
पिछले कुछ हफ्तों में हमने बैंक अकाउंट पर वास्तविक नियंत्रण, एसआईपी, इंश्योरेंस और इमरजेंसी फंड जैसे विषयों पर बात की। आपके ईमेल प्राप्त हुए जिनमें आपने बताया कि इस कालम ने आपके भीतर आत्मविश्वास जगाया। कुछ ने बताया कि कैसे आपने अपनी पहली एसआईपी शुरू की, पहली बार घर पर इंश्योरेंस ओर इमरजेंसी फंड को लेकर सवाल किए। ये सब जानकर मुझे भी खुशी हुई। स्मरण रखें कि बदलाव के लिए बड़े कदमों की आवश्यकता नहीं होती, इसकी शुरुआत के लिए तो हल्का धक्का ही पर्याप्त है।
वित्तीय समझ बढ़ाने की इस यात्रा में जब हम और आप साथ हैं तो ऋण से जुड़े विभिन्न पहलुओं के बारे में जानना चाहिए। लगभग प्रत्येक घर में ऋण को लेकर बातचीत अवश्य होती है। कुछ परिवारों में होम लोन की ईएमआई, क्रेडिट कार्ड का बिल एक नियत तिथि पर अदा होता रहता है। मुश्किल समय में गोल्ड लोन भी बाध्यता बन जाता है। धन की ये व्यवस्था किटी की भांति है, जरूरत के समय वहां से धनराशि लेने के बाद धीरे-धीरे उसकी अदायगी की जाती है। वास्तव में देखें तो कोई लोन अपने आप में सही या गलत नहीं होता। यह एक उपकरण की तरह है। यदि सोच-विचार कर इसका इस्तेमाल करती हैं तो ये आपको आगे बढ़ाने में सहायक साबित हो सकता है, लेकिन यदि इसे लेकर स्पष्टता नहीं है तो कालांतर में यह बोझ बन जाता है।

ऋण कई प्रकार के होते हैं, उनके बीच का भेद समझना चाहिए। होम लोन दीर्घकालिक होते हैं और उन पर ब्याज दर कम होती है। इसकी मदद से आप संपत्ति जोड़ सकती हैं। एजुकेशन लोन से आपके भविष्य का निर्माण होता है, आप कमाने की योग्यता अर्जित करते हैं। बिजनेस लोन आय बढ़ाने का जरिया बनता है। जब योजनानुसार ऋण लेती हैं तो ये आपके लक्ष्य में साधक बनते हैं।
इसके बाद पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड आते हैं। ये त्वरित मिलते हैं, लेकिन इनकी बड़ी कीमत अदा करनी पड़ती है। ब्याज दर अधिक होती है और अदायगी में देरी तनाव बढ़ा सकती है। आपात स्थिति में गोल्ड लोन से मदद मिलती है, लेकिन अदायगी में विलंब से मूल्यवान ज्वेलरी खोने का खतरा भी रहता है।
कोई भी लोन लेने से पहले मैं चाहती हूं कि आप कुछ क्षण रुककर कुछ सामान्य बातों पर विचार करें। पांच सवाल आपको भविष्य के तनाव से बचा सकते हैं।

प्रथम- मैं यह लोन क्यों ले रही हूं। क्या इसकी सहायता से मैं कुछ बड़ा जोड़ सकती हूं या यह दैनंदिन खर्चों को व्यवस्थित करने के लिए है?
द्वितीय - क्या मैं अपने जरूरी खर्चों में कटौती व अपने इमरजेंसी फंड को डिस्टर्ब किए बिना उसकी ईएमआई प्रतिमाह अदा कर सकती हूं।
तृतीय- इस लोन की वास्तविक कीमत क्या है? केवल ईएमआई की बात नहीं, बड़ा सवाल है कि क्या मैं लोन की पूरी राशि समय पर अदा कर पाउंगी।
चतुर्थ- ब्याज दर क्या है? क्या यह फिक्स्ड है या फ्लोटिंग? बहुत से लोगों को ये बात नहीं पता होती कि ब्याज दर को लेकर भी आप मोल-भाव कर सकती हैं, खासकर तब जब आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा हो, बैंकिंग रिलेशन हों या फिर विभिन्न विकल्प भी होते हैं। ब्याज दर को लेकर मोल भाव करने में संकोच न करें।
पांचवा- अगर ईएमआई अदा करने में चूक गए तो क्या होगा? उसकी पेनाल्टी क्या होगी, क्रेडिट स्कोर पर क्या असर पड़ेगा? ऋणदाता मुश्किल समय में आपके प्रति कितना लचीला दृष्टिकोण रखता है?
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क्रेडिट कार्ड को ठीक तरीके से समझना चाहिए। अक्सर लोग इनके विषय में पूरी तरह समझे बिना ही ले लेते है। क्रेडिट कार्ड अतिरिक्त आय नहीं है। ये उधार ली गई राशि होती है। न्यूनतम राशि अदा करने में कोई जोखिम नहीं रहता लेकिन इसका ब्याज तेजी से बढ़ता है। यहां एक सरल नियम काम करता है। अपने क्रेडिट कार्ड को डेबिट कार्ड की तरह इस्तेमाल करें। जितना धन हो उतना ही खर्च करें और प्रतिमाह पूरा बिल अदा कर दें।
अब बात करते हैं आपकी क्रेडिट हिस्ट्री की। बहुत सी महिलाओं को लोन लेने में दिक्कत आती है, इसकी वजह गैर जिम्मेदार होना नहीं है, बल्कि उनके नाम पर कोई क्रेडिट रिकार्ड नहीं होता। संपत्तियां सामान्यत: उनके नाम पर रजिस्टर्ड नहीं होती। प्राय: ईएमआई किसी और के अकाउंट से अदा की जाती है। रोजमर्रा की जरूरी सुविधाओं के बिल उनके नाम पर नहीं होते। इसका परिणाम ये होता है कि उनकी आर्थिक विश्वसनीयता को जांचने का कोई तरीका नहीं होता। इस परिस्थिति को आप धीरे-धीरे बदल सकती हैं। ये सुनिश्चित करें कि कोई एक नियमित बिल आपके नाम पर हो, जैसे फोन, ब्रॉडबैंड या बिजली का बिल। अपने नाम पर क्रेडिट कार्ड लें और समय पर भुगतान करें। इन सरल तरीकों से आपका क्रेडिट स्कोर निर्मित होगा और भविष्य में ऋण लेना आसान हो जाएगा।

एक महत्वपूर्ण बात प्रत्येक महिला को याद रखनी चाहिए। यदि लोन आपके नाम पर न हो तो भी वह आपको प्रभावित कर सकता है। घरेलू लोन आपके घर को प्रभावित कर सकते हैं। आपको ब्याज दरों, समय सीमा, रीपेमेंट की कुल राशि और जोखिमों के बारे में जानने का अधिकार है। सवाल पूछना दखलंदाजी करना नहीं है, बल्कि ये जिम्मेदारी से जुड़ा विषय है।
इस हफ्ते, अपनी नोटबुक उठाएं और घर-परिवार के सभी लोन और क्रेडिट के बारे में लिखें जैसे होम लोन, पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड, गोल्ड लोन। उनकी ईएमआई, ब्याज दर और अवधि। अपनी क्रेडिट हिस्ट्री को चेक करें। लोन से आपकी मुश्किलें आसान होती हैं, पर उसका उद्देश्य स्पष्ट और अदायगी समय पर होनी चाहिए।
अगले हफ्ते हम बात करेंगे शेयर बाजार की। किस प्रकार ये आपके जीवन के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
अगर आपके मन में लोन, ब्याज या क्रेडिट हिस्ट्री निर्मित करने को लेकर कोई सवाल हैं तो हमारी ईमेल आईडी पर लिखें- [email protected]
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