
इस हफ्ते हम जानकारी को बढ़ाने का प्रयास करेंगे। यहां शेयर बाजार में शीघ्रता में उतरना उद्देश्य नहीं है, बल्कि ये समझना है कि किसी भी खरीदारी से पहले निवेशक किस प्रकार सोचते हैं, क्योंकि शेयर बाजार में आप क्या खरीदते हैं, उससे ज्यादा फर्क इस बात से फर्क पड़ता है कि आप कैसे सोचते हैं।
जब लोग शेयर बाजार के बारे में बात करते हैं तो सामान्यतः वे कीमतों की चर्चा करते हैं कि अमुक शेयर इतने मूल्य हो गया, इतना गिर गया, पर एक अच्छा निवेशक कीमतों से आगे देखता है। उसके जेहन में उससे अधिक महत्वपूर्ण सवाल होता है कि किस तरह की कंपनी में मैं हिस्सेदार बन रहा हूं।

यहां कुछ बातों पर ध्यान दें। पहली चीज जो निवेशक ध्यान में रखते हैं वो है कंपनी का आकार। आपने कुछ शब्द सुने होंगे लार्ज कैप, मिड कैप, स्माल कैप। दरअसल ये कंपनी के बाजार मूल्य, (जिसे बाजार पूंजी भी कहते हैं) के अनुसार कंपनियों को वर्गीकृत करने के कुछ सरल तरीके हैं।
लार्ज कंपनियां सामान्यत: स्थापित व्यवसाय होते हैं। उन्होंने उतार-चढ़ाव देखे होते हैं, उनकी कमाई में स्थिरता होती है और सामान्यत: उनके मूल्य में दिन-प्रतिदिन बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं आता। यही वजह है कि लार्ज कंपनियों में निवेश में जोखिम कम रहता है। भले ही वे बहुत तेजी से ऊपर नहीं जातीं, लेकिन उनमें स्थायित्व होता है। मिड साइज कंपनियों के आगे बढ़ने की संभावना होती है, लेकिन अनिश्चितता और प्रतिस्पर्धा का भी सामना करना पड़ता है। लार्ज कंपनियों की तुलना में उनके शेयरों के मूल्य तेजी से घटते-बढ़ते हैं। स्माल कंपनियां तेजी से तरक्की करती हैं, लेकिन उनके मूल्य में बहुत तेजी से उतार-चढ़ाव दर्ज किया जाता है। बाजार का प्रभाव उन पर अपेक्षाकृत ज्यादा पड़ता है। उनमें निवेश करने में कोई बुराई नहीं है, पर शुरुआती निवेशकों के लिए वे ज्यादा सुरक्षित नहीं मानी जातीं।

ये सब बातें समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि शेयर बाजार में सिर्फ पैसा डूबने का जोखिम नहीं रहता। इससे आपका मन भी प्रभावित होता है। मूल्य में तेजी से उतार-चढ़ाव आपको परेशान कर सकते हैं, तनाव में नींद प्रभावित हो सकती है। आपकी स्थिरता पर असर पड़ता है।
एक अन्य महत्वपूर्ण चीज है मूल्य और कमाई का अनुपात। सरल शब्दों में इससे पता चलता है कि निवेशक वर्तमान में कंपनी लाभ में प्रति रुपया धन पाने के लिए कितना धन लगाने को तैयार हैं। जब ये अनुपात अधिक होता है तो उसका अर्थ है कि बाजार को उसकी तरक्की की संभावनाएं अधिक दिखती हैं। जब ये अनुपात कम होता है तो निहितार्थ निकलता है कि कंपनी के भविष्य को लेकर भरोसा कम है। ये आंकड़ा आपको निवेश से जुड़ा कोई सटीक उत्तर नहीं देता, लेकिन सही सवाल पूछने के लिए मानसिक स्पष्टता अवश्य देता है।
ये समझना चाहिए कि कोई शेयर अच्छा है या बुरा, ये तय करने का कोई सटीक आंकड़ा नहीं हो सकता। निवेश का कोई फार्मूला नहीं होता। इस निर्णय की परख तो समय के साथ होती है। शेयरों के मूल्य में दिन-प्रतिदिन उतार-चढ़ाव आता है, कई बार व्यवसाय में परिवर्तन की वजह से ऐसा होता है, तो कभी बाजार का माहौल बदलता है। वैश्विक घटनाक्रम, ब्याज दरें, खबरें और अफवाहें भी शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का कारण बनती हैं।
यदि आपके मन में दिनभर में कई बार बाजारभाव देखने की स्वाभाविक इच्छा होती है, तो भी शेयर बाजार में निवेश को लेकर अभी धैर्य रखने की आवश्यकता है। हालांकि ये कोई असफलता नहीं है, ये स्वाभाविक जागरूकता अच्छी बात है। मैं हमेशा कहती हूं कि शेयर बाजार में सीधे निवेश आपका संपूर्ण निवेश पोर्टफोलियो नहीं होना चाहिए। हां ये उसका एक छोटा हिस्सा हो सकता है। विशेषज्ञों के शोध के आधार पर वर्गीकृत किए गए म्यूचुअल फंड्स में निवेश के साथ ही कुछ धन शेयरों में लगा सकती हैं।
बहुत सी महिलाओं ने मुझसे पूछा कि क्या शेयरों में सीधे निवेश करना चाहिए। इसका उत्तर कुछ बातों पर निर्भर करता है। यदि आप इस विषय में पढ़ना, सीखना और पैनी नजर रखना करना पसंद करती हैं, दीर्घकाल के लिए सोचती हैं तो शेयरों में निवेश से लाभ की स्थितियां बन सकती हैं। यदि इसके लिए समय व रुचि नहीं है, तो म्यूचुअल फंड्स अच्छा विकल्प हो सकते हैं।
बहुत से नए निवेशक एक गलती कर जाते हैं, व्हाट्सएप पर कोई फॉरवर्डेड मैसेज आया या किसी ने बाजार के जानकार होने का दावा करते हुए कोई सलाह दी और आपने उस पर जल्दबाजी में अमल कर लिया, यहीं पर आपसे चूक हो जाती है। किसी भी तरह की जल्दबाजी अच्छे निर्णयों की शत्रु होती है। शांत रहकर स्वयं चीजों को देखना-समझना चाहिए।
एक या दो कंपनियों का चयन करें, जिनके विषय में आपने जाना और पढ़ा हो। अभी उनमें निवेश न करें, पर उनके बिजनेस पर कुछ माह तक नजर रखें। ये देखे कि उनके व्यवसाय प्रदर्शन से शेयर के मूल्यों पर क्या असर पड़ता है। इस बात पर भी ध्यान दें कि जब कोई खबर आती है तो उसका बाजार पर क्या असर पड़ता है। ये समझदारी निर्मित करने में कोई जोखिम नहीं है।
इस हफ्ते के अभ्यास में आपको शेयरों की खरीद नहीं करनी है। बस इस विषय में अपनी जानकारी को समृद्ध करना है। कोई ऐसी कंपनी चुनें, जिसके विषय में थोड़ा-बहुत जानती हों। ये देखें कि वह लार्ज, मिड या स्माल कंपनी है। उसके ताजा लाभ को देखें। प्रति रुपया लाभ व निवेश के अनुपात को देखें। आपको अभी कोई धारणा नहीं बनानी है, बस बाजार की चाल को समझना है। स्वयं से सवाल करें कि क्या इस व्यवसाय के साथ लंबे समय तक जुड़े रहने में आप कितना सहज हैं?
अगले हफ्ते हम बात करेंगे कि शेयर क्रय करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। किस प्रकार बाजार की टाइमिंग से अधिक महत्वपूर्ण है सही समय पर लिए गए आपके निर्णय। लगातार क्रय-विक्रय में लगे रहने से अधिक मायने रखता है धैर्य के साथ सही समय की प्रतीक्षा करना। क्योंकि लक्ष्मी कभी जल्दबाजी में नहीं रहती, बल्कि वह तो सीखने और समझने के बाद आत्मविश्वास से बढ़ती है।
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