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ती हैं। लक्ष्मी का वास उस घर में होता है , जहां बुद्धिमत्ता के साथ सुरक्षा उपायों को अपनाने का भाव होता है।
अगले हफ्ते , हम बात करें उन सुरक्षाओं की , जिसकी आवश्यकता प्रत्येक स्त्री को होती है। चरणबद्ध तरीके से किस प्रकार आप आपात स्थितियों के लिए धन जोड़ सकती हैं।
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