
पिछले हफ्ते हमने बात की इंश्योरेंस की। किस तरह वह हमारे जीवन के मुश्किल समय में हमें सुरक्षा प्रदान करता है। इंश्योरेंस वह छतरी है, जिसके नीचे हमें मुश्किलों की अप्रत्याशित बारिश से सुरक्षा मिलती है, पर एक अन्य तरह की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। आपात वित्तीय मुश्किलों से बचने के लिए एक इमरजेंसी फंड आवश्यक है। बहुत सी महिलाएं इसे लेकर आत्मविश्वास महसूस करती है कि उन्होंने फिक्स डिपाजिट या कुछ सेविंग कर रखी है। अप्रत्याशित जरूरतों के लिए उन्होंने घर में कुछ धन सुरक्षित रखा है। कुछ लोगों का यह विश्वास होता है कि आपात स्थितियों में मदद के लिए परिवार आगे आएगा। हालांकि ये समझना चाहिए कि इमरजेंसी फंड मात्र सेविंग्स नहीं है। यह निवेश भी नहीं है और न ही यह किसी से मिलने वाली मदद से संबंधित है। यह इमरजेंसी फंड तो ऐसी आपात परिस्थितियों के लिए आपका निजी फर्स्ट ऐड बाक्स है, जिसे आपने सोचसमझकर तैयार किया है।
एक क्षण के लिए सोचें, पिछली बार कब आपने अप्रत्याशित खर्च को वहन किया था। मेडिकल खर्च या अपरिहार्य अचानक यात्रा का खर्च, स्कूल फीस में अचानक बढ़ोत्तरी, घर की मरम्मत का कार्य या फिर नौकरी जाने, स्वजन की अचानक बीमारी इत्यादि। ऐसी परिस्थितियां पूर्व सूचना देकर नहीं आती, पर उनका सामना करना आवश्यक हो जाता है। इसलिए प्रत्येक महिला के पास एक इमरजेंसी फंड होना चाहिए। इससे मुश्किल परिस्थियों में आप तनाव से दूर रहती हैं साथ ही स्वाभिमान सुरक्षित रहता है। आपको किसी से मदद की याचना नहीं करनी पड़ती, ऊंचे ब्याज पर ऋण नहीं लेना पड़ता और अपनी पालिसी तोड़ने की आवश्यकता नहीं होती। आप बिना डरे, मजबूती के साथ निर्णय ले सकती हैं।

आइये समझते हैं कि ये इमरजेंसी फंड क्या होता है। ये वो धन होता है जिसे आप अप्रत्याशित खर्च के लिए बचाकर रखती हैं। इसका त्योहार, खरीदारी, यात्रा के खर्च से कोई लेना-देना नहीं है। ये उन वास्तविक आपात परिस्थितियों के लिए है, जिनके कारण आपका जीवन, जीविका व स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ता हो।
अब सवाल आता है कि ये फंड कितना होना चाहिए। इसे समझने का एक सरल तरीका है। जितना भी आपका मासिक खर्च होता है, ये राशि उसकी तीन से लेकर छह गुना होनी चाहिए। यदि आपके परिवार का मासिक खर्च 20 हजार रुपये है तो आपका इमरजेंसी फंड 60 हजार से लेकर एक लाख 20 हजार रुपये तक होना चाहिए। यदि आपकी आय अनियमित है तो छह माह या उससे अधिक के कुल मासिक खर्च को इमरजेंसी फंड के रूप में सुरक्षित रखें।
यहां एक महत्वपूर्ण परिप्रेक्ष्य है, जिसकी अनदेखी महिलाएं सामान्यत: कर जाती हैं। आप दो तरह के इमरजेंसी फंड तैयार कर सकती हैं। एक पारिवारिक इमरजेंसी फंड, जो आपके परिवार को बड़े खर्चों जैसे बड़े अपरिहार्य मेडिकल खर्च, नौकरी जाने या अन्य अप्रत्याशित जरूरतें उत्पन्न होने पर संबल दे सके। दूसरा है- निजी इमरजेंसी फंड। इस मद में एक छोटी धनराशि अलग रखें, जो व्यक्तिगत तौर पर आपके लिए हो। यह विशेषकर होममेकर्स या करियर से ब्रेक लेने, अनौपचारिक काम या अस्थायी नौकरी करने वाली महिलाओं के लिए आवश्यक है। ये जरूरी नहीं कि आपका पर्सनल इमरजेंसी फंड बहुत बड़ा हो, 10-15 हजार की छोटी राशि भी आपको आत्मविश्वास व आत्मनिर्भरता देगी।
अब ये बात आती है कि इस धन को कहां रखना उचित होगा। इस धन तक पहुंच हो, पर ये देखना भी जरूरी है कि इतनी सरलता से उपलब्ध न हो कि उसे कभी भी खर्च कर सकें। एक रेगुलर सेविंग अकाउंट इसके लिए अच्छा रहेगा। उससे थोड़ा बेहतर विकल्प है स्वीप सेविंग अकाउंट, इससे आशय है एक सीमा से ऊपर धनराशि फिक्स डिपाजिट अकाउंट में स्वत: स्थानांतरित हो जाती है। बहुत से विशेषज्ञ तरलता वाले म्यूचुअल फंड्स का विकल्प सुझाते हैं, जिनमें स्थिरता हो और धनराशि आसानी से निकाली जा सके, पर आपको अपने इमरजेंसी फंड को दीर्घकालिक फिक्स डिपाजिट, गोल्ड, शेयर्स या जोखिम वाले निवेशों में डालने से बचना चाहिए। आपका उद्देश्य मुश्किल परिस्थितियों में आसानी से धन की उपलब्धता और सुरक्षा है, ना कि रिटर्न।

स्वास्थ्य से जुड़ी आपात परिस्थितियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। हेल्थ इंश्योरेंस होने के बावजूद अस्पताल सामान्यत: शुरुआत में धन डिपाजिट करने को कहते हैं। दवाइयों की तत्काल खरीद की आवश्यकता होती है। कभी-कभी इंश्योरेंस स्वीकृत होने में समय लगता है। यहां पर आपका इमरजेंसी फंड काम आता है। इंश्योरेंस क्लेम प्रोसेस होने तक इसकी मदद से इलाज सुचारू हो पाता है।
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अब आप सोच रही होंगी कि जब पहले ही धन को लेकर हाथ तंग हैं तो इसकी शुरुआत कैसे करें। इसका उत्तर सरल है, छोटी राशि से शुरुआत करें। पांच सौ या हजार रुपये भी पर्याप्त होंगे, जब आप हर माह इतना धन अलग निकालने का अभ्यास कर लेंगी, तो धीरे-धीरे ये राशि बढ़ती जाएगी। जब धन जमा हो जाए तो इसे सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी आपकी है। ध्यान रखें कि ये धन उपहारों, खरीदारी या रोजाना के खर्च के लिए नहीं है।
इस हफ्ते मैं चाहूंगी कि आप एक महत्वपूर्ण अभ्यास करें। नोटबुक उठाएं और अपना आवश्यक मासिक खर्च लिखें- घरेलू सामान, किराया, स्कूल की फीस, दवाइयों, परिवहन, बिजली का खर्च इत्यादि। उन्हें जोड़कर खर्च की कुल राशि लिखें। उसे तीन से गुणा करें। ये आपका न्यूनतम इमरजेंसी फंड होना चाहिए। उसे छह से गुणा करें, उससे जो राशि निकलकर आएगी, वह इमरजेंसी फंड की आदर्श निधि होनी चाहिए। अब स्वयं तय करें कि आपको किस प्रकार शुरुआत करनी है। यदि पहले से आपकी सेविंग्स हैं तो उससे एक हिस्सा निकालकर तत्काल अलग कर दें। यदि अभी ऐसा करना मुश्किल है तो अगले माह से इस दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प लें।
एक बार इन चीजों को लेकर मानसिक स्पष्टता आ गई तो अगला कदम उठाएं। एक अलग बैंक अकाउंट खोलें या अपने बैंक के एप पर जाकर एक अलग सेक्शन निर्मित करें। उसे इमरजेंसी फंड का नाम दें ताकि उसका उद्देश्य सदैव याद रहे। प्रतिमाह एक छोटी राशि उस अकाउंट में स्थानांतरित करें। जब आय बढ़ जाए तो ये राशि बढ़ा भी सकती हैं। शगुन में मिलने वाली राशि या बोनस को भी इसमें डाल सकती हैं। भले ही धीमी गति से इस दिशा में आगे बढ़ें पर उसमें निरंतरता आवश्यक है। इमरजेंसी फंड निर्मित होने पर आपको आत्मिक संतोष मिलेगा। भय से मुक्ति मिलेगी व आत्मविश्वास के साथ मुश्किल दिनों में परिवार का संबल बन सकेंगी। लक्ष्मी सिर्फ अच्छे दिनों में परिवार के साथ नहीं होती, बल्कि अनिश्चिचतता के दौर में भी मजबूती प्रदान करती हैं। उसके लिए तैयार रहना भी श्रद्धा का ही रूप है।
अगले हफ्ते हम बात करेंगे ऋण और क्रेडिट की। किस प्रकार सोचविचार कर ऋण लें और किसी भी जाल से बचें। क्रेडिट को बोझ मानने के बजाय किस प्रकार एक उपकरण की तरह इस्तेमाल करें।
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